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सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेन्द्र कुमार झुंझुनूं पहुंचे

केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेन्द्र कुमार मंगलवार को झुंझुनूं पहुंचे। जिले में अपने निजी कार्यक्रम के बाद वे शाम 4 बजे सर्किट हाउस पहुंचे, जहां मीडिया से वार्ता कर उन्होंने मंत्रालय की गतिविधियों, केंद्र व राज्य स्तर पर चल रही य

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मंत्री ने कहा कि सामाजिक न्याय मंत्रालय का उद्देश्य केवल योजनाओं का संचालन करना नहीं है, बल्कि जरूरतमंद तक योजनाओं की सही तरह से पहुंच सुनिश्चित करना भी है।

उन्होंने बताया कि झुंझुनूं में वर्तमान में नशा मुक्ति केंद्र और ओल्ड एज होम जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। इस पर उन्होंने जिला प्रशासन को निर्देशित किया कि इनकी स्थापना के लिए प्रस्ताव तैयार कर राज्य सरकार के माध्यम से मंत्रालय को भेजा जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार इस दिशा में वित्तीय सहयोग और तकनीकी मार्गदर्शन देने के लिए तैयार है।

नशा मुक्ति केंद्र की जरूरत

डॉ. वीरेन्द्र कुमार ने कहा कि आज समाज में युवाओं के बीच नशा एक बड़ी समस्या बनती जा रही है। ग्रामीण से लेकर शहरी क्षेत्रों तक इसका दुष्प्रभाव देखा जा सकता है। ऐसे में नशा मुक्ति केंद्र की स्थापना बेहद जरूरी है। उन्होंने जिला प्रशासन को कहा कि अगर यहां से प्रस्ताव आता है तो केंद्र सरकार हर संभव सहायता उपलब्ध कराएगी। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि प्रदेश के अन्य जिलों में भी नशा मुक्ति केंद्र सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं और झुंझुनूं में भी ऐसी सुविधा होनी चाहिए।

ओल्ड एज होम की कमी पर जताई चिंता

मंत्री ने बुजुर्गों की स्थिति को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज के बदलते सामाजिक परिवेश में बुजुर्गों की देखभाल के लिए ओल्ड एज होम जैसी संस्थाओं की आवश्यकता है।

झुंझुनूं में इस तरह का केंद्र नहीं होने से यहां के वृद्धजनों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि इस दिशा में योजना बनाकर जल्द प्रस्ताव भेजा जाए ताकि वृद्धाश्रम की स्थापना हो सके और बुजुर्गों को सम्मानजनक जीवन मिल सके।

दिव्यांगों के लिए विशेष पहल

डॉ. वीरेन्द्र कुमार ने बताया कि सामाजिक न्याय मंत्रालय दिव्यांगजनों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए लगातार काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि झुंझुनूं में अगर कोई संगठन या व्यक्ति दिव्यांगों के हित में अच्छा काम करना चाहता है तो मंत्रालय से उन्हें पूरा सहयोग मिलेगा।

चाहे वह शिक्षा, कौशल विकास या पुनर्वास से जुड़ा कार्य हो, सरकार उनका हाथ थामेगी। उन्होंने प्रशासन को कहा कि जिले में दिव्यांग जनों के आंकड़े और उनके लिए चल रही योजनाओं की जानकारी मंत्रालय तक पहुंचाई जाए, ताकि भविष्य में बेहतर कार्ययोजना बनाई जा सके।

विशेष बच्चों पर दिया जोर

मंत्री ने उन बच्चों के बारे में भी चर्चा की जो सुनने और बोलने में असमर्थ हैं। उन्होंने कहा कि इन बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना हम सबकी जिम्मेदारी है। मंत्रालय की ओर से कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनका लाभ इन विशेष बच्चों को दिलाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि अगर जिले में इस तरह के बच्चों के लिए विशेष विद्यालय या केंद्र स्थापित करने की पहल होती है तो केंद्र सरकार पूरा सहयोग करेगी।

पेंशन में गड़बड़ी पर सख्त रुख

पत्रकारों द्वारा पूछे गए एक सवाल पर मंत्री ने कहा कि अगर किसी जिले में अपात्र व्यक्ति पेंशन ले रहा है तो यह गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों को राज्य सरकार को संज्ञान में लेना चाहिए और संबंधित विभाग को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। अपात्रों को हटाकर वास्तविक पात्रों तक पेंशन पहुंचाना ही सरकार का उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि अगर झुंझुनूं जिले में भी इस तरह के मामले सामने आते हैं तो उन पर जांच कर कार्यवाही सुनिश्चित होनी चाहिए।

प्रशासनिक अधिकारियों से हुई बैठक

मीडिया वार्ता से पहले मंत्री ने जिला प्रशासन के अधिकारियों से मुलाकात की। इस दौरान सामाजिक न्याय अधिकारिता विभाग से जुड़ी योजनाओं की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि मंत्रालय की ओर से कई कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनकी जानकारी आमजन तक पहुंचाना जरूरी है। उन्होंने जोर दिया कि लाभार्थियों तक योजनाओं की पहुंच तभी संभव है जब स्थानीय प्रशासन गंभीरता से प्रयास करे।



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