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यूनिट का निरीक्षण करते अधिकारी
किसान मेहनत करता है, खेतों में पसीना बहाता है, पर कटाई के बाद उपज का बड़ा हिस्सा भंडारण और संरक्षण की कमी से खराब हो जाता है। यही वजह है कई बार किसानों की मेहनत अधूरी रह जाती है। लेकिन अब डीग से एक नई सकारात्मक पहल हुई है। कुम्हेर स्थित कृषि विज्ञान
श्री कर्ण नरेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय के प्रसार शिक्षा निदेशालय के निदेशक डॉ. आर.एन. शर्मा ने इसका उद्घाटन किया। यह यूनिट किसानों को भंडारण, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन की पूरी जानकारी एक ही जगह उपलब्ध कराएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से किसानों की आय में 25 से 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी संभव है।
यूनिट से न केवल उपज का संरक्षण होगा बल्कि प्रसंस्करण के जरिए कुकीज़, बिस्किट्स, केक, मठरी, सेव और अन्य पैकेज्ड फूड जैसे उत्पाद भी तैयार किए जा सकेंगे। इससे किसानों के साथ-साथ ग्रामीण युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। यानी अब मेहनत का फल सिर्फ खेतों में ही नहीं, बल्कि बाजार तक सही कीमत के साथ पहुंचेगा।
किसानों को कैसे मिलेगा फायदा?
कृषि विज्ञान केंद्र की वैज्ञानिक डॉ. प्रियंका जोशी ने बताया कि फसल को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकेगा। कटाई के बाद होने वाला नुकसान (पोस्ट हार्वेस्ट लॉस) कम होगा। उपज को मूल्य संवर्धित उत्पादों जैसे बिस्किट, कुकीज़, सेव, मठरी, केक आदि में बदलकर बेचा जा सकेगा। ग्रामीण युवाओं को खाद्य प्रसंस्करण व मूल्य संवर्धन का प्रशिक्षण मिलेगा। महिला किसान भी खाद्य प्रसंस्करण से जुड़कर आत्मनिर्भर बन सकेंगी। डॉ. प्रियंका जोशी ने बताया यूनिट किसानों के लिए सिर्फ मशीनें नहीं, बल्कि एक नई सोच लाई है।
“इस यूनिट से किसानों की आय में 25 से 30% तक की सीधी बढ़ोतरी होगी। यह प्रोसेसिंग यूनिट किसानों को उत्पादक से उद्यमी बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। इससे न सिर्फ किसानों की जेब मजबूत होगी बल्कि युवाओं और महिलाओं को भी नए रोजगार मिलेंगे।” -नवाब सिंह, अध्यक्ष कृषि विज्ञान केंद्र कुम्हेर।
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