नेपाल के काठमांडू में फंसे पेट्रोल-पंप कारोबारी बीते तीन दिनों से होटल में है। उनके परिवार के लोग चिंतित है। पिता बार-बार वीडियो कॉल से बात करके उनके हाल पूछ रहे है। मां के रो-रो कर बुरे हाल है। कुछ बोल नहीं पा रही है। मेरे कलेजे का टुकड़े को वापस भार
कारोबारी की मां शीलादेवी ने दैनिक भास्कर से बातचीत में रोते-रोते हुए बोला मेरा कलेजे का टुकड़ा वापस घर आ जाए। फोन पर बात की तो बताया कि ठीक हूं। यहां पर उपद्रव हो गया है। मेरे बेटे को जल्दी घर आए मेरा मन नहीं लग रहा है।

यह तस्वीर बाड़मेर रेलवे स्टेशन की है जब 24 अगस्त को यहां से माता-पिता ने बेटे को मानसरोवर यात्रा के लिए रवाना किया था।
कारोबार के पिता चंपालाल चितारा- पंकज (45) 24 अगस्त को कैलाश मानसरोवर यात्रा सदगुरु के ग्रुप में गया था। यात्रा करने के बाद नेपाल के काठमांडू को 9 सितंबर को 2 बजे थी। उपद्रव व दंगा होने के बाद हवाई अड्डा बंद कर दिया गया। इस वजह से वहां पर फंसा हुआ है। फिलहाल कोई जानकारी नहीं मिल रही है कि फ्लाइट वापस शुरू होगी। पूरा परिवार चिंतित है। सकुशल वापस अपने घर लौट आए। नेपाल में स्थितियां बहुत खराब है। प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, मंत्री और पुलिस कोई सुरक्षित नहीं है।

मां शीला देवी का रो-रोकर बुरे हाल, बोली कलेजे का टुकड़ा वापस लाओ।
पिता ने सरकार से गुजारिश की है कि राजस्थान और इंडिया के जितने भी सैलानी है उनको सुरक्षित वापस लाया जाए। पंकज से कभी फोन तो कभी वीडियो कॉल करके बात करते है। कल कुछ विमान एयरपोर्ट के आसपास दिखे गए है। हेलिकॉप्टर उड़ रहे है। जब तक सिविल एयरपोर्ट सामान्य नहीं होगा। इंटरनेशनल फ्लाइट शुरू नहीं होगी। आब टिकट बुक करवाई है लेकिन शुरू होने के चांस कम है। हम बहुत चिंतित है हमारे कलेजे का टुकड़ा है। वह वहां पर राजस्थान से अकेला है। इस वजह से खाना-पीना भी ढ़ग से नहीं हो रहा है। घर पर लौटे तब हम खुशी रह सकते है।

पिता ने वीडियो कॉल से बेटे से की बातचीत।
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