पानी में उगने वाला विदेशी गांजा (हाइड्रोपोनिक वीड) पार्सल के जरिए राजस्थान में डिलीवर किया जा रहा है। रेव पार्टियों में इस्तेमाल होने वाली ये गांजे की एक महंगी किस्म है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत 1 करोड़ रुपए प्रति किलो है। एयरपोर्ट पर सख्ती के चलते अब इस नशे की खेप खाली मकानों के पतों पर पार्सल में मंगवाई जा रही है।
भास्कर पड़ताल में सामने आया कि जयपुर स्थित विदेशी पोस्टऑफिस में थाइलैंड से हाइड्रोपोनिक वीड के पार्सल आ रहे हैं। ड्रग्स के जो पार्सल जयपुर और उदयपुर के एड्रेस पर आते थे, वह अब जोधपुर के पतों पर भेजे जा रहे हैं।
पिछले एक महीने में ऐसे दो संदिग्ध पार्सल एनसीबी के हाथ लगे हैं, जिनकी जांच की जा रही है। आशंका है यूनिवर्सिटी एरिया में स्टूडेंट्स को इस महंगे नशे की लत लगाई जा रही है।
विदेशों से आ रहे ड्रग्स के ये पार्सल कितनी बड़ी चुनौती बन गए हैं? राजस्थान में इसका बढ़ता चलन कितना खतरनाक साबित हो रहा है? शिकंजा कसने के बावजूद कैसे तस्कर हर बार पैटर्न बदल रहे हैं? पढ़िए- संडे बिग स्टोरी में
10 लाख में 100 ग्राम पुड़िया कर रहे ऑर्डर
हाइड्रोपोनिक वीड जिसे इंटरनेशनल मार्केट में हाइड्रोपोनिक मरिजुआना भी कहा जाता है। 1 किलो की कीमत 1 करोड़ रुपए है। 100 ग्राम की पुड़िया की कीमत 10 लाख रुपए है।
एजेंसियों की मानें तो थाईलैंड से इसकी सप्लाई होती है। इसका खुलासा तब हुआ जब डार्क वेब से ऑर्डर किया गया एक पार्सल पिछले महीने जयपुर के विदेश पोस्टऑफिस में पहुंचा।

यूरोप से यह पार्सल उदयपुर के किसी पते पर भेजा गया था, इसमें घातक नशा मेथाक्वालोन मिला था।
एनसीबी सूत्रों की मानें तो जयपुर के विदेश पोस्ट ऑफिस में पिछले एक माह में दो पार्सल आ चुके हैं। इस नशे के पीछे कौनसी गैंग है, एनसीबी इसकी पड़ताल में जुटी है। पता लगाया जा रहा है कि यह पार्सल जोधपुर में ही खपाए जाने थे या इसकी सप्लाई अन्य राज्यों में होनी थी।
बता दें कि मई माह में भी एनसीबी ने विदेश पोस्टऑफिस में फ्रांस, जर्मनी से आए कोकीन, एक्सटेसी टैबलेट (MDMA) व मेथाक्वालोन के पार्सल पर कार्रवाई कर 5 राज्यों से 9 तस्करों को पकड़ा था। ये सारे ऑर्डर भी डार्क वेब से किए गए थे।

जयपुर का मुख्य डाकघर में ही एफपीओ संचालित होता है, जहां विदेशों से पार्सल आते हैं।
जयपुर के विदेश डाकघर से अब तक जब्त ड्रग्स
11 अप्रैल 2025 : जयपुर के विदेश डाकघर में पहला पार्सल एफपीओ में फ्रांस से पार्सल आया, उसमें कोकीन बरामद हुई।
21 अप्रैल 2025 : जर्मनी से आए एक पार्सल में 150.10 ग्राम एमडीएमए ड्रग बरामद हुई।
22 अप्रैल 2025 : फ्रांस से आए पार्सल में 111.55 ग्राम एक्स्टेसी टैबलेट थी।
25 अप्रैल 2025 : 101.91 ग्राम मेथाक्वालोन जब्त किया, यह भी फ्रांस से आया था।
जयपुर एयरपोर्ट पर पकड़ी गई थी 6 करोड़ की हाइड्रोपोनिक वीड
जनवरी में जयपुर डीआरआई की सूचना पर कस्टम विभाग ने बैंकॉक से फ्लाइट में आ रहे दो यात्रियों को हाइड्रोपोनिक वीड के साथ पकड़ा था। जिसकी कीमत करीब 3 करोड़ थी।
इस नशे की खेप पकड़े जाने की यह पहली कार्रवाई थी। इसके बाद फरवरी में भी 6 करोड़ की कीमत का हाइड्रोपोनिक वीड जयपुर एयरपोर्ट पर कस्टम चैकिंग में पकड़ा गया था।
इन 2 कार्रवाइयों के बाद एनसीबी सतर्क हो गया था। यही वजह है कि तस्करों ने अब इसे डिलीवर करने का तरीका बदल लिया है।

कस्टम कार्रवाई के दौरान जब्त की गई हाइड्रोपोनिक वीड। राजस्थान इस नशे की सप्लाई बढ़ती जा रही है।
पानी में उगती है गांजे की ये किस्म, तेजी से करती है नशा
हाइड्रोपोनिक वीड (मरिजुआना) यानी गांजे की एक वैरायटी है। ये हाइड्रोपोनिक तकनीक से समुद्री पानी में उगती है। इसमें जमीन में उगने वाली पारंपरिक गांजे से ज्यादा नशा होता है।
इसकी कीमत भी पारंपरिक गांजा से कई गुना होती है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में एक किलो की कीमत 1 करोड़ रुपए बताई जाती है। कुछ साल पहले तक यूरोपियन देशों में इस नशे की ज्यादा डिमांड होती थी। लेकिन अब इस नशे ने राजस्थान में भी पैर पसारने शुरू कर दिए हैं।

पानी में उगाने से इसकी खेती तेजी से फलती फूलती है। हाइड्रोपोनिक वीड में THC (टेट्रा हाइड्रो कैनाबिनोल) यानी नशे की मात्रा ज्यादा होती है।
साधारण गांजा में टीएचसी 5 से 10 प्रतिशत होता है। हाइड्रोपोनिक वीड में यह 15 से 25 प्रतिशत होती है। ये तेजी से नशा करता है। इसी कारण ड्रग एडिक्ट इसकी डिमांड करते हैं।
शरीर के लिए घातक है ये नशा
वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. अशोक सिरवी ने बताया कि यह प्रतिबंधित नशा है। इसका सेवन मानसिक व तंत्रिका तंत्र पर घातक असर करता है। हार्ट व फेफड़ों पर असर होता है और नींद का पैटर्न बिगड़ जाता है।
भारत में बैन, कनाडा-थाइलैंड में होती है खेती
ज्यादा नशा और भारत में बैन होने के चलते अवैध तरीके से तस्करी के कारण इसकी कीमत करोड़ों में है। THC लेवल बहुत ऊंचा होने के कारण रेव पार्टियों में इसकी डिमांड ज्यादा रहती है। ये वीड थाईलैंड, कनाडा, यूएसए में उगाई जाती है, इसलिए फ्लाइट में पार्सल के जरिए ही इसकी सप्लाई होती है। भारत में पूरी तरह बैन होने से रिस्क फैक्टर ज्यादा रहता है। इस कारण यह महंगा बिकता है।

हाइड्रोपोनिक तकनीक से गांजा ग्रीन हाउस में उगाया जाता है…(AI जनेरेटेड वीडियो)
डार्क वेब से हो रही डिलीवरी
भास्कर इन्वेस्टिगेशन में सामने आया कि हाइड्रोपोनिक वीड का ऑर्डर यूथ डार्क वेब के जरिए कर रहे हैं। तस्करी करने वाले इतने शातिर हैं कि पार्सल भी उन पतों पर भेज रहे हैं, जहां कोई नहीं रहता। यही कारण है कि इस नए तरह के नशे को मंगवाने वाले तस्कर अभी तक पकड़ से दूर हैं।
हाल ही में एनसीबी के हाथ जो पार्सल लगे हैं, वो जयपुर स्थित विदेश डाकघर (FPO) में जोधपुर के पॉश एरिया के एड्रेस पर भेजे गए थे, लेकिन मौके पर पहुंचने पर वह खाली प्लॉट का एड्रेस होता है।
क्या है डार्क वेब?
डार्क वेब का उपयोग अक्सर अवैध गतिविधियों के लिए किया जाता है। जिसमें ड्रग तस्करी भी शामिल है। डार्क वेब इंटरनेट का वो सीक्रेट हिस्सा है, जहां गूगल जैसे सामान्य वेब ब्राउजर या सर्च इंजन से एक्सेस नहीं किया जा सकता। यह एन्क्रिप्टेड और गुमनाम नेटवर्क है, जिसे विशेष सॉफ्टवेयर के जरिए ही खोला जाता है। सुरक्षा एजेंसियां भी पता नहीं लगा पाती कि पार्सल कहां से डिलीवर किया गया और किसने किया।

अब समझते हैं पिछले दो माह में कैसे बदले तस्करों ने पैंतरे
1. साइंस टीचर ने बदला एमडी बनाने का फॉर्मूला, फ्लैट में तैयार करता ड्रग
एनसीबी के जोनल डायरेक्टर घनश्याम सोनी ने बताया 7 जुलाई को श्रीगंगानगर में एक फ्लैट में एमडी ड्रग्स बनाने की लैब पकड़ी थी। पहले तो विश्वास नहीं हुआ कि फ्लैट में नशा बनाया जा रहा था और किसी को उसकी दुर्गंध तक नहीं आई।
दरअसल, एमडी बनाने वाले रसायनों की गंध काफी दूर तक फैलती है। इसलिए तस्कर सुनसान जगहों पर ही इसे तैयार करते हैं। लेकिन फ्लैट में एमडी बनाने का यह पहला और अनूठा मामला था।
इसे बनाने वाले साइंस के टीचर थे, उन्होंने केमिकल में कई बदलाव किए जिससे ड्रग बनाने के दौरान गंध नहीं आती थी।

श्रीगंगानगर में 7 जुलाई को एक फ्लैट पर मिली एमडी ड्रग बनाने की लैब की तस्वीर।
2. श्रीगंगानगर-बीकानेर नहीं, बाड़मेर में बढ़ी हेरोइन की तस्करी
बाड़मेर में भारत पाक-बॉर्डर के पास 30 जून को 60 किलो से ज्यादा हेरोइन पकड़ी गई थी। तारबंदी के नीचे जमीन खोदकर उसमें कई फीट लंबे पाइप के जरिए इस हेरोइन को पाकिस्तान से भेजा गया था।
छापे के दौरान पूरी खेप मिट्टी में दबी मिली थी। इस तस्करी कांड में पंजाब पुलिस ने 9 लोगों को पंजाब, हरियाणा, राजस्थान व जम्मू कश्मीर से गिरफ्तार किया।
पूछताछ के आधार पर खुलासा किया कि पाकिस्तानी तस्कर स्थानीय लोगों को प्रति पैकेट 2 लाख रुपए छिपाने का देते हैं। इस काम में जुड़े एजेंट जोधपुर पहुंचाते हैं। वहां से बड़े तस्कर पूरी खेप ले जाते हैं।
एनसीबी के अनुसार पहले हेरोइन की तस्करी पंजाब से सटे राजस्थान के श्री गंगानगर व बीकानेर रेंज में ज्यादा होती थी। लेकिन वहां राजस्थान बीएसएफ की बढ़ी सख्ती के चलते तस्करों ने बाड़मेर का रूट पकड़ा है।

बाड़मेर के सेड़वा में एनसीबी ने यह लैब भैंसों के एक बाड़े में पकड़ी थी।
3. बाड़मेर में ही स्थापित हो रही एमडी बनाने की लैब
मुंबई और राजस्थान एनसीबी ने संयुक्त ऑपरेशन कर 22 जुलाई को बाड़मेर के सेड़वा में दबिश दी। यहां एमडी ड्रग की फैक्ट्री भैंस के बाड़े में चल रही थी। गिरफ्तार किए गए शख्स बिरजू की निशानदेही पर उसी दिन प्रतापगढ़ में भी दूसरी लैब पकड़ी गई।
अगले 24 घंटे में तीसरी लैब की लोकेशन ढूंढ कर दबिश दे दी। यहां लेब के इक्यूपमेंट और केमिकल 20 फीट गहरे गड्ढे में दफनाए जा चुके थे। तस्करों को बिरजू के पकड़े जाने की सूचना मिल चुकी थी। इस तरह से अंतर्राज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया।

बाड़मेर सहित आसपास के एरिया में तस्कर ड्रग्स बनाने की फैक्ट्रियां तैयार करने में लगे हैं। हालांकि, अब तक एजेंसियों की सतर्कता के कारण वे सफल नहीं हो सके हैं।
पूछताछ में बिरजू ने बताया की बाड़मेर सीमावर्ती एरिया है यहां सड़कों की वजह से मोबिलिटी भी अच्छी है यहां से गुजरात व पंजाब में सप्लाई करना भी आसान है इसलिए बाड़मेर में लैब संचालित करने का प्लान किया। इससे पहले भी डीआरआई ने बाड़मेर के सेवड़ा गांव से एक लैब पकड़ी थी, इसी क्षेत्र का यह दूसरा मामला हैं।
इससे पहले राजस्थान में जालोर, सांचौर, जोधपुर व श्रीगंगानगर में लैब लगाने के मामले सामने आए थे।
एनसीबी के जोनल डायरेक्टर घनश्याम सोनी ने बताया कि लगातार लेब के इक्यूपमेंट और केमिकल पकड़ा जाना यह संकेत है कि सीमावर्ती जिले बाड़मेर में तस्कर एक्टिव हैं। नए सिरे से यहां केंद्र बनाया जा रहा है।

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