चित्तौड़गढ़ के इंदिरा गांधी स्टेडियम में गुरुवार रात दशहरा महोत्सव का आयोजन किया गया। हर साल की तरह इस बार भी लोग रावण दहन देखने के लिए बड़ी संख्या में पहुंचे। हजारों की भीड़ स्टेडियम में उमड़ आई और माहौल “जय श्रीराम” के नारों से गूंज उठा। लेकिन इस ब

बटन दबाने के बाद नहीं जले पुतले।
महोत्सव की सबसे बड़ी कड़ी परीक्षा पुतला दहन थी। इसके लिए नगर परिषद की ओर से 71 फीट ऊंचा रावण और 51-51 फीट ऊंचे कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले बनाए गए थे। तय समय पर मेघनाद को 8:22 पर, कुंभकर्ण को 8:23 पर और रावण को 8:24 पर बटन दबाकर जलाने की कोशिश की गई। लेकिन तीनों ही पुतले बटन दबाने के बाद भी खड़े रहे, उनमें आग नहीं लगी। यह देखकर दर्शकों में निराशा फैल गई और लोग आपस में फुसफुसाते हुए आयोजन की तैयारी पर सवाल उठाने लगे।
मशक्कत के बाद लगी आग, पलभर में खत्म तमाशा
बटन से आग न लगने पर आयोजकों ने नीचे घास में आग लगाई। इसके बाद पुतले धीरे-धीरे धधकने लगे। लेकिन यहां भी दर्शकों की उम्मीदों पर पानी फिर गया। मेघनाद का पुतला सिर्फ 10 सेकंड में, कुंभकर्ण 30 सेकंड में और 71 फीट ऊंचा रावण भी केवल 50 सेकंड में ही जलकर राख हो गया। तीनों पुतलों का ढहना इतना जल्दी हुआ कि लोग ठगा-सा महसूस करने लगे। जिन पुतलों को देखने हजारों लोग घंटों पहले से बैठे थे, उनका तमाशा पलभर में खत्म हो गया।

कुछ ही सेकंड में जल गए पुतले।
रामलीला ने खींचा ध्यान, खूब बटोरी तालियां
पुतला दहन की असफलता से पहले निंबाहेड़ा के जय श्रीराम मंडल द्वारा रामलीला का मंचन किया गया। इसमें भगवान राम, लक्ष्मण और माता सीता के वनवास का दृश्य, सीता हरण और फिर मेघनाद, कुंभकर्ण व रावण वध के प्रसंग दिखाए गए। रामलीला इतनी जीवंत और प्रभावशाली रही कि दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। हर दृश्य पर तालियां गूंज उठीं और लोग रामायण की झलकियों में डूब गए। कहा जा सकता है कि रामलीला ने आयोजन को कुछ हद तक संभाल लिया।

रावण के वध का दृश्य।

रावण और श्री राम के बीच युद्ध का एक नजारा।

मेघनाद की मौत के बाद रावण अपने पुत्र के लिए शोक व्यक्त करते हुए।

हनुमान जी के साथ युद्ध का दृश्य।

कुंभकर्ण का अंत करते हुए।
साधु-संत और अधिकारियों की रही मौजूदगी
इस मौके पर रामद्वारे के रमता राम जी महाराज, दिग्विजय राम जी महाराज और विनोद यति जी महाराज का आशीर्वाद मिला। इसके अलावा सांसद सीपी जोशी, जिला पुलिस अधीक्षक मनीष त्रिपाठी, एडिशनल एसपी सरिता सिंह और एडीएम विनोद मल्होत्रा भी मंच पर मौजूद रहे। मंच संचालन डॉ. सुशीला लड्ढा और पंकज झा ने किया। उन्होंने पूरे समय माहौल को जीवंत बनाए रखने की कोशिश की।प्रोग्राम में सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से कोई चूक नहीं हुई। कोने-कोने में पुलिस जाब्ता तैनात रहा और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अधिकारी लगातार निगरानी करते रहे।
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