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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय समन्वय बैठक आज सुबह 9 बजे लालसागर स्थित आदर्श विद्या मंदिर में शुरू हो गई है। सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के नेतृत्व में संघ विचारधारा के सभी 32 संगठनों के 320 प्रमुख कार्यकर्ता इस बैठक में सत्रवार शामिल हो रहे हैं
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा सहित सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले और सभी छह सह सरकार्यवाह – डॉ. कृष्ण गोपाल, सी आर मुकुंद, अरुण कुमार, रामदत्त, आलोक कुमार और अतुल लिमये भी इस महत्वपूर्ण बैठक में उपस्थित हैं।
पंच परिवर्तन पर केंद्रित चर्चा
तीन दिवसीय बैठक में मुख्यतः ‘पंच परिवर्तन’ के पांच प्रमुख विषयों पर गहन मंथन हो रहा है। इसमें सामाजिक समरसता की स्थापना, कुटुंब प्रबोधन के तहत आदर्श परिवारों का निर्माण, पर्यावरण संरक्षण को जीवनशैली में शामिल करना, स्व-आधारित विकास (स्वभाषा, स्वभूषा, स्वावलंबन) और नागरिक कर्तव्यों के पालन पर विस्तृत चर्चा शामिल है।
चुनौतीपूर्ण राज्यों पर विशेष फोकस
बैठक के पहले दिन राष्ट्रीय एकता और सुरक्षा के नजरिए से पंजाब, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों की वर्तमान चुनौतियों पर केंद्रित चर्चा हो रही है। संघ सूत्रों के अनुसार, इन राज्यों में संघ विचारधारा के संगठनों की रणनीति और आगामी कार्ययोजना पर भी मंथन किया जा रहा है।
सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त
परिसर में त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था
बैठक स्थल पर सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए हैं। जोधपुर पुलिस की पर्याप्त संख्या में तैनाती के साथ-साथ आरएसएस के स्वयंसेवकों की विशेष टीमें भी परिसर के भीतर सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। स्वयंसेवक हर आने वाले व्यक्ति की पहचान सत्यापित करने के लिए परिचय पत्र की जांच कर रहे हैं। इसके बाद भी उन्हें आमंत्रितों की सूची में नाम मिलान के बाद ही प्रवेश दे रहे हैं।
इसी तरह, भागवत व नड्डा सहित अन्य वीवीआईपी की यहां मौजूदगी को देखते हुए एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और आपातकालीन सेवाओं की विशेष टीमें भी तैनात की गई है।
आमजन को कोई असुविधा नहीं, मुख्य मार्ग खुले रखे
संघ के इस आयोजन के बावजूद स्थानीय लोगों को किसी तरह की असुविधा नहीं होने दी जा रही है। परिसर के बाहर मुख्य मार्गों को बंद नहीं किया गया है, जिससे आमजन को कोई परेशानी नहीं हो रही है।
शताब्दी वर्ष की तैयारी पर भी चर्चा
आगामी विजयादशमी से शुरू होने वाले संघ के शताब्दी वर्ष समारोह की व्यापक तैयारियों पर भी आज चर्चा होने की उम्मीद जताई जा रही है। 2 अक्टूबर को नागपुर से शुरू होने वाले इस ऐतिहासिक समारोह की रूपरेखा और देशभर में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की योजना पर संघ के सभी संगठन कैसे-क्या योगदान देंगे, उस पर भी मंथन किया जा सकता है।
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