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राजस्थान के जयपुर स्थित रामगढ़ बांध में 1 सितंबर, सोमवार को कृत्रिम बारिश कराने का प्रयोग सफल हुआ है।
राजस्थान के जयपुर स्थित रामगढ़ बांध में 1 सितंबर, सोमवार को कृत्रिम बारिश कराने का प्रयोग सफल हुआ है। एक्सेल-1 कंपनी ने हाइड्रोट्रेस प्लेटफॉर्म और स्वदेशी ड्रोन की मदद से यह प्रयोग किया।
इससे पहले 12 और 18 अगस्त को किए गए प्रयास असफल रहे थे। 1 सितंबर को किए गए तीसरे प्रयास में 0.8MM बारिश दर्ज की गई। यह ऑपरेशन GenXAI के सहयोग से संपन्न हुआ।
AI-संचालित तकनीक का उपयोग
कंपनी ने AI-संचालित तकनीक का उपयोग किया। इससे क्लाउड माइक्रो फिजिक्स में सुधार देखा गया। क्लाउड सीडिंग में सिल्वर आयोडाइड, सोडियम क्लोराइड या ड्राई आइस जैसे रसायन बादलों में छोड़े जाते हैं। ये रसायन पानी की सूक्ष्म बूंदों को आकर्षित कर उन्हें भारी बनाते हैं। इससे बारिश होती है। इस प्रक्रिया के लिए बादलों में पर्याप्त नमी होना आवश्यक है।
किरोड़ी बोले- जल प्रबंधन में महत्वपूर्ण उपलब्धि
डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने इसे राजस्थान के जल प्रबंधन में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि यह मेक इन इंडिया नवाचार के माध्यम से भारत की जलवायु सहनशीलता और आत्मनिर्भरता में योगदान करेगा।
इससे पहले दो बार रहा था असफल
12 अगस्त के पहले प्रयास में एक तकनीकी समस्या आई थी। अधिक भीड़ के कारण मोबाइल फोन से GPS सिस्टम प्रभावित हुआ। इससे ड्रोन का कनेक्शन टूट गया और प्रयोग असफल रहा।
वहीं 18 अगस्त को भी ट्रायल किया गया लेकिन ड्रोन कंट्रोल से बाहर होने की वजह से खेतों में जा गिरा था.
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