विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने प्रदेश सरकार पर बड़ा बयान दिया है। डोटासरा ने कहा कि इस सरकार में मुख्यमंत्री,मंत्रियों और विधायकों की चपरासी,एसडीएम, तहसीलदार तक नहीं सुनता। दरअसल आज गोविंद सिंह डोटासरा सीकर के लक्ष्

फीता काटकर पंचायत भवन का लोकार्पण करते हुए पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा और अन्य।
मीडिया से बातचीत में पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि विधानसभा में सरकार की नाक में नकेल डालकर इनको मजबूर कर देंगे कि जनता की आवाज सुननी पड़ेगी और जनता के काम करने पड़ेंगे। सीएमआर में बैठकर थोथी गाल बजाई करना बंद कर देना दीजिए।
मुख्यमंत्री, मंत्री और विधायकों की कोई एसडीएम,तहसीलदार,चपरासी तक नहीं सुनता, इससे बड़ा दुर्भाग्य कोई हो नहीं सकता। 70 साल के इतिहास में इतनी बुरी स्थिति नहीं हुई कि कोई विकास नहीं है, कोई विजन नहीं है,जनता का कोई काम नहीं हो रहा है। 5 साल बाद में भी चुनाव नहीं करवा पा रहे हैं।

कार्यक्रम में डोटासरा के अलावा सीकर सांसद अमराराम भी मौजूद रहे।
एक तरफ तो कहते हैं कि दिसंबर में चुनाव करवा देंगे और दूसरी तरफ कहते हैं कि 2027 में करवाएंगे। परिसीमन उल्टा-सीधा, इधर-उधर जो उनके मन में आया वह किया। यहां भी पंचायत समिति बनाई, ग्राम पंचायतें बनाई। तब भी हमने कहा कि ठीक है यदि जनता चाहती है तो वह काम होना चाहिए।
हमारे नगर में जबरदस्ती नरोदड़ा और मानासी को मिला दिया। लेकिन आज तक यह नहीं पता चल पाया कि उसके वार्ड कितने हुए। जो काम मई में होना चाहिए था वह अब अगस्त तक नहीं हुआ है। इनकी मंशा नहीं है कि चुनाव हो। यह कैपेबल भी नहीं है सरकार चलाने के लिए, इसलिए यह दिक्कत आ रही है।

डोटासरा ने कहा कि SIT ने भर्ती निरस्त करने का लिखकर दे दिया था तो सरकार ने पौने दो साल में इसे रद्द क्यों नहीं किया।
सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा मामले पर बोलते हुए गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि सरकार के पास दिल्ली से पर्ची नहीं आई। इसलिए अपने-अपने मन के टोरे लगा रहे हैं। कोई लेना-देना नहीं,किसी को कुछ पता नहीं है। कुछ करना है नहीं। बस इनको तो कांग्रेस सरकार द्वारा शुरू की गई अच्छी योजनाओं को बंद करना,केवल उनको गाली देना,भ्रामक दुष्प्रचार करना यही काम है।
मैं मुख्यमंत्री से पूछना चाहता हूं कि जब आपने स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम का गठन किया,जिसने लिख दिया कि भर्ती निरस्त होनी चाहिए तो फिर आपने पौने दो साल तक इसे निरस्त क्यों नहीं किया। अब जब हाईकोर्ट कह रहा है कि भर्ती निरस्त कर दी,तब आपका विधि मंत्री कह रहा है की भर्ती निरस्त नहीं की। आप लोग एक बात लेकर तो जनता के बीच में जाओ।
हम यह नहीं कहते कि आप यह करो, वह करो। हम तो यह चाहते हैं कि आप कम से कम निर्णय तो लो,आप निर्णय तक नहीं ले सकते। कोर्ट ने निर्णय ले लिया अब उस पर भी मुख्यमंत्री और मंत्री की कंट्रोवर्सी है, इससे बड़ा दुर्भाग्य हमारे प्रदेश का कोई हो नहीं सकता।
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