बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने जगदीप धनखड़ के इस्तीफे को लेकर कहा- जिस दिन उन्होंने त्यागपत्र दिया, उस दिन में सदन में मौजूद था। वह सदन चला रहे थे और कांग्रेस आक्रामक थी। उन्होंने कांग्रेस को शांत करने का प्रयास किया। जिसके बाद उन्होंने 15 मिनट के
उसके बाद उपसभापति आए, उप राष्ट्रपति नहीं आए। उन्होंने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दिया है। वह इतने बड़े पद पर हैं वह कभी गलत नहीं कहेंगे।
बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ रविवार को भरतपुर में थे। उन्होंने यहां मीडिया से बात की।
राठौड़ ने कांग्रेस पर आरोप लगाया। कहा- कांग्रेस ने रोहिंग्या और बांग्लादेशियों के नाम वोटर लिस्ट में जुड़वाए। अब कट गए तो, उन्हें निराशा हो रही है।
कांग्रेस में रोहिंग्या-बांग्लादेशियों के नाम जुड़वाए
राठौड़ ने मीडिया से कहा- इस देश पर कौन शासन करेगा इसका निर्णय करने का अधिकार देश के नागरिक को है। इसका निर्णय करना रोहिंग्या या बांग्लादेशी को नहीं हो सकता। जिन्होंने (कांग्रेस) रोहिंग्या और बांग्लादेशियों का नाम जुड़वा दिया उन्हें तो, निराशा होगी।
राठौड़ ने कहा- चुनाव आयोग ने बताया है कि ऐसे आरोप निष्पक्ष संस्था (चुनाव आयोग) पर प्रश्न चिन्ह लगाकर उसकी प्रतिष्ठा को धूमिल करते हैं। दुनिया की नजरों में भारत का लोकतंत्र शर्मसार होता है।
जो लोग दुश्मन की भाषा बोलते हैं वह इस देश का नागरिक नहीं हो सकते। इसलिए हमने घर-घर तिरंगा लगाया। राष्ट्रभक्ति को जगाने के लिए अभियान चलाया।

कार्यक्रम में गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम भी मौजूद रहे। उन्होंने राठौड़ का साफा पहना कर स्वागत किया।
बोले- हमारी पार्टी में व्यवस्थित काम होता है
प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने नई कार्यकारिणी को लेकर कहा कि राजस्थान या दिल्ली की कार्यकारिणी एक प्रक्रिया है। उसकी समिति बनती है। फिर मंडल की इकाई बनती है फिर मंडल की समिति बनती है। उसके बाद जिलाध्यक्ष बनता है फिर जिले की समिति बनती है। वह तीन-तीन नाम भेजते हैं उसके बाद लिस्ट आई है।
उसके बाद प्रदेश अध्यक्ष और प्रदेश की समिति सुझाव देती है। इसी तरह से प्रदेश की समिति को नाम भेजती है उसको लेकर राष्ट्र नेतृत्व अपनी सहमति देता है। हमारे यहां सामूहिक निर्णय होता है। हमारे यहां सभी काम व्यवस्थित तरीके से करते हैं।

सोनिया गांधी 1980 मतदाता बनी और 1983 में भारत की नागरिक
बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने वोट चोरी के मामले पर कहा कि कांग्रेस राज्यसभा और लोकसभा को चलने नहीं दे रही है। कांग्रेस अपने गिरेबान में झांक कर नहीं देखती कि वोट चोरी किसने की है। सोनिया गांधी खुद 1980 में भारत की मतदाता बन गई थी जबकि वह भारत की नागरिक 1983 में बनी। मतदाता पुनरीक्षण हर साल होता है।
बालिग होने पर युवाओं का नाम जोड़ा जाता है। जो दुनिया से चला गया उसका नाम काटा जाता है। किसी व्यक्ति ने एक जगह से दूसरी जगह नाम लिखवाया तो, पहली वाली जगह से उसका नाम काटा जाता है। यह प्रावधान है तो, उसमें किसे दिक्कत है। जब जांच होगी तो, पाया जाएगा कि वह इस देश का नागरिक ही नहीं है तो, इस पर आपत्ति क्यों है।
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