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पुलिस वेरिफिकेशन में इतना टाइम क्यों लगता है? मेरे गांव से पासपोर्ट ऑफिस की दूरी बहुत ज्यादा है, मोबाइल वैन का फायदा कैसे उठा सकता हूं? ई-पासपोर्ट क्या है?

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पासपोर्ट को लेकर लोगों में कई भ्रम और सवाल होते हैं। ऐसे ही कई सवालों को लेकर भास्कर ने जयपुर क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी विपुल देव से बातचीत की। विपुल देव ने पासपोर्ट आवेदन प्रक्रिया, फर्जीवाड़े, दलालों की भूमिका और आपराधिक मामलों में विभाग की सतर्कता पर भी बात की।

पढ़िए पूरा इंटरव्यू…

तस्वीर कुछ समय पहले की है, जब क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी विपुल देव ने सीकर पासपोर्ट सेवा केंद्र का दौरा किया था।

तस्वीर कुछ समय पहले की है, जब क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी विपुल देव ने सीकर पासपोर्ट सेवा केंद्र का दौरा किया था।

भास्कर : जयपुर पासपोर्ट ऑफिस में रोज औसतन कितने आवेदन आते हैं? विपुल देव : हमारे पास तीन अलग-अलग लेयर में ऑफिस हैं। एक आरपीओ ऑफिस, जो हमारा बैक ऑफिस है। तीन पासपोर्ट सेवा केंद्र जयपुर, सीकर और जाेधपुर में हैं। इसके अलावा 16 पोस्ट ऑफिस पासपोर्ट सेवा केंद्र भी हैं। इन सबको मिलाकर औसतन दो से ढाई हजार आवेदन आते हैं।

भास्कर : पुलिस वेरिफिकेशन बड़ा मुद्दा है। क्या इसे आसान बनाने की दिशा में सोचा जा रहा है? विपुल देव : राजस्थान में पुलिस वेरिफिकेशन का सिस्टम काफी अच्छा और तेज है। सारा सिस्टम इलेक्ट्रॉनिक हो चुका है। जैसे ही आवेदक पासपोर्ट सेवा केंद्र में जाकर अपना फॉर्म सबमिट करता है, वहां से वेरिफिकेशन रिक्वेस्ट ऑटोमेटिकली पुलिस के पास चली जाती है। वहां से रिपोर्ट तैयार होकर हमें वापस मिलती है और रिपोर्ट मिलते ही पासपोर्ट प्रिंट होकर आवेदक को डिस्पैच हो जाता है।

भास्कर : ई-पासपोर्ट को लेकर राजस्थान में क्या अपडेट है? विपुल देव : 17 फरवरी 2025 से ही राजस्थान में ई-पासपोर्ट लॉन्च हुआ है। अब तक हम लोग करीब 2 लाख या उससे थोड़ा ज्यादा ई-पासपोर्ट जारी कर चुके हैं। ई-पासपोर्ट में कुछ अतिरिक्त सुरक्षा फीचर्स हैं, जो आवेदकों और सिस्टम दोनों के लिए बेहद उपयोगी हैं।

भास्कर : जोधपुर, पाली और सीकर में पासपोर्ट को लेकर लोगों का रुझान कैसा है? विपुल देव : सीकर और जोधपुर दोनों में अच्छी डिमांड है। जोधपुर में ज्यादा डिमांड को देखते हुए हमने वहां डेली अपॉइंटमेंट की संख्या 290 से बढ़ाकर 400 कर दी है।

भास्कर : शेखावाटी की बात करें तो वहां फर्जी पासपोर्ट और कबूतरबाजी के कई मामले सामने आते रहते हैं। इसको लेकर क्या कार्रवाई होती है? विपुल देव : जब भी ऐसा केस सामने आता हैं तो वह लॉ-एनफोर्समेंट एजेंसी के दायरे में आता है। वो हमें उस एप्लीकेंट की डिटेल के साथ में लिखते हैं। अगर कोई एफआईआर दर्ज होती है या कोई लिखित मामला हमारे पास आता है तो उस पर आवश्यक कार्रवाई की जाती है। इसमें पासपोर्ट जब्त या अन्य कानूनी कदम उठाए जाते हैं।

भास्कर : दलालों की भूमिका को रोकने के लिए क्या सख्ती की जा रही है? विपुल देव : मैं आपके प्लेटफॉर्म के माध्यम से यह कहना चाहूंगा कि पासपोर्ट ऑफिस के किसी भी तरह के ऑथोराइज्ड एजेंट्स नहीं होते। किसी भी दलाल के चंगुल में न फंसें। अगर इस तरह का कोई मामला आपके सामने आता है तो या तो पुलिस को सूचित करें या हमें जानकारी दें।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के साथ क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी जयपुर विपुल देव।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के साथ क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी जयपुर विपुल देव।

भास्कर : फर्जी पासपोर्ट या डुप्लीकेट पासपोर्ट रोकने में ई-पासपोर्ट कितना कारगर रहेगा? विपुल देव : पासपोर्ट बुकलेट के स्तर पर अगर कोई फर्जीवाड़ा किया जाता है तो ई-पासपोर्ट से उसे रोकना आसान है। इसमें अतिरिक्त लेयर ऑफ सिक्योरिटी है, जो फर्जी पासपोर्ट बनाने वालों को पकड़ सकती है। हालांकि सुरक्षा कारणों से मैं इसके बारे में और अधिक जानकारी साझा नहीं कर सकता।

भास्कर : आपराधिक प्रवृत्ति के लोग अक्सर देश छोड़कर भागने की कोशिश करते हैं। चाहे पेपर लीक से जुड़ा सुरेश ढाका हो या लॉरेंस गैंग के गुर्गें…इन्हें रोकने में पासपाेर्ट विभाग की क्या भूमिका रहती है? विपुल देव : जैसे ही पुलिस के पास किसी आरोपी की जानकारी आती है, वे हमें सूचित करते हैं। यह केवल बड़े अपराधियों या भर्ती परीक्षा जैसे मामलों तक सीमित नहीं है। किसी भी आरोपी के खिलाफ अगर एफआईआर है तो पुलिस हमें जानकारी देती है। हम उसके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करते हैं।

भास्कर : आमजन को पासपोर्ट वैन का कैसे फायदा मिल रहा है? विपुल देव : पासपोर्ट वैन फरवरी 2024 से शुरू हुई थी। इसमें एक दिन में 40 अपॉइंटमेंट होते हैं। हम इस वैन को अपने जूरिडिक्शन में अलग-अलग जगहों पर भेजते रहते हैं। जैसे शैक्षणिक संस्थान, जिला मुख्यालय या तहसील मुख्यालय जहां इसकी डिमांड होती है। लेटेस्ट हमने इस वैन को साउथ वेस्ट कमांड हेडक्वार्टर भेजा था, जहां इसे बहुत अच्छा रिस्पॉन्स मिला। अब हम इसे श्रीगंगानगर भेजने की तैयारी कर रहे हैं।

भास्कर : आमजन को फायदा पहुंचाने के लिए क्या विशेष कदम उठाए जा रहे हैं? विपुल देव : सबसे बड़ी चीज तो पासपोर्ट वैन है, जिसे हमने हाल ही में शुरू किया है। हमारी कोशिश है कि इसे अधिक से अधिक इलाकों में भेजा जाए। अगर किसी संस्थान, ऑफिस, जिला या तहसील में पासपोर्ट की डिमांड है तो वे हमें लिख सकते हैं। कुछ बेसिक रिक्वायरमेंट्स हम आपसे शेयर कर देंगे, उसी हिसाब से हम वैन भेजने का प्रयास करेंगे। इसके अलावा ई-पासपोर्ट की सुविधा है। हमने हाल ही में कई जगहों पर पासपोर्ट एप्लीकेशन के स्लॉट भी बढ़ाए हैं। जैसे- चूरू, नागौर, झुंझुनूं, अलवर और अजमेर में रोज 10-10 स्लॉट बढ़ाए गए हैं। जोधपुर में स्लॉट 295 से बढ़ाकर 400 कर दिए हैं। आगे और भी सेंटर पर अपॉइंटमेंट बढ़ाए जाएंगे।

भास्कर : अगर कोई चाहे कि पासपोर्ट वैन उसके यहां आए तो वह कहां संपर्क कर सकता है? विपुल देव : संस्थान हमें rpo.jaipur@mea.gov.in पर ईमेल लिख सकता है। ऑफिशियल रिक्वेस्ट आने के बाद हम उस पर विचार करेंगे और हेडक्वार्टर से जरूरी अनुमति लेकर वैन भेजने का निर्णय लेंगे।

मोबाइल वैन जिलों, कॉलेजों और तहसीलों में जाकर लोगों से पासपोर्ट आवेदन स्वीकार करती है और वहीं जरूरी प्रक्रिया पूरी करती है।

मोबाइल वैन जिलों, कॉलेजों और तहसीलों में जाकर लोगों से पासपोर्ट आवेदन स्वीकार करती है और वहीं जरूरी प्रक्रिया पूरी करती है।

भास्कर : क्या इसके लिए कोई विशेष क्राइटेरिया भी है? विपुल देव : वैन के लिए 40 अपॉइंटमेंट जरूरी होते हैं। हम कोशिश करते हैं कि वर्किंग डे में ही वैन भेजी जाए। बेसिक आवश्यकता यह रहती है कि आप इतने अपॉइंटमेंट सुनिश्चित करा सकें। इसके अलावा वैन के लिए पार्किंग स्पेस और बैठने की बेसिक सुविधा आपको उपलब्ध करानी होती है।

भास्कर : एनआरआई, स्टूडेंट्स या फिर महिलाओं के लिए कोई विशेष योजना है? विपुल देव : पासपोर्ट आवेदन प्रक्रिया सभी के लिए समान है। जैसे ही आप अपॉइंटमेंट लेते हैं, आपको डेट और टाइम दोनों दे दिए जाते हैं। उदाहरण के लिए, अगर आपका अपॉइंटमेंट 30 तारीख को है तो आपको यह भी बताया जाएगा कि 2:00 बजे, 3:00 बजे या 3:15 बजे कब पहुंचना है। मेरी सभी से अपील है कि दिए गए समय पर पहुंचे ताकि ज्यादा इंतजार न करना पड़े। वहां लाइन का कोई सिस्टम नहीं होता। पूरा प्रोसेस बहुत सिस्टमैटिक है। अंदर जाते ही टोकन मिलता है और फिर काउंटर ए, बी और सी से होकर सारी प्रक्रिया पूरी होती है। अगर कोई बुजुर्ग, महिला या छोटा बच्चा है तो उनके लिए विशेष सुविधा दी जाती है।



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