राजस्थान में RGHS अधिकृत दवा विक्रेताओं ने कहा है कि अगर हमारी मांग नहीं मानी गई तो दवा देना बंद कर देंगे। आरोप है कि सरकार के वादा करने के बावजूद महीनों से भुगतान अटका हुआ है। रोज परेशान किया जा रहा है।
दरअसल, सोमवार को प्रादेशिक दवा विक्रेता समिति की प्रदेश स्तरीय मीटिंग मानसरोवर के सिटी पार्क के सामने होटल रॉयल बाग में हुई। इस बैठक में राजस्थान के विभिन्न जिलों से दवा विक्रेता शामिल हुए। अपनी प्रमुख मांगों को सरकार के सामने रखने का फैसला किया।
काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराएंगे
प्रादेशिक दवा विक्रेता समिति के अध्यक्ष विवेक विजयवर्गीय ने बताया- डॉक्टर दवा लिखते हैं, दवा विक्रेता दवा उपलब्ध करवाते हैं। लेकिन सरकार बिल रोक देती है। जिम्मेदारी कौन लेगा? कई बार बड़े अधिकारियों तक अपनी बात पहुंचाने के बावजूद सुनवाई नहीं हुई। फिलहाल राजस्थान के लगभग 5 हजार दवा विक्रेता 15, 16 और 17 सितम्बर को सांकेतिक विरोध करेंगे। इस दौरान केमिस्ट काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराएंगे। अगर इसके बाद भी सरकार ने भुगतान नहीं किया तो दवा विक्रेता RGHS के तहत दवा देना पूरी तरह बंद कर देंगे।

प्रादेशिक दवा विक्रेता समिति के अध्यक्ष विवेक विजयवर्गीय ने पूरे मामले की जानकारी दी।
880 करोड़ रुका भुगतान, 51 लाख लोग प्रभावित होने की आशंका
विवेक विजयवर्गीय ने बताया कि प्रदेश भर के केमिस्टों का करीब 880 करोड़ रुपए का भुगतान अटका हुआ है। राजस्थान में लगभग 5 हजार दवा विक्रेता RGHS से जुड़े हैं। जो पिछले चार साल से सरकार के लगभग 13 लाख कार्मिकों और उनके 38 लाख परिजनों को कैश लैस दवाई उपलब्ध करवा रहे हैं।
अब अगर सरकार ने बकाया बिलों का भुगतान नहीं किया तो दवा विक्रेताओं के पास दवाएं देना बंद करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। इससे पहले सभी दवा विक्रेता जयपुर में एकत्र होकर महासभा करेंगे और आगे की रणनीति तय करेंगे।

जयपुर में एकत्र हुए प्रदेशभर के RGHS अधिकृत दवा विक्रेता
180 दिन से अटका भुगतान, 4 लाख बिल गायब
दवा विक्रेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार ने 21 दिन में भुगतान करने का वादा किया था, लेकिन पिछले 180 दिनों से भुगतान अटका हुआ है। TPA (Third Social gathering Administrator) की मनमानी और फर्जी तरीके से बिल रिजेक्ट करने से हालात और खराब हो गए हैं। कई दवा विक्रेता ब्याज पर कर्ज लेकर दुकान चला रहे हैं। कुछ को तो घर के गहने तक गिरवी रखने पड़े हैं।
दवा विक्रेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि RGHS पोर्टल से 4 लाख से ज्यादा बिल गायब कर दिए गए हैं। बिल रिजेक्शन के लिए मनमाने कारण दिए जा रहे हैं। किसी भी प्रोडक्ट की वजह से पूरे बिल को रोक दिया जाता है। यहां तक कि यदि किसी मरीज के नाम में ‘मिस्टर” या “मिसेज’ लिखा हो तो उसे नाम मिसमैच बताकर बिल खारिज कर दिया जाता है।
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