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विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रह चुके कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रामेश्वर डूडी का निधन हो गया है। डूडी ने देर रात करीब एक बजे अंतिम सांस ली। उनका अंतिम संस्कार आज बीकानेर में उनके निवास के पास ही स्थित श्मशान घाट पर किया जाएगा। डूडी पिछले दो साल से कोमा म
दो साल से कोमा में थे डूडी
अगस्त 2023 में डूडी की जयपुर में अचानक तबीयत बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें तुरंत एसएमएस अस्पताल ले जाया गया। वहीं से बाद में मेदांता अस्पताल पहुंचाया गया। वे दिल्ली स्थित अपने आवास पर इलाज ले रहे थे। दो साल तक कोमा में रहने के बाद एक बार फिर उनकी तबीयत बिगड़ने लगी तो कुछ दिन पहले फिर से मेदांता अस्पताल ले जाया गया। जहां इलाज में ज्यादा सुधार नहीं होने के बाद उन्हें घर जाने के लिए बोल दिया गया।
सियाग ने बताया कि पहले उनकी तबीयत में सुधार हो रहा था, लेकिन दो दिन से तबीयत फिर बिगड़ गई थी।
एक बजे अंतिम संस्कार सियाग ने बताया कि आज सुबह से दोपहर एक बजे तक पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए उनके गजनेर रोड पर वैद्य मघाराम कॉलोनी स्थित आवास पर रखा जाएगा। जिसके बाद वहीं से अंतिम यात्रा शुरू होगी।
गांव से दिल्ली तक राजनीति में सक्रिय थे रामेश्वर लाल डूडी का जन्म 1 जुलाई 1963 को बीकानेर में हुआ। उन्होंने राजस्थान विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में कार्य किया। वे 1999 से 2004 तक बीकानेर से लोकसभा सांसद रहे, लेकिन 2004 में अभिनेता धर्मेंद्र देओल से हार गए। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य रहे।
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा उनके पिता जेठा राम डूडी और माता आशा देवी थीं। उन्होंने बीकानेर के बीजेएस रामपुरिया कॉलेज से बी.कॉम. किया। उनके पिता जेठाराम डूडी नोखा के पंचायत समिति के प्रधान रहे।
बीमार होने के कारण पत्नी बनी विधायक 1983 में डूडी ने सुशीला देवी से शादी की। डूडी दो साल पहले जब बीमार हुए तो उनके समर्थकों ने सुशीला डूडी को ही चुनाव लड़ने के लिए कहा। ज्यादा दबाव के चलते वो चुनाव लड़ी और जीत भी गई। बीकानेर जिले में कांग्रेस की एकमात्र विधानसभा सीट नोखा से सुशीला डूडी की है।
बड़े जाट नेता बने, मुख्यमंत्री के दावेदार थे, चुनाव हारे डूडी ने स्वयं को राजस्थान का बड़ा जाट नेता साबित किया था। इसी कारण वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में डूडी को मुख्यमंत्री का दावेदार भी माना गया। कांग्रेस की सरकार आई लेकिन खुद डूडी नोखा में भाजपा नेता बिहारीलाल बिश्नोई से चुनाव हार गए।
राजनीतिक करियर
- डूडी 1995 से राजनीतिक रूप से सक्रिय रहे। वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे और राजस्थान विधानसभा में विपक्ष के नेता भी रह चुके हैं ।
- 1995 में, डूडी ने पंचायती राज स्तर पर राजनीति शुरू की , वह 1995 से 1999 तक नोखा से प्रधान चुने गए।
- वह पूर्व संसद सदस्य भी हैं और 1999 से 2004 तक लोकसभा में बीकानेर का प्रतिनिधित्व किया।
- वह 1999 से 2000 तक लोकसभा में खाद्य, नागरिक आपूर्ति और सार्वजनिक वितरण समिति के सदस्य भी रहे।
- वह 2013 में नोखा निर्वाचन क्षेत्र से राजस्थान विधानसभा के सदस्य चुने गए।
- वह 2018 में भाजपा के बिहारीलाल बिश्नोई से नोखा निर्वाचन क्षेत्र से हार गए ।
मां के प्रति समर्पित रहे डूडी
रामेश्वर डूडी अपनी मां के निधन पर सबसे ज्यादा रोये। यहां वैध मघाराम कॉलोनी में उनके निवास पर ही मां रहती थी। जब भी बाहर से आते तो मां के पास घंटों बैठे रहते। इधर-उधर की बातें करते। हंसी-मजाक भी करते। रामेश्वर डूडी की मां का निधन हुआ तो वो सबसे ज्यादा रोये। उनके मित्र बताते हैं कि डूडी बच्चों की तरह बिलख पड़े थे।
बाइक पर घूमते थे
बीमार होने से पहले डूडी कई बार मोटर साइकिल पर ही बीकानेर के पुराने शहर में पहुंच जाते। वहां अपने मित्रों के साथ जमकर हथाई करते थे। खासकर आचार्यों के चौक में कई बार वो दोस्तों के साथ दिखते। वहीं पर देर रात तक गर्म दूध पीने का शौक था।
पेंट-शर्ट वाला जाट नेता
आमतौर पर जाट नेता कुर्ता और धोती पहनते हैं, कुछ जाट नेता कुर्ता पायजामा पहनते हैं लेकिन रामेश्वर डूी को “पेंट-शर्ट वाला जाट नेता” कहा जाता था। वो हमेशा फिट पेंट के साथ शर्ट पहनते थे। हमेशा शर्ट उनकी पेंट के अंदर तक करीने से लगी होती थी। पेंट पर बेल्ट और नीचे चमड़े के जूते पहनते थे। उनकी स्टाइलिश छवि से हर कोई प्रभावित था।
जब भीड़ में पहुंच गए डूडी
डूडी के सांसद काल में एक हत्या हुई। मृतक के परिवार ने पीबीएम अस्पताल में बनी मोर्चरी के आगे धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। पुलिस और आम जनता के बीच भारी तनाव की स्थिति थी। ऐसे में डूडी को धरना स्थल पर नहीं आने की सलाह दी गई। सांसद के वहां पहुंचते ही माहौल बिगड़ सकता था लेकिन इसके बाद भी डूडी वहां पहुंचे। आम लोगों को समझाया और इसके बाद चले गए। विवाद भी खत्म हुआ।
अभिनेता धर्मेंद्र को दी कड़ी टक्कर
बीकानेर में भाजपा के टिकट पर धर्मेंद्र मैदान में उतरे थे। दोनों के बीच कड़ी टक्कर मानी गई। रामेश्वर डूडी को पता था कि शहरी क्षेत्र के लोग धर्मेंद्र के आकर्षण में आ सकते हैँ लेकिन गांवों में उन्हें लोग पसन्द करते हैं। ऐसे में डूडी ने गांवों में ज्यादा मेहनत की। इसी का परिणाम रहा कि सभी ग्रामीण विधानसभा सीट से डूडी आगे रहे लेकिन शहर में उन्हें भारी अंतर से पीछे रहना पड़ा। धर्मेंद्र को अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए अपने बेटे सन्नी देओल को भी बीकानेर बुलाना पड़ा।
अपने कार्यकर्ता के लिए भिड़ जाते
डूडी अपने कार्यकर्ता के लिए किसी भी नेता और अधिकारी से भिड़ जाते थे। बीकानेर में बीकेईएसएल कंपनी के खिलाफ प्रदर्शन के बाद बीकानेर के कई कांग्रेस नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो गई। इन्हीं में एक आनन्द जोशी बताते हैं कि डूडी ने तत्कालीन गृह मंत्री के घर चलकर इस मामले में बात की और कहा कि जो कुछ हुआ वो पॉलिटिकल इवेंट था। हमारे युवा साथियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं बनती।
जब राहुल गांधी ने रोककर बात की
बीकानेर के करणी सिंह स्टेडियम में साल 2018 में चुनावी सभा थी। मंच के नीचे कई नेता खड़े थे। अशोक गहलोत और डोटासरा भी थे। वहीं पर डूडी भी पंक्ति में खड़े होकर उनका स्वागत कर रहे थे। स्वागत की औपचारिकता के बाद राहुल गांधी फिर से डूडी की तरफ पलटे और उन्हें दूर ले जाकर अलग से बातचीत की। संभवत: चुनाव के संबंध में उन्होंने जानकारी ले रहे थे।
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