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रक्षाबंधन पर्व ब्राह्मण समाज के विप्रवरों ने जनेऊ बदले। पुरानी जनेऊ को उतारकर नई, पवित्र जनेऊ धारण की। सहस्र औदिच्य ब्राह्मण समाज पूंजपुर ने श्रावणी उपाकर्म का आयोजन पूंजेला तालाब की पाल पर किया। समाज अध्यक्ष ओम प्रकाश रावल के नेतृत्व में कार्यक्रम हुआ। आचार्य चंदूलाल शुक्ला ने सभी ब्राह्मणों को दशविधि संस्कार के बाद नवीन यज्ञोपवीत धारण करवाया। यह ब्राह्मण समाज का सबसे बड़ा पर्व माना जाता है। कार्यक्रम में भरत रावल, तरुण पंड्या, चंद्रेश रावल, महेश पंड्या, ललित रावल, शत्रुघ्न रावल, हेमंत पंड्या, दिनेश पंड्या और डायालाल पंड्या सहित समाजजन मौजूद रहे।

रक्षाबंधन और श्रावण पूर्णिमा के अवसर पर सरोदा, पादरड़ी, बड़ी सामलिया सहित आसपास के गांवों के ब्राह्मणों ने शनिवार को पारंपरिक विधि से श्रावणी उपाकर्म किया। सरोदा के सांगेला तालाब पर आचार्य प्रदीप पाठक और अभिषेक पाठक के निर्देशन में यह आयोजन हुआ। विप्रजनों ने दशविधि स्नान, हेमाद्रि श्रावण, ऋषि पूजन, देव ऋषि और पितृ तर्पण की विधियां पूरी कीं। इसके बाद सभी ने नया यज्ञोपवीत धारण किया।

आचार्य चंद्रकांत शुक्ला ने बताया कि श्रावणी उपाकर्म आत्मशुद्धि का पर्व है। इसे ब्राह्मणों का मुख्य त्योहार माना जाता है। प्राचीन समय में विद्यार्थी इसी दिन गुरुकुल जाकर शिक्षा की शुरुआत करतेभीलूड़ा। सनातन धर्मावलंबियों ने माही नदी के पास स्थित नीलकंठ मंदिर परिसर में श्रावणी उपाकर्म कर जनेऊ बदले। आचार्य शैलेन्द्र भट्ट एवं उपाचार्य पंकज भट्ट ने अभिषेक कर्म व ऋषि पूजन करवाया और गायत्री मंत्र के सामूहिक उच्चारण के साथ नवीन जनेऊ धारण किए। थे।



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