पाली के बापूनगर विस्तार में स्थित इस्कॉन मंदिर में इस्कॉन के संस्थापक स्वामी प्रभुपाद का जन्मोत्सव पर आयोजित कार्यक्रम में मौजूद भक्त।
जगत के पालनहार श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के दूसरे दिन रविवार शाम को पाली शहर के बापूनगर विस्तार (अमरनाथ नगर) में इस्कॉन के संस्थापक ए.सी. भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद का जन्मोत्सव मनाया गया। इसका लेकर यहां हरे कृष्ण… महामंत्र सहित कई धार्मिक कार्यक्रम
कार्यक्रम की शुरुआत महामंत्र जप से हुई। उसके बाद मंगल आरती, नृसिंह आरती, तुलसी आरती तथा गुरु पूजा की गई। जिसमें इस्कॉन के संस्थापक ए.सी. भक्ति वेदांत स्वामी प्रभुपाद के जन्मोत्सव फूलों श्रृंगार किया गया। इस्कॉन (अन्तर्राष्ट्रीय कृष्ण भावनात्मक संघ) के संस्थापक आचार्य कृष्ण कृपा मूर्ति भक्ति वेदांत स्वामी प्रभुपाद ने बताया कि इस्कॉन एक ऐसा घर बनाया है जिसमें पूरा विश्व रह सकता है।

इस्कॉन मंदिर में सजाई गई राधा कृष्ण की प्रतिमा।
कार्तिक कृष्ण प्रभु ने बताया कि 1896, कलकत्ता, पश्चिम बंगाल, भारत में (जन्माष्टमी के एक दिन बाद नंदोत्सव पर) इस्कॉन (अन्तर्राष्ट्रीय कृष्ण भावनात्मक संघ) के संस्थापक आचार्य भक्ति वेदांत स्वामी प्रभुपाद का जन्म हुआ था। वे 70 वर्ष की आयु में हरे कृष्ण महामंत्र के रूप में भगवान के पवित्र नामों का प्रचार करने के लिए अमेरिका गए।
जिनकी 70 से ज़्यादा पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं, जिनमें श्रीमद्भागवत , भगवद्गीता, चैतन्य चरित्रामृत और कई वैदिक ग्रंथों का अनुवाद शामिल है। उन्होंने दुनिया भर में हरे कृष्ण महामंत्र संकीर्तन और जगन्नाथ रथ यात्रा की शुरुआत की और हो सकता है कि आपने दुनिया के किसी भी शहर में, सड़कों पर हरे कृष्ण महामंत्र का मधुर संगीत गाते भक्तों को देखा हो।
श्रील प्रभुपाद ने अपनी अपार करुणा, कृपा और निस्वार्थ प्रेम से सभी को जीत लिया। इस दौरान उनके जीवन चरित्र को नाटक के जरिए समझाया गया।

पाली के बापूनगर विस्तार में स्थित इस्कॉन मंदिर में इस्कॉन के संस्थापक स्वामी प्रभुपाद का जन्मोत्सव पर आयोजित कार्यक्रम में मौजूद भक्त।
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