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इस साल मानसून की अच्छी बारिश ने बूंदी के जलाशयों को पानी से लबालब करने के साथ-साथ उन्हें राजस्व और रोजगार का बड़ा केंद्र भी बना दिया है। जिला मत्स्य विभाग की वैज्ञानिक पद्धतियों से की जा रही मछली पालन से आर्थिक समृद्धि और पर्यावरण संरक्षण दोनों हो रह

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विभाग को उम्मीद है कि उत्पादन भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचेगा, जिससे किसानों की आमदनी और बढ़ेगी। बूंदी. लबालब भरे 39 जलाशयों में मछली पालन हो रहा है । मछलियां बना रही है पानी को अमृत यह पहल केवल आर्थिक लाभ नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का भी उदाहरण है। वैज्ञानिक रूप से सिद्ध है कि मछलियां जलाशयों की गुणवत्ता सुधारती है। रोहू, कतला और सिल्वर कार्प जैसी मछलियां पानी में मौजूद अतिरिक्त शैवाल और सूक्ष्म जीव खाकर उनकी वृद्धि को नियंत्रित करती है। इससे पानी साफ और पारदर्शी बनता है। नतीजा जलाशयों का पारिस्थितिकी तंत्र और भी स्वस्थ हो जाता है। बूंदी का यह मॉडल साबित करता है कि नियंत्रित और वैज्ञानिक मछली पालन न केवल राजस्व और उत्पादन बढ़ाता है, बल्कि बहुमूल्य जल स्रोतों को भी पुनर्जीवित करता है।



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