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एक आइडिया कैसे जिंदगी बदल सकता है इसका सबसे बेहतर उदाहरण है सवाई माधोपुर के 41 साल के एक किसान का। इस किसान ने पहले MBA किया। इसके बाद लाखों का पैकेज छोड़ अपने पिता के सपने को पूरा किया।

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किराए पर जमीन लेकर 4 गायों के साथ डेयरी शुरू की। अब न केवल उनकी खुद की डेयरी है, बल्कि वे 7 से 8 लोगों को रोजगार दे रहे हैं।

सेल्स मैनेजर की नौकरी छोड़ ये रिस्क ​लिया और आज कमाई पैकेज से दोगुना है। म्हारे देस री खेती में इस बार कहानी है अनिकेत की।

डेयरी के साथ वे बतखों और घोड़ों का ब्रीडिंग सेंटर भी चलाते है। गाय और भैंसाें के गोबर से खाद बनाकर उसे भी बेच रहे हैं।

ये अनिकेत हैं। जिन्होंने नौकरी और पुश्तैनी बिजनेस छोड़ डेयरी की शुरुआत की।

ये अनिकेत हैं। जिन्होंने नौकरी और पुश्तैनी बिजनेस छोड़ डेयरी की शुरुआत की।

अजमेर के सरकारी कॉलेज से किया एमबीए

अनिकेत ने 2008 में अजमेर के सरकारी कॉलेज से फाइनेंस और मार्केटिंग में एमबीए किया। एमबीए की पढ़ाई होते ही एक प्राइवेट इंश्योरेंस कंपनी में सेल्स मैनेजर की नौकरी पर लगे।

कोटा और सवाई माधोपुर में उनकी जॉब लोकेशन रही। सालाना पैकेज भी 25 लाख रुपए थे। अनिकेत ने चार साल की जॉब की और इसके बाद वे खेती में आए।

चार गायों के साथ डेयरी की शुरुआत की थी। आज शहर के 100 घरों में दूध सप्लाई करते है।

चार गायों के साथ डेयरी की शुरुआत की थी। आज शहर के 100 घरों में दूध सप्लाई करते है।

2012 में पिता की मौत के बाद आया टर्निंग पॉइंट

अनिकेत ने बताया कि साल 2012 में उनके पिता की मौत हो गई। अनिकेत के पिता शहर में सूरज सिनेमा चलाते थे। ये उनका पुश्तैनी काम था। पिता की मौत के बाद अनिकेत ने सिनेमा के बिजनेस को संभाला।

साल 2015 में उन्हें लगने लगा कि सिनेमा से इतनी कमाई नहीं हो रही है। पिता जी का एक सपना था कि वे डेयरी की शुरुआत करे लेकिन वह अधूरा रह गया। इसी सपने को पूरा करने के लिए अनिकेत ने डेयरी की शुरुआत की।

किराए पर जमीन ली, दो गायों के साथ की शुरुआत

अनिकेत ने बताया कि डेयरी की शुरुआत के लिए जमीन नहीं थी। ऐसे में पुराने शहर में ट्रक यूनियन के पास एक जमीन किराए पर ली। इसका किराया सवा लाख रुपए महीने था।

दो गायों के साथ डेयरी की शुरुआत की। ये मारवाड़ी नस्ल की गाय थी, जो 16 लीटर दूध देती थी। शुरुआत में आस-पड़ोस में ही इन गायों का दूध सप्लाई होता था। लोगों का रिस्पॉन्स मिला और डिमांड बढ़ी तो दो और गाय के साथ भैंस खरीदी।

अनिकेत के पास मुर्रा नस्ल की भैंसे है। इनका दूध 80 रुपए प्रति लीटर के हिसाब से मार्केट में बिकता है।

अनिकेत के पास मुर्रा नस्ल की भैंसे है। इनका दूध 80 रुपए प्रति लीटर के हिसाब से मार्केट में बिकता है।

2021 में खुद की जमीन खरीदी, आज 100 घरों में सप्लाई होता है दूध

अनिकेत ने बताया कि धीरे-धीरे डेयरी को लेकर लोगों का अच्छा फीडबैक आने लगा। लोगों को दूध की क्वालिटी अच्छी लगी तो डिमांड भी बढ़ने लगी।

आखिर 2021 में बड़ा राजबाग खेल मैदान के पास खुद की 4 बीघा जमीन खरीदी और भवानी ऑर्गेनिक डेयरी के नाम से इसकी शुरुआत की। इसमें दो बीघा में डेयरी यूनिट की शुरुआत की।

आज अनिकेत के इस फॉर्म हाउस में 25 गाय है। इनमें गिर, राठी, साहीवाल, हालिस्टन नस्ल की गाय शामिल है। जबकि मुर्रा नस्त की 10 भैंस भी डेयरी में है। उन्होंने बताया कि रोजाना 150 लीटर दूध का उत्पादन होता है।

शहर के करीब 100 घरों में दूध सप्लाई होता है। इसकी वे होम डिलीवरी करते है। गाय का दूध 70 हजार रुपए प्रति लीटर और भैंस का दूध 80 रुपए प्रति लीटर की रेट से बेच रहे है।

कार्टून देख शुरू की बतखों की ब्रीडिंग, आज पैकेज से दोगुना कमाई

अनिकेत के डेयरी के ​दूध की क्वालिटी की वजह से उनका ये बिजनेस धीरे-धीरे बढ़ने लगा। हाल ही में उन्होंने बतखों के साथ घोड़ों की ब्री​डिंग और वर्मी कम्पोस्ट खाद की भी शुरुआत की।

अनिकेत ने बताया- बतखों की ब्रीडिंग की शुरुआत भी एक अजीब तरीके से हुई। बच्चे टीवी पर डोनाल्ड डक कार्टून देख रहे थे। इस पर बच्चों ने फॉर्म हाउस पर बतख लाने की जिद की। इस पर जयपुर से 16 हजार में दो बतख के जोड़े लेकर आया।

ये फॉर्म हाउस में लगी वर्मीकंपोस्ट की यूनिट है। अनिकेत का दावा है कि जिले में ये सबसे बड़ी यूनिट है।

ये फॉर्म हाउस में लगी वर्मीकंपोस्ट की यूनिट है। अनिकेत का दावा है कि जिले में ये सबसे बड़ी यूनिट है।

पहली बार में इस जोड़े ने 8 बच्चे दिए। इनका वॉट्सऐप स्टेट लगाया तो ​लोग खरीदने पहुंच गए। उन्होंने बताया कि शहर के पांच सितारा होटलों में वे बतखों को सप्लाई करते है। एक जोड़ा बतख 10 रुपए में बेच रहे हैं। इतना ही नहीं मारवाड़ी नस्ल के चार घोड़े भी है, जिनकी ब्रीडिंग करवाई जाती है।

इसके साथ ही डेयरी और ब्रीडिंग सेंट के साथ उन्होंने वर्मी कम्पोस्ट की यूनिट भी शुरू की। उनका दवा है कि ये जिले की सबसे बड़ी यूनिट है, जहां गाय और भैंस के गोबर से साल में 400 टन खाद बनाई जा रही है। इसे वे 10 रुपए प्रतिकिलो की दर से बेच रहे है।

ये खबर भी पढ़ें… बिजनेस छोड़ खेती शुरू की, अब 20 लाख की इनकम:200 साल तक फ्रूट देने वाला पेड़ लगाया; चने की पत्तियां, नींबू-मौसमी से भी मोटी कमाई

दौसा के एक किसान ने 24 साल पहले अपना बिजनेस बंद किया था तो उन्हें अंदाजा नहीं था कि वो इस फील्ड में सफल होंगे। सक्सेस के लिए उन्होंने खेती के आधुनिक तरीकों के साथ परंपरागत सिस्टम से भी काफी कुछ सीखना शुरू किया। (यहां पढ़ें पूरी खबर)



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