पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने उभरते युवा नेता को लंबी रेस का घोड़ा कह दिया। जबकि नेताजी खुद को जंगल में जगह तलाशता जवान शेर बता चुके हैं। स्मार्ट मीटर के विरोध में अजमेर में एक युवक जेईएन साहब की गाड़ी के आगे लेट गया। श्रीगंगानगर में खजूर की डालियों से धर्म परिवर्तन का खेल चल रहा था। राजस्थान की राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के एपिसोड में…
1. स्मार्ट मीटर के खिलाफ जेईएन साहब की गाड़ी के आगे लेटा
बिजली का स्मार्ट मीटर बिना लगे ही झटके दे रहा है। कुछ तो लोगों में यूनिट वाली चकरी तेज चलने का भ्रम। कुछ काम विरोधी पार्टियों के नेताओं का। सभाएं कर-कर के बात फैला दी कि ये लूट का नया तरीका है।
बात लोगों के दिमाग में फिट बैठ गई। लिहाजा जगह-जगह स्मार्ट मीटर को लेकर आंदोलन सा हो गया। झुंझुनूं में तो बाजार ही बंद कर दिए।
अजमेर के रूपनगढ़ में काठोदा गांव में जेईएन साहब गाड़ी लेकर पहुंचे। एक मकान पर स्मार्ट मीटर लगा दिया। मकान के मालिक को पता चला तो बिफर गया।
जेईएन साहब की गाड़ी के आगे लेट गया। बोला- मरना मंजूर है। स्मार्ट मीटर नहीं लगवाऊंगा। मेरा पुराना मीटर लौटा दो।
हनुमानगढ़ में तो बाकायदा सभा हो गई। एक जनाब नेताजी की तरह खड़े होकर संबोधित कर रहे थे। कहा- इधर रीचार्ज खत्म, उधर बत्ती गुल।

अजमेर में रूपनगढ़ के काठोदा गांव में जेईएन की गाड़ी के आगे लेटा ग्रामीण। बोला-मर जाऊंगा लेकिन स्मार्ट मीटर नहीं लगवाऊंगा
2. राजनीति में बकरी, घोड़ा, शेर और बैल…
राजस्थान की राजनीति में नए नेताजी का पदार्पण हुआ है। इन दिनों लाइम लाइट में हैं। थप्पड़ मारकर चमके थे। फिर अनशन करके चमके। कुछ न कुछ धमा-चौकड़ी चलती रहती है।
जयपुर में झालावाड़ हादसे के खिलाफ बकरियों को धरना स्थल पर ले आए थे। इस तरह राजनीति में उन्होंने बकरियों के महत्व पर प्रकाश डाला।
इसी धरने पर अपने इलाके के सीनियर नेताजी को उन्होंने बूढ़ा शेर करार दिया था। खुद को जवान शेर करार देते हुए कहा-जंगल में जवान शेर जगह तलाश रहा है, लेकिन बूढ़ा शेर जगह छोड़ने को तैयार ही नहीं।
आगे उन्होंने सीनियर नेताजी की तुलना बिगड़े हुए बैल से कर दी। बोले- नया बछड़ा इलाके में आते ही बैल क्या करता है, सींग मारकर उसे भगा देता है।
हाल ही पूर्व मुखियाजी टोंक पहुंचे। वहां उभरते नेताजी को लेकर सवाल पूछा गया। पूर्व सीएम साहब ने कहा- वे लंबी रेस के घोड़े हैं। लेकिन गुस्सा थोड़ा कम करना चाहिए।

टोंक में पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने युवा नेता नरेश मीणा को लंबी रेस का घोड़ा कहा। साथ ही कुछ सुझाव भी दिए।
3. खजूर की डालियों के टोटके से बरसेगी बरकत?
फेस्टिवल सीजन चल रहा है। कंपनियां अपने-अपने प्रोडक्ट को लेकर कई तरह की स्कीमें दे रही हैं। श्रीगंगानगर में ऐसी ही स्कीम से पिता-पुत्र धर्म परिवर्तन करा रहे थे।
दावा है कि खजूर की डालियां हाथों में थमाकर बरकत बरसने का टोटका किया गया। बीमारी को छू-मंतर करने की कसमें खाई गई। टोटकों का कालीन बिछाकर ईसाई धर्म में स्वागत किया जा रहा था।
आरोप लगा कि बीमारी ठीक करने के बहाने पास्टर (पादरी) साहब यह बिजनेस चलाए हुए थे। शिकायत हो गई तो फरार। बेटे को पुलिस ने दबोच लिया।
धर्म बदलने वाले भी क्या ही करें? बीमारी अगर खजूर की डाल से निकल रही है तो अच्छा है। कफ सिरप से तो बेहतर है। बड़े अस्पतालों के आईसीयू से बेहतर है। लेकिन धंधा जमने से पहले ही दुकान उजाड़ दी।
उधर, धर्म परिवर्तन की बात RSS तक बात पहुंची तो मंच से उठाई गई। प्रचारक साहब ने जोर देकर कहा- इस ‘रोग’ का जितनी जल्दी इलाज हो उतना बेहतर। सवाल वही- इलाज कहां कराएं?

श्रीगंगानगर में खजूर की डालियों से इलाज का दावा करते पास्टर। धर्म परिवर्तन की शिकायत पर पिता और पुत्र पर केस दर्ज हो गया।
4. चलते-चलते…
सच कहने और सुनने के लिए हिम्मत की जरूरत है। सच कहने वाला कोई भी हो, लेकिन सुनने वाला अगर पुलिस में CI है, तो जरा आगा-पीछा सोच लेना चाहिए।
बात है हनुमानगढ़ की। यहां एक बछड़ा मर गया। खास संगठन के लोगों ने दावा किया कि फलां व्यक्ति ने पीट-पीट कर बछड़े को मार दिया। बछड़ा घसीटकर थाने के बाहर डाल दिया गया।
चार लोग धरने पर बैठ गए। सीआई साहब और अन्य पुलिसकर्मी इर्द-गिर्द जमा हो गए। धरने पर बैठा संगठन का नेता फुल जोश में।
वे लोग चाहते थे कि बिना शिकायत दर्ज किए ही पुलिस सीधे जाकर आरोपी को कूटती हुई थाने ले आए। उससे कबूल कराए कि उससे बड़ा अपराध हो गया। वह सूली पर लटकने को तैयार है।
पुलिस प्रोसेस समझा रही थी- देखा, हम मामला दर्ज करने के लिए तैयार हैं। उसके बाद ही तो पोस्टमॉर्टम होगा। तभी तो पता चलेगा कि मौत कैसे हुई।
नेता ने पिछला केस याद दिलाया- अच्छा? फिर मक्कासर थाने वाले मामले में अभी तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? सीआई साहब का पारा चढ़ा- तेरे कहने से मक्कासर वाले को उठा लूंगा?
नेता को ‘तेरे’ पर ऐतराज। वह ‘आप’ की उम्मीद कर रहा था। पूछ बैठा- ‘तेरे’ क्या होता है? बस। यहीं कढ़ी बिगड़ गई। सीआई साहब फट पड़े।

हनुमानगढ़ में सीआई लक्ष्मण सिंह राठौड़ धरना दे रहे कुलदीप नरूका व अन्य को उठाकर थाने के अंदर ले गए।
वीडियो देखने के लिए ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल मुलाकात होगी…
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