आज बात खरी है में पढ़िए राजस्थान विधानसभा में क्यों भड़के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली। ललकारने लगे- हिम्मत है तो सामने बोलो। हो-हल्ला के बीच एक बार फिर सदन से वॉक आउट हुआ। राजस्थान की राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की खरी-खरी सुनिए…
1. विधानसभा सत्र या बिग बॉस का टेलीकास्ट
माननीयों का सदन चल रहा है। उधर, टीवी पर बिग-बॉस का टेलीकास्ट। चैनल बदलते-बदलते मानसून सेशन लाइव आया तो सोचा बिग-बॉस चल रहा है। चिल्ला-चिल्ला कर जो बखेड़ा किया जा रहा था। एक-दूसरे को ‘हिम्मत है तो’ कहकर संबोधित किया जा रहा था। स्पीकर महोदय ‘बैठ जाओ’, ‘चुप रहो’, ‘शांत हो जाओ’, ‘ये नहीं चलेगा’ जैसे शब्दों से सभा को काबू करने की कोशिश करते रहे।
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के ‘हिम्मत है तो’ का असर सबसे ज्यादा वन मंत्री संजय शर्मा पर हुआ। उनके भीतर छुपी हिम्मत ने जोर मारा। बाहें चढ़ाकर वे नेता प्रतिपक्ष की ओर कूच करने लगे। संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल और सामाजिक न्याय अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत ने वन मंत्री को रोक लिया। सब्र का बांध टूटने ही जा रहा था कि स्पीकर महोदय ने कहा- सदन की कार्यवाही स्थगित की जाती है।

2. नेताजी ने पुलिसकर्मी को मंच से उतारा, मेडिकल कराने की धमकी
बोतल निशान वाली पार्टी के नेताजी के जलवे ही अलग हैं। छाए रहते हैं। विधानसभा में भले एक सीट नहीं जीती हो, लेकिन टशन ऐसा कि किसी को कुछ नहीं समझते। चूरू के बीदासर में नेताजी मंच पर थे। सत्ता और विपक्ष वाली पार्टियों को खूब कोस रहे थे। तुर्रेदार फेंटा कसा हुआ था। फेंटे के साथ शब्दों में कसावट थी। जनता को मजे आ रहे थे।
बात ही बात में बात आ गई व्यवस्था की। नेताजी भाषण के दौरान ही व्यवस्था में पोल ढूंढने लगे। लेकिन टैंट के पोल के अलावा कुछ नहीं दिखा। पीछे नजर घुमाई तो मंच पर पुलिसकर्मी दिख गए। ‘पुलिस भी तो व्यवस्था का ही हिस्सा है’, ऐसा आकलन करते हुए नेताजी ने पुलिस को हड़काना शुरू किया- ऐ, नीचे उतरो, मंच से नीचे उतरो। नशा करके आते हो। अभी पटककर मेडिकल करा दूंगा। एसपी आईजी को मौके पर आना पड़ जाएगा। इन्हीं शब्दों के साथ नेताजी ने व्यवस्था सुधारने के लिए ‘बोतल’ पर मुहर लगाने की मनुहार कर डाली।

3. जल झूलनी एकादशी पर जल में झूलता शहर
नेताजी की हेकड़ी की तरह बारिश भी शांत नहीं हो रही है। इतना पानी गिरा है कि कृत्रिम बारिश वाले ड्रोन में शैवाल जम गई है। वैसे भी राजस्थान वालों को सावन से ज्यादा भादो में भीगने की आदत है। जल-झूलनी के दिन राजधानी पर भगवान कुछ ज्यादा ही मेहरबान हुए। झूलते हुए जल काले हनुमानजी की देहरी पर मत्था टेकने पहुंच गया।
सुभाष चौक पर गाड़ियां नौकायन करते हुए निकलीं। जिनकी मोटरें फेल हो गईं, उन्हें धकेलकर पाले से बाहर किया गया। घरों में पानी, पानी में घर। सड़कों पर पानी, पानी में सड़क। आसमान छतों की परीक्षा ले रहा है। झर-झर ने जर्जर कर दिया है। इधर, एमडी रोड पर फूड डिलीवरी बॉय कमर तक पानी में मोटर साइकिल घुसाकर ‘भूखे पेट’ का एड्रेस ढूंढ रहा था। ऐसे मेहनती कन्हैयाओं के पैर छूकर जमनाजी बैठ जाती हैं।

4. चलते-चलते..
मंत्री महोदय ‘स्मार्ट मीटर’ की चिंता में नेता प्रतिपक्ष से दुश्मनी मोल ले बैठे। सदन ने खूब टीआरपी बटोर ली। एक वीडियो एक्स पर घूम रहा है। मंत्री महोदय (जोगाराम पटेल) के विधानसभा क्षेत्र लूणी का है। कीचड़ और गाद से भरा कच्चा रास्ता। यत्र-तत्र बारिश के ठहरे पानी ने भी कब्जा किया हुआ है। रास्ता अमुक गांव से अमुक सरकारी स्कूल तक जाता है। इस कीचड़ में पक्का जूते-चप्पलों का सत्यानाश हो जाएगा। बच्चे झुककर चप्पलों को हाथ में ले लेते हैं। बस, यहीं से भारतीय आक्रोश को एक हथियार मिल जाने की शुरुआत होती रही है।
इसी बीच पोस्ट डालने वाला शख्स माननीय मंत्री से लगभग रिरियाते हुए रिक्वेस्ट करता है- सर, और कुछ न सही, कांकरी ही डलवा दो।

वीडियो देखने के लिए ऊपर फोटो पर क्लिक करें। कल फिर मुलाकात होगी…
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