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राजस्थान में 2023-24 तक प्रति व्यक्ति आय दो लाख तक भी नहीं पहुंची है। आय में बढ़ोतरी की सुस्त चाल और बढ़ती महंगाई का असर राजस्थानियों की थाली पर दिख रहा है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, साल 2023-24 में राजस्थान के ग्र
रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2022-23 में ग्रामीण परिवार अपने कुल घरेलू व्यय का 45.1% हिस्सा भोजन पर खर्च कर रहे थे, जो 2023-24 में 2.5% बढ़कर 47.6% हो गया। शहरों में यह आंकड़ा 40.4% से 1.4% घटकर 39% रह गया। इसकी वजह- शहरों में आय के साधन बेहतर हैं।
हालांकि, इस मामले में राजस्थान की स्थिति बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों से बेहतर है, लेकिन पंजाब और केरल जैसे राज्यों से काफी पीछे है। कैलोरी की जरूरत पूरी करने के लिए राजस्थानियों की अनाज पर निर्भरता अब भी 46.1% तक है। प्रदेश में अनाज पर खर्च ग्रामीण क्षेत्रों में 4.4% और शहरी क्षेत्रों में 4.% है, जाे राष्ट्रीय औसत से कम है।
अनाज पर सबसे ज्यादा खर्च झारखंड में, सबसे कम पंजाब में
- 41.4% कुल व्यय का खर्च है केरल के ग्रामीण परिवारों में भोजन पर।
- 57.5% अनाज से कुल कैलोरी ओडिशा के ग्रामीण क्षेत्रों में, जाे सबसे ज्यादा, छत्तीसगढ़ में 56.0 फीसदी।
- 55.1% के साथ झारखंड दूसरे व तीसरे स्थान पर। बिहार और पश्चिम बंगाल में 50 फीसदी से ज्यादा कैलोरी अनाज से प्राप्त होती है।
- 7.9% कुल व्यय का अनाज पर खर्च झारखंड में सबसे ज्यादा। ओडिशा 7.5% के साथ दूसरे स्थान पर। इन राज्यों में पेट भरने काे अनाज सबसे सस्ता विकल्प।
- 54.1% है बिहार में कुल घरेलू व्यय का और पश्चिम बंगाल में 53.5% भोजन पर खर्च।
भास्कर एक्सपर्ट- कम्यूनिटी हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. गौरव लाटा
आय कम होती है तो घरेलू खर्च का ज्यादा हिस्सा पेट भरने पर ही जाता है, ये गरीबी है
पारिवारिक व्यय का बड़ा हिस्सा भोजन पर खर्च होने के दो प्रमुख कारण है। पहला, प्रति व्यक्ति आय का कम होना और दूसरा, बढ़ती महंगाई। जब आय सीमित हो और खाने-पीने की चीजें महंगी हो जाए तो परिवारों के लिए बुनियादी खाद्य पदार्थों पर खर्च आय की तुलना में अधिक ही होता है। यह गरीबी का संकेत है। ग्रामीण राजस्थान आर्थिक दबाव का सामना कर रहा है। जहां बढ़ती महंगाई के कारण लोगों की थाली में अनाज जरूरी है, कैलोरी की सोच नहीं सकता।
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