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पुलिस का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। उदयपुर के नाई पुलिस थाने क्षेत्र में मर्डर के मामले में 5 निर्दोष लोगों को पकड़कर एसएचओ लीलाराम और हेड कांस्टेबल ललित कुमार 15 दिन तक सौदेबाजी करते रहे। जब गरीब आदिवासियों के पास रुपए नहीं मिले तो रिश्वत में

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एडिशनल एसपी गोपाल स्वरूप मेवाड़ा और डिप्टी सूर्यवीर सिंह राठौड़ इस मामले की विभागीय जांच कर चुके हैं। आरोपी हेड कांस्टेबल जोशी ने बयान में कबूल किया कि एसएचओ लीलाराम के कहने पर जमीन के बदले दलाल कैलाश और किशन से 10 लाख रुपए लिए थे। जिसमें 5 लाख खुद ने और 5 लाख रुपए एसएचओ को दिए। एक माह तक मामले को दबाए रखा। भास्कर पड़ताल की भनक लगते ही थानेदार-कांस्टेबल को लाइन हाजिर कर दिया।

14 मार्च-2025 को बाबूलाल के मर्डर मामले में 7 मुल्जिम के अलावा 5 निर्दोष नानजी पुत्र गुंजा, नानू पुत्र कमला, धर्मा पुत्र रुपा, वेसा पुत्र रत्ना और खातू पुत्र हुमा को भी पुलिस ने आरोपी बनाया। इन्हें छोड़ने के लिए हर किसी से 2-2 लाख रुपए की डिमांड की गई। गरीब आदिवासियों के पास पैसे नहीं होने पर रिश्वत में उनकी 4.39 बीघा जमीन ले ली गई।

थानाधिकारी लीलाराम ने इलाके के दो दलाल कैलाश और किशन को इनकी जमीन के सौदे के लिए थाने बुलाया। 24 मार्च 2025 को पांचों को पुलिस की सरकारी गाड़ी में बैठाकर उप पंजीयन, कार्यालय बारापाल ले गए। जहां दोनों दलालों कैलाश और किशन ने डमी बाबूलाल के नाम पर करीब 4.39 बीघा जमीन की पावर ऑफ अटॉर्नी का रजिस्ट्रेशन करवा दिया।

जमीन की पावर ऑफ अटॉर्नी देने के बाद भी 2 दिन बंद रखा, रात में जंगल में छोड़ा जमीन की पावर ऑफ अटॉर्नी के लिए पांच लोगों को थाने की गाड़ी में 24 मार्च-2025 को उप पंजीयन कार्यालय बारपाल में लेकर गए। रजिस्ट्रेशन के बाद फिर इन्हें थाने लाकर बंद कर दिया। 27 मार्च को पुलिस ने इन पांचों लोगों को रात में गाड़ी में बैठाकर एक सुनसान जंगल में छोड़ दिया। इन लाेगाें ने भास्कर काे बताया कि जमीन के बदले इन्हें काेई राशि नहीं दी गई। कोर्ट के एक आदेश में भी उल्लेख है कि जांच अधिकारी ने इन पांचों में से किसी पर आरोप प्रमाणित नहीं माना।

अलसीगढ़ के पीड़ित बोले- हमारे पास 1 बीघा जमीन ही थी, वो भी ले ली, बच्चों काे कैसे पाले? “हमारे पास तो केवल 1 बीघा जमीन थी, वो पुलिस वालों ने ही ले ली। थाने में कपड़े उतरवाए, फंसाने की धमकी दी, पैसे नहीं थे, इसलिए छोड़ने के लिए जमीन ली।”

-नानजी “पुलिस वाला रजिस्ट्री कार्यालय लेकर गया। 1 बीघा ज्यादा जमीन थी, वह ले ली। हम 15 दिनों से ज्यादा तक थाने में ही बंद रखा। जमीन देकर पीछा छुड़ाया।”

-नानू “पैसे नहीं थे तो थानेदार बोलो आपकी जमीन दोगे तभी पीछा छाेड़ूगा। पूरी जमीन ले ली। बच्चों का पालन पोषण कैसे होगा?

-वेसा

“जमीन लड़कों के नाम थी, इसलिए मुझसे गवाह पर अंगूठा लगवाया, मुझे तो पता भी नहीं कि मुझसे अंगूठा क्यों लगवा रहे हैं।”

-खातू

आईजी ने कहा- जांच में प्रमाणित, दोनों लाइन हाजिर “इस मामले की प्राथमिक जांच में एसएचओ व कांस्टेबल दोनों दोषी पाए गए हैं। जिनकों रात को ही लाइन हाजिर कर दिया है। इसके अलावा एसएचओ पर कार्रवाई के लिए प्रस्ताव बनाकर डीजीपी को भेजा है, क्योंकि एसएचओ पर कार्रवाई डीजीपी लेवल पर होती है।” – गौरव श्रीवास्तव, आईजी, उदयपुर



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