☜ Click Here to Star Rating


वर्ल्ड हेरिटेज में शुमार जयपुर परकोटा शहर में जर्जर हो चुके दशकों पुराने मकान मौत बनकर टूट रहे हैं। गुरुवार को 12 दिन में दूसरी बार हादसा हुआ। एक जर्जर मकान की छत के नीचे दबकर बुजुर्ग महिला धन्नीबाई (60) की मौत हो गई। उन्हें बचाने गई बहू सुनीता (35)

.

हादसे की पड़ताल के लिए भास्कर टीम मौके पर पहुंची। हादसे में बचे बच्चों ने बताया कि उनकी मां ने कई बार मकान मालिक को फोन कर मरम्मत के लिए कहा था। लेकिन गौर नहीं किया गया। इस मकान को ध्वस्त करने का नोटिस दिया जा चुका था। उसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।

पड़ताल में सामने आया कि नगर निगम जयपुर हेरिटेज के 4 जोन में 178 मकान इसी तरह जर्जर हो चुके हैं। इनके मालिकों को नोटिस देकर महज खानापूर्ति की जा रही है। कई मकानों में अवैध फैक्ट्रियां तक संचालित हो रही हैं। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…

दीवार में दरार आ गई थी, मैंने कहा मम्मी भागो, इतने में गिर गया मकान सुभाष चौक के नजदीक राम कुमार धाभाई का रास्ता पर झिलाई हाउस में काफी पुराना मकान बना हुआ था। बुजुर्ग धन्नीबाई बहू और पोते-पोतियों के साथ इसी मकान में रहती थीं।

हादसे में बाल-बाल बची सुनीता की बेटी रीना (11) चौथी क्लास में पढ़ती है। सुबह स्कूल जाने के लिए तैयारी कर रही थी।

रीना ने बताया कि सुबह मम्मी घर का काम कर रही थी, दादी अंदर कमरे में थीं। मुझे दीवार में दरार नजर आई तो मैंने मम्मी को कहा कि दीवार में दरार पड़ती जा रही है। दादी को बाहर लेकर भागो।

मम्मी भागकर कमरे में दादी के पास गईं…इधर मैं और 8 साल का भाई बाहर निकले ही थे कि मकान गिर गया। हमारे सामने ही मम्मी और दादी मकान में दब गए। फिर हमने बड़े गेट के पास आकर शोर मचाया, तब भैया मदद के लिए आए।

हादसे में ये दोनों बच्चे बाल-बाल बचे। भास्कर से बातचीत के दौरान बच्चों ने बताया कि मकान मालिक को कई बार हालत के बारे में बताया था।

हादसे में ये दोनों बच्चे बाल-बाल बचे। भास्कर से बातचीत के दौरान बच्चों ने बताया कि मकान मालिक को कई बार हालत के बारे में बताया था।

मम्मी ने अंकल को कहा था मकान से चूना गिरता है, ठीक करवाओ बच्ची रीना ने बताया कि मकान पुराना था। इसमें छत से पपड़ी, चूना गिरता रहता था। मम्मी ने कई बार मकान मालिक को कहा कि इसे ठीक करवा दो। लेकिन, अंकल ये बोलते थे कि टाइम मिलेगा, तब करवाएंगे। वो कहते थे कि सभी मकान पुराने ही तो हैं। दो-तीन दिन पहले भी मम्मी ने फोन कर बोला था कि जगह-जगह से इसमें टूट-फूट हो रही है। अंकल ने ये कहकर फोन काट दिया कि घर पर रिश्तेदार आए हुए हैं…पार्टी चल रही है, बाद में बात करेंगे।

मकान का मालिक प्रदीप शाह।

मकान का मालिक प्रदीप शाह।

यह मकान प्रदीप शाह का है। मकान सौ साल से भी ज्यादा पुराना है। मुख्य मकान के बाहर दीवार के पास रहने के हिसाब से पोर्शन बनाया हुआ था। वह भी जर्जर था। इसी पोर्शन में चौकीदारी के लिए महिला, उसकी सास और बच्चे रहते थे। दादी दिनभर बच्चों को संभालती थी। मां एक स्कूल में चपरासी का काम करती है।

धमाका हुआ और बच्चे चिल्लाने लगे, मकान मालिक नहीं देता था ध्यान इस जर्जर भवन के पास गली में रहने वाले शिव कुमार ने बताया कि सुबह करीब 6:55 बजे यह घटना हुई। मैं बाहर के कमरे में ही था। अचानक धमाका हुआ। इतने में ही चैनल गेट के पास बच्चों के चिल्लाने की आवाज आई।

मैं गेट के पास गया तो गेट पर अंदर से ताला लगा हुआ था। चाबी तो अंदर मकान में दब गई। इतने में गली के युवक आए और चैनल गेट पर चढ़कर अंदर कूदे। ताला तोड़कर गेट खोला। हम अंदर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी।

मलबा हटाकर बुजुर्ग महिला को बाहर निकाला। तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। मेरी बेटी ने उन्हें पानी पिलाने की कोशिश की, लेकिन वह निढाल थीं।

शिव कुमार ने बताया कि मकान मालिक की और भी कई प्रॉपर्टी हैं। यहां वह केवल कोई मजदूरी का काम करवाना हो या मलबा डालना हो, तभी आता था।

यह वह मकान है, जहां पर हादसा हुआ और उसमें एक बुजुर्ग की मौत हो गई।

यह वह मकान है, जहां पर हादसा हुआ और उसमें एक बुजुर्ग की मौत हो गई।

पास के मकान में चल रही कपड़ा फैक्ट्री मकान मालिक प्रदीप शाह का हादसे वाले घर के पास एक मकान और है। उस मकान को उसने रिश्तेदारों को किराए पर दे रखा है। बीते कई साल से प्रदीप शाह के किराएदार रेजिडेंशियल एरिया में कपड़े की फैक्ट्री चला रहे हैं।

मौके पर पहुंचे विधायक बालमुकुंदाचार्य ने उस मकान को देखा और सील करने के निर्देश दिए। इधर, सबसे बड़ी बात कि ये भी जर्जर हो रहा है और कभी भी यहां बड़ा हादसा हो सकता है।

परकोटा क्षेत्र में कई मकानों में व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं।

परकोटा क्षेत्र में कई मकानों में व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं।

रेजिडेंशियल एरिया में चल रहीं फैक्ट्रियां, रंगाई-छपाई, रत्नों का काम परकोटे में ज्यादातर मकानों को उनके मालिकों ने व्यवसायियों को किराए पर दे रखा है। 12 दिन पहले इसी क्षेत्र में 4 मंजिला हवेली भरभराकर गिर गई थी, जिसमें पिता-बेटी की मौत हो गई थी। उस मकान के कमरे में भी रत्नों की घिसाई का काम चलता था।

इन रहवासी मकानों में अवैध रूप से व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं। लेकिन इस तरफ निगम का कोई ध्यान नहीं है। नगर निगम जयपुर हेरिटेज के अधिकारियों का कहना है कि हमारे पास शिकायतें ही नहीं आईं। जबकि इस इलाके में बड़े स्तर पर कपड़ा, नगीने का काम होता है। कभी निगम ने सर्वे नहीं करवाया।

12 दिन पहले हुए हादसे में जर्जर मकान ने पिता-बेटी की जान ले ली थी।

12 दिन पहले हुए हादसे में जर्जर मकान ने पिता-बेटी की जान ले ली थी।

विधायक की शिकायत तक नहीं सुन रहे निगम अधिकारी मौके पर पहुंचे विधायक बालमुकुंदाचार्य से भास्कर ने जर्जर मकान और उनमें व्यावसायिक गतिविधियों पर सवाल किए तो उन्होंने अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा- कई बार शिकायत दी गई है। लेकिन अधिकारी नहीं सुनते। वे अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं कर रहे हैं।

नगर निगम की डिप्टी कमिश्नर सीमा चौधरी ने बताया कि हम इसका भी सर्वे करवाएंगे। रहवासी मकानों में व्यावसायिक गतिविधियां अवैध हैं। हमारे संज्ञान में मामले आ रहे हैं, उन्हें नोटिस जारी किए जाएंगे। आज भी एक ऐसे ही रहवासी मकान मालिक के नाम नोटिस जारी करेंगे।

हादसे के बाद मौके पर पहुंचे विधायक बालमुकुंदाचार्य ने निगम अधिकारियों को सख्त लहजे में एक्शन लेने को कहा।

हादसे के बाद मौके पर पहुंचे विधायक बालमुकुंदाचार्य ने निगम अधिकारियों को सख्त लहजे में एक्शन लेने को कहा।

170 से ज्यादा मकान जर्जर, किशनपोल में सबसे ज्यादा नगर निगम जयपुर हेरिटेज के चार मुख्य जोन किशनपोल, हवामहल, आदर्श नगर और सिविल लाइंस में 170 से ज्यादा मकान जर्जर चिह्नित हैं। नियमानुसार इन्हें नोटिस देकर ध्वस्त करना था। लेकिन अभी तक 3 मकानों पर ही एक्शन लिया गया।

परकोटा इलाके के किशनपोल जोन में सबसे ज्यादा जर्जर भवन हैं। यहां निगम की तरफ से 79 भवनों को जर्जर मानते हुए खतरनाक स्थिति में माना है।

नगर निगम उपायुक्त सीमा चौधरी ने इस बिल्डिंग को गिराने वाला नोटिस दिखाया। उनका दावा है कि मकान मालिक को ये नोटिस 12 अगस्त को दिया गया था।

नगर निगम उपायुक्त सीमा चौधरी ने इस बिल्डिंग को गिराने वाला नोटिस दिखाया। उनका दावा है कि मकान मालिक को ये नोटिस 12 अगस्त को दिया गया था।

निगम अधिकारियों के अनुसार सभी को नोटिस भी दे दिए। महज 3 जर्जर भवन ही ध्वस्त किए गए हैं। वहीं 44 मकान मालिकों ने अभी तक नोटिस का जवाब नहीं दिया है।

चौंकाने वाली बात ये है कि निगम अधिकारियों ने 50 दिन से ज्यादा दिन निकलने के बावजूद उन मकान मालिकों को दोबारा नोटिस नहीं भेजा है।

हालांकि निगम अधिकारियों का दावा है कि 32 मकान मालिकों ने खुद के स्तर पर मकानों को ठीक करने की बात कही है। ऐसे में उन्हें समय दिया गया है।

नोटिस पर नोटिस, एक्शन नहीं लेने पर अधिकारियों का तर्क – आपसी विवाद और कोर्ट स्टे भी कारण नगर निगम अधिकारी जर्जर हो चुके मकान मालिकों को नोटिस जारी होने के दावे तो कर रहे हैं। लेकिन भास्कर पड़ताल में सामने आया कि नोटिस तामील नहीं करवाए गए। कर्मचारी नोटिस लेकर जाते हैं। लेकिन वहां असली मालिक नहीं मिलते। ऐसे में कर्मचारी मकान के बाहर वह नोटिस चस्पा कर खानापूर्ति कर देते हैं। नोटिस देने के बाद कोई फॉलोअप नहीं होता।

निगम अधिकारियों का कहना है कि मकान मालिकों की तरफ से जवाब नहीं दिया जाता, तब उन्हें दूसरा नोटिस भेजा जाता है। गुरुवार को जहां हादसा हुआ, नगर निगम उपायुक्त सीमा चौधरी के मुताबिक इस बिल्डिंग को गिराने के लिए मकान मालिक को 12 अगस्त को नोटिस दे दिया गया था। लेकिन मकान मालिक प्रदीप शाह ने दावा खारिज करते हुए कहा है कि मुझे आज तक कोई नोटिस नहीं मिला।

निगम अधिकारियों की मानें तो उनके सामने इसमें समस्या यह आती है कि कई भवनों के मामले आपसी लड़ाई में, मकान मालिक या किरायेदार के विवाद के फंसे हुए हैं। मामले कोर्ट में चले जाते हैं। कई मामलों में कोर्ट का स्टे आ जाता है। जैसे आदर्श नगर में पांच मकानों में कोर्ट स्टे है।

मेयर का दावा- मीटिंग लूंगी, लापरवाह अधिकारियों पर होगी कार्रवाई इधर, हादसे के बाद पहुंची नगर निगम जयपुर हेरिटेज मेयर कुसुम यादव भी वही बात दोहराती नजर आई कि अधिकारियों पर एक्शन लिया जाएगा। मैं इस मामले में मीटिंग लूंगी।

क्या अधिकारी जनप्रतिनिधियों की बात नहीं सुन रहे, इस सवाल पर उन्होंने कहा कि जो भी लापरवाह है, उसके खिलाफ एक्शन लेंगे। वहीं उन्होंने कहा कि मकान मालिक भी लालच में जर्जर भवनों को किराए पर न दे।

…………………..

ये खबर भी पढ़ें…

1. जयपुर में मकान ढहने लगा तो सास पर लेटी बहू:बुजुर्ग की मौत; खतरनाक बिल्डिंग की लिस्ट में थी, नहीं गिराई; आरोपी मालिक बोला- नहीं मिला नोटिस

जयपुर के पुराने शहर में एक जर्जर मकान ढह गया। हादसे में सास और बहू दब गईं। बुजुर्ग सास की मलबे में दबने से मौके पर ही मौत हो गई। जबकि बहू घायल है…(CLICK कर पढ़ें)

2. जयपुर में 4 मंजिला मकान गिरा, अंदर 19 लोग थे:बाप-बेटी की मौत, 5 लोग घायल, मकान मालिक मृतक के परिजनों को देगा 6 लाख

जयपुर में 4 मंजिला जर्जर हवेली भरभराकर ढह गई। मलबे में 7 लोग दब गए, सभी को बाहर निकाल लिया गया है। हादसे में पिता-पुत्री की मौत हो गई, दो बच्चों समेत 5 घायलों को SMS हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया है। जहां उपचार के बाद एक को छुट्टी दे दी गई।​​​​​​…(CLICK कर पढ़ें)



Discover more from Kuchaman City Directory

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Comments

Leave a Reply

error: Content is protected !!

Sign In

Register

Reset Password

Please enter your username or email address, you will receive a link to create a new password via email.

Discover more from Kuchaman City Directory

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading