अलवर में शहीद नायक प्रहलाद सिंह की वीरांगना गीता देवी मंत्री के पैरों में गिर गईं। बोलीं- 34 साल पहले (23 अक्टूबर 1991 को) ‘ऑपरेशन रक्षक’ के दौरान पति शहीद हो गए, लेकिन उनकी बॉडी आज तक नहीं मिली। मैं कैंसर से पीड़ित हूं और लोग मुझे लगातार परेशान कर र
मालवीय नगर निवासी वीरांगना ने मंत्री से कहा- पति प्रहलाद सिंह 23 अक्टूबर 1991 को जम्मू के बारामूला जिले के पट्टन में आतंकियों से मुठभेड़ में शहीद हो गए थे। दलदल में फंसने के बावजूद हमला करने वाले आतंकी को खत्म कर दिया। फिर उन पर आतंकियों ने एक साथ अंधाधुंध गोलियां बरसा दीं, जिससे वे शहीद हो गए। उनकी बॉडी आज तक नहीं मिली।

शहीद की वीरांगना मंत्री संजय शर्मा के पैरों में गिर गईं।
बिना वजह परेशान करने का आरोप लगाया 15 अगस्त को अलवर के इंदिरा गांधी स्टेडियम में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में पहुंचीं। कार्यक्रम के बीच में गीतादेवी राज्य सरकार के मंत्री संजय शर्मा के पैरों में पड़ गईं। बोलीं कि उनको बिना वजह परेशान किया जा रहा है। उनके घर के आगे 11 हजार वॉल्ट की बिजली की लाइन को शिफ्ट करने की तैयारी है। एक प्रभावशाली व्यक्ति ने प्रशासन को साथ लेकर मुझे परेशान कर दिया है। जबकि मैं कैंसर की मरीज हूं। मुझे जयपुर के महावीर कैंसर हॉस्पिटल जाना पड़ता है।
बोलीं- प्रशासन ने सीढ़ियां तक तोड़ दीं वीरांगना ने कहा- डॉक्टर ने यह तक कह दिया है कि आपकी हड्डियां कमजोर हो गई हैं, इसलिए रैंप से उतरा करो। लेकिन प्रशासन ने उनके घर की सीढ़ियां तक तोड़ दीं। अब प्रभावशाली व्यक्ति के दबाव में आकर घर के मेन गेट के आगे बने रैंप के बगल में बिजली का खंभा गाड़ने की तैयारी कर रखी है।
परेशान करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा वीरांगना मंत्री से बोलीं कि उसे लगातार परेशान किया जा रहा है। हालांकि मंत्री ने भी मंच से कह दिया कि जिन अफसरों ने वीरांगना को मानसिक परेशानी दी है, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।

वीरांगना बोलीं- शहीद पति का बॉडी तक नहीं मिली।
वीरांगना के घर पहुंची भास्कर टीम स्टेडियम के घटनाक्रम के बाद दैनिक भास्कर की टीम वीरांगना के घर पहुंची। वहां वीरांगना अपनी इकलौती संतान बेटी रजनी से मिली। पूरी जानकारी देते हुए मां-बेटी की आंखों में आंसू आ गए। बेटी बोली पिता होते तो हमें डराया नहीं जाता। हम दोनों महिला हैं, इसलिए परेशान किया जाता है। पहले रैंप तुड़वा दिया, अब घर के आगे बिजली का खंभा लगाने की तैयारी है। जबकि पहले से जहां खंभा लगा है, वहां एक व्यक्ति को उससे ऑब्जेक्शन है।

नायक प्रहलाद सिंह 23 अक्टूबर 1991 को जम्मू के बारामूला जिले के पट्टन में आतंकियों से मुठभेड़ में शहीद हुए थे।
वीरांगना बोलीं- पति शहीद हुए तो बेटी तीन साल की थी वीरांगना उस समय भावुक हो गईं, जब उन्होंने यह बताया कि उनके पति 1991 में शहीद हो गए थे। उनका सीना गोलियों से छलनी हो गया था। शहीद होने के बाद उनका शव भी घर नहीं आया। तब बेटी रजनी केवल 3 साल की थी। तब से पिछले करीब 34 सालों से अकेली हूं। पति की बहुत याद आती है। इतना बोलते हुए वीरांगना का गला रुंध हो गया, आंखों से आंसू बह निकले।

मंत्री बोले- जिन अफसरों ने वीरांगना को मानसिक परेशानी दी है, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।
बेटी बोली- पिता होते तो यह सब नहीं झेलना पड़ता शहीद की बेटी रजनी बोलीं कि उनके पिता होते तो मुझे और मां को आज यह सब नहीं झेलना पड़ता। इतना कहते ही रजनी रोने लगीं, उनकी आंखों से आंसू बहने लग गए। रजनी ने कहा कि उनके घर की सीढ़ियों के पास बिजली का खंभा लगाने की तैयारी है।
रजनी ने कहा कि घर के आगे कोई खंभा क्यों लगाने देगा। हमेशा करंट का डर रहेगा। लेकिन प्रशासन सुनता ही नहीं है। वे तो सामने वाले व्यक्ति के प्रभाव में आकर हमें ही डराते हैं। कभी पुलिस बुला लेते हैं, कभी बिजली विभाग वाले आ जाते हैं। हमने शिकायत भी की, लेकिन कोई सुनता नहीं है। मैं अकेली हूं, नौकरी भी करती हूं और मां को भी इलाज के लिए जयपुर लेकर जाती हूं। मां कैंसर की मरीज हैं।

वीरांगना की बेटी बोली- हमारी शिकायत कोई नहीं सुनता।
Discover more from Kuchaman City Directory
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
Comments