किशनगढ़बास में कला मंच समिति द्वारा आयोजित श्रीरामलीला मंचन के अंतर्गत सोमवार रात रामेश्वरम स्थापना और रावण-अंगद संवाद की लीला का मंचन किया गया। इस धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में दर्शक उमड़े, जिससे पूरा वातावरण ‘जय श्रीराम’ के उद्घोष से गूंज उठा।
मंचन से पूर्व, कार्यक्रम के मुख्य अतिथि किशनगढ़बास उपखंड अधिकारी मनीष जाटव और उनकी पत्नी प्रीतिसिंह (एसीजेएम) ने श्रीराम की आरती उतारी। इस अवसर पर राजस्थान कर्मचारी संघ जिला अध्यक्ष सुधीर यादव,तिजारा उपखंड अधिकारी कार्यालय के रीडर राजेश यादव, पूर्व पार्षद पंकज गुप्ता व जसवंत यादव, तथा समाजसेवी विनोद जांगिड़ भी उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने रामलीला को भारतीय संस्कृति की जीवंत धरोहर बताते हुए समिति के प्रयासों की सराहना की।

लीला का आरंभ विभीषण द्वारा रावण से माता सीता को सम्मानपूर्वक भगवान श्रीराम को लौटाने की विनती से हुआ। इसके बाद भगवान राम का समुद्र पर क्रोध, नल-नील जैसे वानरों द्वारा समुद्र पर सेतु निर्माण, और भगवान राम द्वारा अपने आराध्य भगवान शिव की रामेश्वरम के रूप में स्थापना का अद्भुत मंचन किया गया। भगवान राम ने घोषणा की कि जो भी भक्त इस पवित्र रामेश्वरम के दर्शन करेगा, उसे परमधाम की प्राप्ति होगी।
इसके उपरांत मंच पर अंगद-रावण संवाद की रोचक झलक पेश की गई। भगवान राम ने बाली पुत्र अंगद को दूत बनाकर रावण के दरबार भेजा। अंगद द्वारा रावण को समझाने का प्रयास, प्रहस्त का वध, और अंगद का अडिग आत्मविश्वास दर्शकों को अत्यंत रोमांचित कर गया।
मंचन में कलाकारों ने अपनी-अपनी भूमिकाओं को जीवंत किया। राम की भूमिका पीयूष शर्मा ने, लक्ष्मण की मोहित यादव ने,हनुमान की रामपाल यादव ने और अंगद की विशाल सोनी ने निभाई। दीपक सैन,मुकेश सोनी,मयंक शर्मा और राकेश तिवारी ने अन्य सहयोगी भूमिकाओं में अभिनय कर दर्शकों का मन मोह लिया। सुक-सारण की भूमिका में गुरु-शिष्य जोड़ी हरिओम गुप्ता व हरीश गोयल के अभिनय को दर्शकों ने खूब सराहा।
कला मंच समिति के सदस्यों ने बताया कि रामलीला मंचन का उद्देश्य केवल धार्मिक मनोरंजन नहीं है, बल्कि समाज में आदर्श,सत्य और धर्म की स्थापना का संदेश देना भी है। उपस्थित दर्शकों ने इस लीला को अब तक के सबसे आकर्षक और जीवंत मंचनों में से एक बताया।
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