☜ Click Here to Star Rating


राजसमंद में रात में एक भालू बिना मुंडेर के कुएं में गिर गया। रातभर पानी में बैठा रहा। सुबह ग्रामीणों की सूचना पर वन विभाग की टीम पहुंची। भालू पानी में था इसलिए उसको ट्रेंक्यूलाइज करना उचित नहीं था। इस लिए टीम ने सीढ़ी को कुएं में डाला। भालू दांत से सी

.

वन विभाग की टीम ने करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत करके देसी जुगाड़ से रेस्क्यू किया। बाहर निकलते ही भालू ने रेस्क्यू टीम की तरफ झपटा तो सभी चिल्लाने लगे। इसके बाद वह जंगल की तरफ चला गया। मामला भीम उपखंड के डांसरिया पंचायत के डूंगाजी गांव में शनिवार का है।

3 तस्वीरों में देखिए भालू का रेस्क्यू …

भालू कुएं में गिरने के बाद एक तरफ दुबक कर बैठा था।

भालू कुएं में गिरने के बाद एक तरफ दुबक कर बैठा था।

वन विभाग की टीम ने ग्रामीणों के सहयोग से आधे घंटे में रेस्क्यू किया।

वन विभाग की टीम ने ग्रामीणों के सहयोग से आधे घंटे में रेस्क्यू किया।

कुएं से बाहर निकलते ही भालू पहले रेस्क्यू टीम की तरफ झपटा, शोर मचाने पर जंगल की ओर भाग गया।

कुएं से बाहर निकलते ही भालू पहले रेस्क्यू टीम की तरफ झपटा, शोर मचाने पर जंगल की ओर भाग गया।

सुबह किसान ने अपने खेत में देखा था

दरअसल, भालू गांव के माधोसिंह के खेत में बने कुएं में गिर गया था। किसान सुबह करीब 9 बजे अपने खेत पर पहुंचा तो कुएं में भालू को देख चौंक गया।

माधोसिंह ने बताया कि कुआं करीब 75 फीट गहरा है, जिसमें 50 फीट पानी भरा हुआ है। भालू कुएं के एक ​हिस्से में दुबक कर बैठा हुआ था। इस पर उसने गांव की सरपंच कंचन कवर को सूचना दी। सरपंच ने वन विभाग की टीम को इस बारे में बताया।

भालू को देसी जुगाड़ से वन विभाग की टीम ने रेस्क्यू किया।

भालू को देसी जुगाड़ से वन विभाग की टीम ने रेस्क्यू किया।

रस्सी से बांधकर सीढ़ी उतारी, बाहर रस्सी पकड़ खड़ी रही वन विभाग की टीम

भालू की सूचना पर एसीएफ प्रियव्रत सिंह जेतावत और रेंजर जसराज पारीक टीम के साथ मौके पर पहुंचे। राजसमंद से भी वन विभाग की टीम बुलाई गई। भालू को निकालने के लिए दो देसी जुगाड़ अपनाए गए। पहली बार में बांस की लकड़ी का स्ट्रक्चर कुएं में डाला गया ताकि भालू उसे पकड़ बाहर आ जाए। लेकिन, वह उसे पकड़ नहीं पाया।

इसके बाद गांव वालों से एक सी​ढ़ी मंगवाई और उसे कुएं में उतारा गया। लेकिन, वह छोटी होने के कारण भालू तक नहीं पहुंच पाई।

जब दो जुगाड़ फेल हो गए तो तीसरा जुगाड़ तैयार किया गया। इसमें सीढ़ी के दोनों सिरे को रस्सी से बांधकर कुएं में उतारा गया।

बाहर की तरफ वन विभाग की टीम और ग्रामीण रस्सी को पकड़े हुए थे। करीब आधे घंटे तक भालू उस पर नहीं चढ़ा। इसके बाद उसने जैसे-तैसे सीढ़ी पकड़ी और बाहर आने का प्रयास करने लगा।

भालू अपने दांत और पैरों की मदद से एक-एक कर सीढ़ी चढ़ा और बाहर आया।

कुएं से बाहर आने के बाद भालू जंगल में भाग गया।

कुएं से बाहर आने के बाद भालू जंगल में भाग गया।

बाहर आते ही टीम की तरफ दौड़ा, ग्रामीण बोले-रात में दो भालुओं की हुई थी लड़ाई

रेंजर पारीक ने बताया कि भालू कुएं में एक कोने में दुबका हुआ था। यदि ट्रेंकुलाइज करते तो पानी में होने की वजह से दवाई का असर कम होता और उसकी जान को भी खतरा था। ऐसे में देसी जुगाड़ से बाहर निकालने का निर्णय लिया।

जैसे ही भालू कुएं से बाहर आया, वह टीम की तरफ भागा। इसी बीच वहां मौजूद लोगों ने शोर मचाया तो वह पलटकर जंगल की तरफ भाग गया।

इधर, ग्रामीणों का कहना है कि देर रात दो भालुओं में लड़ाई हुई थी। कुआं बिना मुंडेर का था। इस लड़ाई में एक भालू इस कुएं में गिर गया। हालांकि वन ​विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ये कैसे गिरा, इसके बारे में जानकारी नहीं है।



Discover more from Kuchaman City Directory

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Comments

Leave a Reply

error: Content is protected !!

Sign In

Register

Reset Password

Please enter your username or email address, you will receive a link to create a new password via email.

Discover more from Kuchaman City Directory

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading