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राजस्थान राज्य ओबीसी राजनीतिक प्रतिनिधित्व आयोग का कार्यकाल पूरा हाे चुका है। आयोग की जिम्मेदारी पंचायत व निकाय चुनावों में सीटवार ओबीसी आरक्षण तय करने की थी। इसी की रिपोर्ट पर प्रदेश में पहली बार पंचायत और निकाय चुनाव कराए जाने हैं। ऐसे में समय पर र

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आयोग में रिटायर्ड जज मदनलाल अध्यक्ष, मोहन मोरवाल, प्रो. राजीव सक्सेना, एडवोकेट गोपाल कृष्ण और पवन मंडाविया सदस्य हैं। आयोग का गठन मई में किया गया था। ऑफिस के सेटअप और कामकाज की शुरुआत में जून निकल गया। ऐसे में आयोग अगस्त के दूसरे सप्ताह तक भी रिपोर्ट तैयार नहीं कर पाया।

सुप्रीम काेर्ट के निर्देश के चलते ये पहली बार सुप्रीम काेर्ट ने सरकारों काे निर्देश दे रखे हैं कि पंचायत-निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए ओबीसी राजनीतिक प्रतिनिधित्व आयोग का गठन करना होगा। उसी की रिपोर्ट पर चुनाव हाेंगे। ओबीसी का 21% आरक्षण देने का नियम सभी जगह लागू नहीं हाेगा।

“ओबीसी आरक्षण के निर्धारण का प्रोसेस चल रहा है। सर्वे कराया जा रहा है। इसमें समय लगेगा।” -मदनलाल, आयोग के अध्यक्ष



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