पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने सांवलिया जी मंदिर में सांवरा सेठ के दर्शन कर अपना जन्मदिन मनाया।
पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने इस बार अपना जन्मदिन खास अंदाज में मनाया। वे चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित प्रसिद्ध सांवरा सेठ के मंदिर पहुंचे और दर्शन कर आशीर्वाद लिया। पायलट का यह दौरा सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि राजनीतिक नजरिए से भी अहम माना जा रहा है।
दरअसल, मेवाड़ क्षेत्र को हमेशा से चुनावी राजनीति में बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। कहा जाता है कि जो पार्टी मेवाड़ में अच्छा प्रदर्शन करती है, उसकी सरकार बनने के चांस ज्यादा होते हैं। यही वजह है कि कई बड़े नेता, खासकर वसुंधरा राजे जैसे बीजेपी के दिग्गज, अपने चुनाव अभियान की शुरुआत मेवाड़ के धार्मिक स्थलों से करते आए हैं। ऐसे में सचिन पायलट का वहां जाकर दर्शन करना और जन्मदिन के मौके पर जनता से मिलने का फैसला राजनीतिक रणनीति से भी जुड़ा माना जा रहा है।

सचिन पायलट सांवलिया जी पहुंचे, इस दौरान उनके कई कार्यकर्ता मौके पर मौजूद रहे।
सांवरा सेठ में सबकी आस्था है
पायलट ने मंदिर में दर्शन करने के बाद कहा कि मेवाड़ वीरों की भूमि है और यहां के लोगों की आस्था सांवरिया जी में गहरी है। मेवाड़ के लोग यहां आकर धोक लगाकर को मांगते है, वो पूरी होती है। उन्होंने भगवान से प्रार्थना की कि राजस्थान के लोग मिलजुलकर रहें, विकास हो, भाईचारा बना रहे और जात-पात से ऊपर उठकर समाज आगे बढ़े। उन्होंने कहा कि बारिश और ग्रहण होने के बावजूद वे दर्शन कर पाए, इसे वह सौभाग्य मानते हैं। पायलट ने यह भी बताया कि मंदिर परिसर में कई लोगों ने उन्हें सामूहिक प्रार्थना के लिए बुलाया और उन्होंने खुशी-खुशी सभी के साथ दर्शन किए।

सचिन पायलट का चित्तौड़गढ़ के सांवलिया जी आना भी राजनीतिक दृष्टि से देखा जा रहा है।
प्रदेश की सरकार सिर्फ सत्ता का आनंद ले रही है
इसके बाद सचिन पायलट ने मीडिया से बातचीत में राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पिछले लगभग पौने दो सालों में सरकार हर मोर्चे पर विफल रही है। चाहे वह कानून व्यवस्था की बात हो, युवाओं को नौकरी देने की बात हो या फिर विकास के वादों की बात हो, सरकार किसी भी क्षेत्र में ठीक से काम नहीं कर पा रही है। जनता अब बदलाव चाहती है और वह चाहती है कि अगली बार फिर से कांग्रेस की सरकार बने।
उन्होंने कहा कि यह सरकार जनता की सरकार है, लेकिन जो वादे किए गए थे वे पूरे नहीं हुए हैं। उन्होंने नरेगा जैसी योजनाओं के खत्म होने की बात कही और कहा कि राज्य में विकास रुक गया है, कानून व्यवस्था खत्म हो गई है और दलितों, आदिवासियों, महिलाओं के साथ लगातार शोषण हो रहा है। इसके साथ ही उन्होंने अफसरशाही के बढ़ते दबदबे पर भी चिंता जताई।
पायलट ने कहा कि कई जगहों पर बाढ़ आई है लेकिन अब तक राहत और बचाव के लिए न राज्य सरकार ने कोई घोषणा की है और न ही केंद्र सरकार ने कोई पैकेज दिया है। उन्होंने कहा कि फसलें खराब हो रही हैं लेकिन सरकार को सिर्फ सत्ता का आनंद लेना है, जनता की परेशानियों से उन्हें कोई लेना-देना नहीं है।

उनकी सभा में कई कार्यकर्ता पहुंचे।
झालावाड़ केस में अभी तक सरकार का कोई जवाब नहीं
उन्होंने झालावाड़ की घटना का भी ज़िक्र किया, जहां कुछ मासूम बच्चों की जान चली गई थी। पायलट ने सवाल उठाया कि इसके लिए कौन जिम्मेदार है—मंत्री, अधिकारी, ठेकेदार या कोई और? उन्होंने कहा कि सरकार को इसका जवाब देना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि पूरे प्रदेश में एक ऑडिट किया जाना चाहिए जिससे यह पता चले कि कहां-कहां ऐसी जर्जर इमारतें हैं जो गिर सकती हैं। सरकार को तत्काल इमरजेंसी फंड से इन जगहों पर काम शुरू करना चाहिए। लेकिन पायलट का कहना है कि वर्तमान सरकार की कार्यशैली बहुत निराशाजनक है और इससे आम लोग बेहद परेशान हैं।
प्रदेश में नशे की लत में है युवा
इसके अलावा सचिन पायलट ने युवाओं के बीच बढ़ रही नशे की लत पर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जब वे प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में घूमते हैं, तो उन्हें यह देखकर बहुत दुख होता है कि छोटे-छोटे बच्चे नशे के शिकार हो रहे हैं। खासकर केमिकल वाले नशे की लत ने कई युवाओं का जीवन बर्बाद कर दिया है। उन्होंने बताया कि जब कोई बच्चा नशे की चपेट में आ जाता है, तो उसके परिवार वाले भी संकोच में रहते हैं और मदद नहीं मांगते, जिससे स्थिति और बिगड़ती जाती है। पायलट ने कहा कि सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए और युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए अलग-अलग स्तरों पर काम करना चाहिए, चाहे वह जागरूकता हो, इलाज की व्यवस्था हो या फिर नशा सप्लाई करने वालों पर सख्त कार्रवाई हो। उन्होंने यह भी कहा कि यह समस्या अब इतनी गंभीर हो चुकी है कि अगर अभी से नहीं संभाला गया, तो आने वाले समय में इसका असर पूरे समाज और राज्य पर पड़ेगा।

मंदिर के पुजारी द्वारा उन्हें प्रसाद दिया गया।
अशोक गहलोत के बाद सचिन को मुख्य नेता के रूप में देखने की अटकलें
सचिन पायलट के इस पूरे दौरे को लेकर यह अटकलें भी लगाई जा रही हैं कि वे आने वाले समय में खुद को गहलोत के बाद कांग्रेस का बड़ा चेहरा बनाना चाहते हैं। मेवाड़ जैसे इलाके से शुरुआत करना भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। अब देखना यह होगा कि उनके इस दौरे और बयानों का आने वाले समय में राजस्थान की राजनीति पर क्या असर पड़ता है।
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