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गर्भवती महिला और उसके पेट में नवजात की मौत के बाद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जयपुर के रायथल इलाके में झोलाछाप डॉक्टर सुरेश कुमार चौहान 20 साल से बिना किसी रजिस्ट्रेशन के हॉस्पिटल चला रहा था। बिना किसी डिग्री के खुद ही मरीजों का इलाज करता था। जिस बेट

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अस्पताल में बिना रजिस्ट्रेशन के लैब, मेडिकल स्टोर और सोनोग्राफी मशीनें लगा रखी थीं। वहां काम करने वाले एक भी नर्सिंगकर्मी या लैब संचालक के पास वैलिड डिग्री नहीं पाई गई है। चौंकाने वाली बात यह है कि 20 साल से संचालित फर्जी अस्पताल की चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग को भनक तक नहीं लगी।

प्रसूता की मौत के बाद से झोलाछाप फरार है। भास्कर ने उसके काले कारनामों की पड़ताल की। पढ़िए ये रिपोर्ट…

कैसे खुला पूरा मामला? नागौर की रहने वाली 29 वर्षीय मोनिका कंवर को 19 सितंबर की रात करीब 11:30 बजे प्रसव पीड़ा होने पर परिजन रायथल के सुनीता महिला एवं जनरल अस्पताल लेकर पहुंचे थे। अस्पताल में मौजूद सुरेश कुमार चौहान ने खुद को डॉक्टर बताते हुए आश्वासन दिया कि सब कुछ सामान्य रहेगा। रातभर मोनिका की हालत बिगड़ती रही। परिजनों ने कई बार डॉक्टर से ऑपरेशन या रेफर करने को कहा लेकिन वह उन्हें टालता रहा।

मोनिका कंवर की 20 सितंबर को चौमूं के प्राइवेट हॉस्पिटल में मौत हो गई।

मोनिका कंवर की 20 सितंबर को चौमूं के प्राइवेट हॉस्पिटल में मौत हो गई।

अगले दिन सुबह 6 बजे तक स्थिति गंभीर हो गई। आखिरकार परिजन खुद ही गाड़ी लेकर मोनिका को चौमूं के एक प्राइवेट हॉस्पिटल ले गए। वहां डॉक्टरों ने जांच में पाया कि बच्चा 2 घंटे पहले ही गर्भ में मर चुका था और मां की हालत भी नाजुक थी। CPR देने के बावजूद मोनिका को नहीं बचाया जा सका। सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि जैसे ही मोनिका की मौत हुई, सुरेश चौहान हॉस्पिटल से फरार हो गया। परिवार ने तत्काल कालाडेरा थाने में इसकी शिकायत दी।

हॉस्पिटल में स्टाफ से लेकर सबकुछ फर्जी, बिना रजिस्ट्रेशन के मशीनें पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीमें जब वहां जांच करने पहुंचीं तो हैरान रह गईं। अस्पताल में कई आधुनिक उपकरण और दवाइयां उपलब्ध थीं। किसी भी मशीन का पंजीकरण या लाइसेंस नहीं दिखाया गया। अस्पताल में मौजूद एक भी स्टाफ के पास डिग्री या प्रशिक्षण से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे। न किसी नर्सिंगकर्मी के पास नर्सिंग सर्टिफिकेट था, न लैब टेक्नीशियन के पास लैब का लाइसेंस।

हॉस्पिटल में लगी सोनोग्राफी मशीन की जांच करती स्वास्थ्य विभाग की जयपुर से गई टीम।

हॉस्पिटल में लगी सोनोग्राफी मशीन की जांच करती स्वास्थ्य विभाग की जयपुर से गई टीम।

20 साल से चल रहा था फर्जी अस्पताल पुलिस पड़ताल में सामने आया कि यह अस्पताल पिछले 20 साल से चल रहा था। आसपास की महिलाएं सामान्य इलाज के लिए आती थीं और प्रसव तक यहीं कराए जाते थे। मरीजों और परिजनों को यह विश्वास दिलाया जाता था कि सब कुछ मेडिकल विभाग के मानदंडों के अनुसार है, जबकि हकीकत इसके बिल्कुल उलट थी।

अस्पताल में एक लैब भी खोली गई थी, लेकिन वहां काम कर रहे स्टाफ के पास न तो कोई वैध डिग्री थी और न ही रजिस्ट्रेशन। ऐसे में जो भी व्यक्ति यहां जांच करवाता, उसकी जान के साथ सीधा खिलवाड़ होता।

आरोपी के खिलाफ दर्ज FIR के अनुसार ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी डॉ. जगदीश प्रसाद सुंडा ने अपनी जांच में सुरेश चौहान को झोलाछाप नीम हकीम डॉक्टर पाया है।

आरोपी के खिलाफ दर्ज FIR के अनुसार ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी डॉ. जगदीश प्रसाद सुंडा ने अपनी जांच में सुरेश चौहान को झोलाछाप नीम हकीम डॉक्टर पाया है।

भास्कर पड़ताल में सामने आया कि झोलाछाप सुरेश चौहान ने अस्पताल का नाम अपनी बेटी सुनिता के नाम से रखा था। जिस बेटी को डॉक्टर बताकर क्षेत्र में अस्पताल का प्रचार कर रखा था वो वहां नहीं रहती। सुरेश चौहान की बेटी सुनीता की शादी हो चुकी है। कुछ साल पहले ही वह विदेश से पढ़ाई कर लौटी थी।

जांच में सामने आया कि रायथल में सुनिता महिला एवं जनरल अस्पताल के पास कोई भी रजिस्ट्रेशन नहीं था।

जांच में सामने आया कि रायथल में सुनिता महिला एवं जनरल अस्पताल के पास कोई भी रजिस्ट्रेशन नहीं था।

सोनोग्राफी मशीन में भी मिली बड़ी गड़बड़ी हॉस्पिटल में उपयोग हो रही सोनोग्राफी मशीन में भी गंभीर गड़बड़ी सामने आई है। मशीन को सीज कर जांच शुरू कर दी गई है। सोनोग्राफी मशीन के डाटा और हॉस्पिटल द्वारा उपलब्ध कराई गई। जानकारी में बड़ा अंतर मिला है। इससे आशंका जताई जा रही है कि इस मशीन के जरिए भी गैरकानूनी गतिविधियां हो सकती हैं।

चिकित्सा विभाग ने इस मामले में एक कमेटी गठित कर विशेषज्ञों से जांच कराने का निर्णय लिया है। विभाग को शक है कि मशीन का इस्तेमाल भ्रूण लिंग परीक्षण जैसी अवैध गतिविधियों के लिए किया गया हो।

पड़ताल में सामने आया कि सुरेश चौहान पिछले 25 साल से क्षेत्र में लोगों का आधुनिक इलाज करने का दावा करता था।

पड़ताल में सामने आया कि सुरेश चौहान पिछले 25 साल से क्षेत्र में लोगों का आधुनिक इलाज करने का दावा करता था।

यूपी का रहने वाला झोलाछाप भास्कर पड़ताल में सामने आया कि झोलाछाप सुरेश चौहान मूल रूप से उत्तर प्रदेश का रहने वाला है। वह करीब 25 साल से सीकर जिले के रायथल गांव में रह रहा था। शुरुआत में उसने गांव के लोगों को देखना-परामर्श देना शुरू किया। धीरे-धीरे क्षेत्र में खुद को डॉक्टर बताने लगा। इसके बाद उसने हॉस्पिटल को भी बड़ा कर लिया। सुरेश चौहान की दो बेटियां हैं। दोनों ही आयुर्वेद डॉक्टर हैं। हॉस्पिटल का नाम भी उसकी एक बेटी के नाम पर रखा गया है। अब कालाडेरा पुलिस आरोपी की तलाश में जुटी है।

जयपुर प्रथम सीएमएचओ रवि शेखावत ने भास्कर को बताया

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हमें जैसे ही सूचना मिली, हमारी टीम मौके पर पहुंची। अस्पताल में पंजीकरण, लाइसेंस और डॉक्टर की डिग्री से जुड़े दस्तावेज मांगे गए लेकिन कोई प्रस्तुत नहीं कर पाया। पूरा अस्पताल अवैध रूप से संचालित हो रहा था। सोनोग्राफी मशीन को लेकर भी संदेह कि उसका इस्तेमाल भी गलत तरीके से किया जा रहा था उसकी भी जांच कराई जा रही है। हमने तुरंत कार्रवाई कर इसे सील कर दिया और रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी है।

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कालाडेरा थाना अधिकारी बाबूलाल मीणा ने बताया- चिकित्सा विभाग, ड्रग कंट्रोल विभाग और पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज कर सुनीता महिला एवं जनरल हॉस्पिटल को सील कर दिया है। नागौर निवासी प्रसव पीड़ा से पीड़ित महिला और उसके नवजात की मौत के बाद जब जांच हुई तो अस्पताल में भारी लापरवाही और गैरकानूनी मेडिकल प्रैक्टिस की पुष्टि हुई है। आरोपी सुरेश कुमार चौहान के खिलाफ धारा 319(2), 318(4), 106(1) और इंडियन मेडिकल काउंसिल एक्ट की धारा 15(2), 15(3) के तहत केस दर्ज किया गया है। फिलहाल पुलिस उसकी तलाश में जुटी है।



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