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पूर्व मंत्री महेश जोशी की जमानत याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। वे जेल में ही रहेंगे। जस्टिस प्रवीर भटनागर की अदालत ने फैसला सुनाया है। इससे पहले दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद 8 अगस्त को फैसला सुरक्षित रखा गया था, जिस पर आज फैसला सुनाय

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बता दें कि जल जीवन मिशन घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग केस में ईडी ने महेश जोशी को 24 अप्रेल को गिरफ्तार किया था। उसके बाद से ही वे जेल में है। ईडी मामलों की विशेष कोर्ट से जमानत खारिज होने के बाद उन्होंने हाईकोर्ट में बेल एप्लिकेशन लगाई थी।

महेश जोशी ने कहा था- मूल केस में नाम नहीं महेश जोशी की ओर से बहस करते हुए वरिष्ठ वकील विवेकराज बाजवा ने कहा था- याचिकाकर्ता को प्रकरण में फंसाया गया है। प्रकरण को लेकर एसीबी में दर्ज मूल केस में याचिकाकर्ता का नाम नहीं है। याचिकाकर्ता को एक साल पहले नोटिस दिया गया। इसके बाद बिना कोई परिस्थिति बदले उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

ईडी के पास पैसों के लेन-देन का सबूत नहीं वकील ने कहा- ईडी याचिकाकर्ता पर 2.01 करोड़ रुपए का आरोप लगा रही है। इसे लेकर ईडी के पास कोई साक्ष्य नहीं हैं और परिवादी यह राशि कहां से लाया, उसका भी उल्लेख नहीं है। इसके अलावा ईडी ने अपनी रिपोर्ट में बेटे की फर्म में 50 लाख रुपए का लेन-देन बता रही है जबकि यह राशि महेश जोशी के बेटे की कंपनी ने लोन के तौर पर ली थी और उसे लौटाया भी जा चुका है।

ईडी का तर्क- जोशी ने टेंडर प्रक्रिया में रिश्वत ली जमानत का विरोध करते हुए ईडी की ओर से वकील अक्षय भारद्वाज ने कहा था- प्रकरण में एसीबी की ओर से दर्ज अन्य एफआईआर में याचिकाकर्ता की भूमिका को बताया गया है। वहीं याचिकाकर्ता के बेटे की फर्म में 50 लाख रुपए का लेन-देन किया गया है। याचिकाकर्ता की ओर से इस राशि को लौटाना भी बताया जा रहा है तो राशि लौटाने से अपराध की गंभीरता कम नहीं होती है।

याचिकाकर्ता ने विभाग की टेंडर प्रक्रिया में रिश्वत प्राप्त की है। इसके अलावा धन शोधन निवारण अधिनियम की धारा 45 के तहत आरोपी को उस समय ही जमानत दी जा सकती है, जब कोर्ट इस बात से प्रथम दृष्टया इस बात से संतुष्ट हो जाए कि वह इस अपराध का दोषी नहीं है। यदि आरोपी को जमानत दी गई तो वह गवाहों को प्रभावित कर सकता है। इसलिए उसकी जमानत याचिका को खारिज किया जाए।

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जल जीवन मिशन (जेजेएम) में हुए घोटाले को लेकर एंटी करप्शन ब्यूरो( एसीबी) ने पूर्व मंत्री महेश जोशी समेत 22 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इसमें जेजेएम के वित्तीय सलाहकार, चीफ इंजीनियर, एडिशनल चीफ इंजीनियर, सुपरिटेंडेंट इंजीनियर और एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के नाम शामिल है। (पढ़ें पूरी खबर)



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