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चिकित्सा एवं मेडिकल शिक्षा विभाग के दो ग्रुप के भगवान माने जाने वाले डॉक्टरों की आपसी खींचतान का असर मरीजों पर पड़ रहा है। अस्पतालों में इलाज के लिए आए लोगों को आउटडोर में लंबी कतारें और देरी का सामना करना पड़ा। मंगलवार को एसएमएस अस्पताल में सुबह 8 स
इधर, एसएमएस अस्पताल परिसर में मंगलवार को भी धरना जारी रहा। राजस्थान मेडिकल कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन के बैनर तले डॉक्टरों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और रैली निकाली। यह रैली एसएमएस अस्पताल से प्रारंभ होकर धन्वन्तरि, ट्रोमा सेंटर और चरक भवन होते हुए मेडिकल कॉलेज तक पहुंची।
डॉक्टर्स की प्रमुख मांगें
- मेडिकल शिक्षा में ग्रुप-2 के डॉक्टरों की लेटरल एंट्री पर रोक, कॉलेजों में एसोसिएट के बजाय केवल असिस्टेंट प्रोफेसर से ही भर्ती प्रक्रिया शुरू हो।
- भर्ती केवल आरपीएससी, अजमेर के जरिए ही हो, एनएमसी (नई दिल्ली) के नियमानुसार समय पर डीपीसी और नियमित भर्ती के लिए पॉलिसी बने।
“मरीजों को परेशानी नहीं हुई दो घंटे कार्य बहिष्कार के चलते मरीजों को परेशानी नहीं हुई। सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों ने जिम्मेदारी संभाली।” – डॉ. सुशील भाटी, अधीक्षक, एसएमएस अस्पताल
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