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वे वागड़ क्षेत्र के कंसारा समाज की पहली महिला हैं, जिन्होंने पीएच.डी. की डिग्री हासिल की है।
शीतल कंसारा ने यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, जयपुर से डॉक्टर ऑफ फिलॉस्फी (पीएच.डी.) की उपाधि प्राप्त की है। सितंबर 2025 को विश्वविद्यालय की शैक्षणिक परिषद की सिफारिश पर उन्हें यह उपाधि औपचारिक रूप से प्रदान की गई। वे वागड़ क्षेत्र के कंसारा समाज की पहल
कंसारा ने अपना शोध “प्राकृतिक वातावरण का माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धियों पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन” विषय पर किया। इस शोध का मुख्य उद्देश्य यह समझना था कि वायु गुणवत्ता, प्राकृतिक परिवेश, हरियाली और सामाजिक वातावरण जैसे पर्यावरणीय कारक विद्यार्थियों की पढ़ाई और उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों को कैसे प्रभावित करते हैं।
शोध से यह निष्कर्ष निकला कि एक सकारात्मक और अनुकूल वातावरण विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य और शैक्षणिक प्रदर्शन को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह अध्ययन न केवल शिक्षा नीति निर्माताओं के लिए, बल्कि अभिभावकों और शिक्षकों के लिए भी उपयोगी साबित होगा।
यह शोधकार्य डॉ. रीता बिष्ट के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। शीतल कंसारा ने जुलाई 2020 में अपना शोध कार्य शुरू किया था और चार वर्षों की कड़ी मेहनत के बाद जुलाई 2024 में इसे सफलतापूर्वक पूरा किया। डॉ. बिष्ट ने उन्हें शोध प्रक्रिया के दौरान महत्वपूर्ण शैक्षणिक मार्गदर्शन प्रदान किया।
शीतल कंसारा की यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि सामाजिक और क्षेत्रीय दृष्टि से भी अत्यंत प्रेरणादायक है। वागड़ क्षेत्र के कंसारा समाज की पहली महिला के रूप में पीएच.डी. प्राप्त कर उन्होंने अपने समाज और क्षेत्र का नाम रोशन किया है। यह सफलता क्षेत्र की अन्य बेटियों और छात्राओं को उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी।
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