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 नाटकवाला कला मंच, आमेर ने दर्शकों को एक अनूठी रंगमंचीय प्रस्तुति ‘मैं तुम और हम’ दी।

नाटकवाला कला मंच, आमेर ने दर्शकों को एक अनूठी रंगमंचीय प्रस्तुति ‘मैं तुम और हम’ दी। यह नाटक मंच के संस्थापक और विलेज थिएटर डेवलपर ओम प्रकाश सैनी के निर्देशन में खेला गया, जिसने प्रेमचंद जयंती नाट्य उत्सव 2025 की श्रृंखला को नई ऊंचाई दी।

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यह सामाजिक और संवेदनशील प्रस्तुति प्रेम की गहराई को आत्मा से जोड़ते हुए दिखाती है। नाटक का संदेश है कि सच्चा प्रेम केवल देह का आकर्षण नहीं, बल्कि आत्माओं का मिलन है, जो प्रेम को अमर बना देता है।

ग्रामीण दर्शकों ने इस साहित्यिक और सांस्कृतिक प्रस्तुति की भरपूर सराहना की। नाटक ने प्रेम की सही परिभाषा को उजागर किया और भारतीय संस्कृति व मानवीय मूल्यों का संदेश दिया।

नाटक ने प्रेम की सही परिभाषा को उजागर करते हुए भारतीय संस्कृति और मानवीय मूल्यों का संदेश दिया।

नाटक ने प्रेम की सही परिभाषा को उजागर करते हुए भारतीय संस्कृति और मानवीय मूल्यों का संदेश दिया।

रंगमंच जीवन का मार्ग

30 दिवसीय निशुल्क रंगमंच कार्यशाला ‘नाटकवाला अभिनयशाला’ के तहत तैयार की गई थी, जिसका आयोजन कला, साहित्य, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग, राजस्थान सरकार के सहयोग से हुआ। ओम प्रकाश सैनी ने बताया कि रंगमंच मेरे लिए केवल कला नहीं, बल्कि जीवन का मार्ग है। यदि सरकार से समुचित सहयोग मिले तो मैं राजस्थान के उन ग्रामीण अंचलों तक रंगमंच पहुंचा सकता हूं जहां अब तक इसका नाम तक नहीं पहुंचा है।

नाटक मुंशी प्रेमचंद की अपेक्षाकृत कम-प्रसिद्ध कहानियों मिस पद्मा, रहस्य और अग्नि समाधी से प्रेरित होकर लिखा गया है। इसे प्रेमचंद को श्रद्धांजलि के रूप में मंचित किया।

नाटक मुंशी प्रेमचंद की अपेक्षाकृत कम-प्रसिद्ध कहानियों मिस पद्मा, रहस्य और अग्नि समाधी से प्रेरित होकर लिखा गया है। इसे प्रेमचंद को श्रद्धांजलि के रूप में मंचित किया।

यह नाटक मुंशी प्रेमचंद की अपेक्षाकृत कम-प्रसिद्ध कहानियों मिस पद्मा, रहस्य और अग्नि समाधि से प्रेरित होकर लिखा गया है। सैनी ने इसे प्रेमचंद को श्रद्धांजलि के रूप में मंचित किया।

‘प्रेमचंद के फटे जूते’ 22 अगस्त को

नाटक के मुख्य कलाकारों में जयश्री शेखावत, मानवेन्द्र सिंह, पियूष सेन, आनंद शर्मा, परम् तेजवानी और यस सैनी शामिल रहे। मंच संचालन में अंजली सैनी, विकास सैनी, प्रवीण कुमावत सहित कई युवा जुड़े। ओम प्रकाश सैनी ने घोषणा की कि आने वाले दिनों में इस नाटक की प्रस्तुतियां स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक मंचों पर की जाएंगी। मुंशी प्रेमचंद नाट्य उत्सव की अगली कड़ी में 22 अगस्त को हरिशंकर परसाई का व्यंग्य ‘प्रेमचंद के फटे जूते’ प्रस्तुत किया जाएगा।



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