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काम के दबाव से तनाव के चलते तहसीलदार की तबीयत बिगड़ गई। इलाज नहीं मिलने से हॉस्पिटल में एक घंटे तक तड़पते रहे और उनकी मौत हो गई। पत्नी का आरोप है कि बीपी चेक नहीं कर पाए, शुगर बढ़ रही थी, लेकिन अटैक का उपचार शुरू नहीं किया गया।
मामला प्रतापगढ़ के पीपलखूंट का है।
जानकारी के अनुसार, पीपलखूंट तहसीलदार योगेश जायसवाल की सोमवार सुबह करीब 7 बजे अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। उन्हें सीने में दर्द और बेचैनी महसूस हुई। पत्नी उषा जायसवाल तुरंत उन्हें पीपलखूंट हॉस्पिटल लेकर पहुंचीं। आरोप है कि अस्पताल में एक घंटे तक उन्हें न तो उचित प्राथमिक उपचार मिला और न ही एंबुलेंस समय पर आई। हालत बिगड़ती गई और तहसीलदार ने दम तोड़ दिया। उनके निधन की खबर मिलते ही पूरे जिले में शोक की लहर दौड़ गई। कलेक्टर डॉ. अंजलि राजोरिया, पुलिस अधीक्षक बी. आदित्य सहित कई प्रशासनिक अधिकारी जिला अस्पताल पहुंचे और श्रद्धांजलि अर्पित की।
पत्नी बोलीं – उपचार शुरू नहीं किया गया
पत्नी उषा जायसवाल ने बताया कि तबीयत बिगड़ने पर उन्होंने अपने पति को हॉस्पिटल पहुंचाया। वहां बीपी भी चेक नहीं किया जा सका क्योंकि मशीन काम नहीं कर रही थी। 8-10 बार प्रयास करने के बाद दूसरी मशीन लाई गई, लेकिन वह भी काम नहीं कर रही थी। शुगर टेस्ट किया तो हाई आ रही थी, ऐसे में अटैक हो सकता था। हॉस्पिटल में अटैक का तुरंत कुछ उपचार शुरू होना चाहिए था, लेकिन एक घंटे तक इलाज नहीं दिया गया।
एंबुलेंस बुलाने पर भी नहीं आई, कहा गया कि वह अभी बाहर गई हुई है। मैं अपने पति को बिना ऑक्सीजन के कैसे ले जाती।
एक महीने पहले ही हुई थी पोस्टिंग
पत्नी उषा ने बताया कि योगेश जायसवाल ने 11 अगस्त को जॉइन किया था। काम को लेकर तनाव था। पति की परेशानी को देखते हुए मैं हाल ही में सुभाष नगर (राजसमंद) से पीपलखूंट आई थीं।
काम के दबाव के चलते था तनाव
पत्नी ने कहा कि पति कई दिनों से मानसिक तनाव और काम के दबाव में थे। स्टाफ की कमी के कारण पूरा बोझ उनके कंधों पर था। कई बार उन्होंने घर पर इसका जिक्र किया था। दो-तीन दिनों से ज्यादा परेशान थे। काम के अलावा किसी और बात से दिक्कत नहीं थी।
जिला अस्पताल पहुंची कलेक्टर बोली – जांच करवाएंगे
कलेक्टर डॉ. अंजलि राजोरिया ने कहा कि इस मामले में परिजनों से बातचीत की और संवेदना व्यक्त करते हुए आश्वासन दिया कि यदि स्वास्थ्य सेवाओं में कोई लापरवाही पाई गई तो जांच कर सख्त कार्रवाई की जाएगी। डॉक्टर से रिपोर्ट मंगवाई है और परिजनों से भी बात हुई है।
मरीज को जब अस्पताल लेकर आए थे, तब स्टाफ ने उपचार दिया
सुखराम अंडाना, बीसीएमओ पीपलखूंट ने बताया कि मरीज को जब अस्पताल लेकर आए थे, तब हमारे स्टाफ द्वारा उन्हें पूरा उपचार दिया गया। ड्रिप भी लगाई। रही बात 108 एंबुलेंस की, तो उन्हें कॉल करनी पड़ती है, और वह कॉल पर ही आती है। एंबुलेंस को कॉल 8 बजकर 3 मिनट पर किया गया और 8 बजकर 30 मिनट पर आ गई।
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