☜ Click Here to Star Rating


प्रदेश के शहरी निकाय और पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव जल्द होने वाले हैं। राज्य निर्वाचन आयोग अगले सप्ताह इसकी घोषणा कर सकता है। इधर, इस फैसले के बाद सरकार की ‘वन स्टेट-वन इलेक्शन’ की घोषणा को झटका लगा है और अब यह पूरी नहीं होगी।

.

सितंबर-अक्टूबर में 3847 ग्राम पंचायतों का कार्यकाल पूरा हो रहा है। वहीं प्रदेश के 5 नगर निगम (उदयपुर, बीकानेर, भरतपुर, अलवर और पाली) में प्रशासक नियुक्त हैं, जहां चुनाव होने हैं।

सरकार पंचायतीराज संस्थाओं और शहरी निकायों के परिसीमन के नोटिफिकेशन भी जारी नहीं कर पाई है। इस बीच राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव करवाने की तैयारी कर ली है।

ऐसे में सवाल है कि यदि अगले सप्ताह चुनावों की घोषणा होती है तो इलेक्शन कब होंगे? जयपुर-जोधपुर और कोटा नगर निगम के चुनावों का क्या होगा? प्रदेश में किस तरह के राजनीतिक हालात बनेंगे? ‘वन स्टेट-वन इलेक्शन’ फॉर्मूला का क्या होगा? और निर्वाचन आयोग के सामने क्या चुनौती है?

इन सभी सवालों के जवाब पढ़ें इस एक्सप्लेनर में…

सवाल: राज्य निर्वाचन आयोग यदि 10 दिन में चुनावों की घोषणा करेगा तो चुनाव कब हो सकते हैं? जवाब: राज्य निर्वाचन आयुक्त ने 7 से 10 दिन में चुनाव की घोषणा करने की बात कही है। राज्य निर्वाचन आयोग अगले सप्ताह चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर देगा। ऐसे में सितंबर अंत से लेकर अक्टूबर तक चुनाव हो सकते हैं। हालांकि तारीखों का फैसला आयोग ही करेगा।

सवाल: कितनी पंचायतों और कितने शहरी निकायों में चुनाव होंगे? नगर निगम कौन-कौन से हैं इसमें? जवाब: 11310 पंचायतें और 150 से ज्यादा शहरी निकाय इसके दायरे में आ रहे हैं। जनवरी 2025 में 6759, मार्च 2025 में 704 पंचायतों का पांच साल का कार्यकाल पूरा हो चुका है। सरकार इनमें प्रशासक लगा चुकी है। सितंबर, अक्टूबर 2025 तक 3847 ग्राम पंचायतों का पांच साल का कार्यकाल पूरा हो रहा है। ऐसे में ज्यादातर ग्राम पंचायतों में चुनाव होंगे।

सवाल: पंचायत समितियों, जिला परिषदों के मेंबर, प्रधान और जिला प्रमुख चुनावों का क्या होगा? जवाब: पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य, प्रधान और जिला प्रमुख चुनाव की घोषणा बाद में होगी। 21 जिला परिषदों और 222 पंचायत समितियों के सदस्यों, प्रधान, जिला प्रमुखों का कार्यकाल नवंबर-दिसंबर में खत्म होगा। इसलिए उनकी घोषणा बाद में होने के आसार हैं।

6 जिला परिषदों और 78 पंचायत समितियों का कार्यकाल अगस्त-सितंबर 2026 में खत्म होगा। 4 जिला परिषदों और 30 पंचायत समितियों का कार्यकाल नवंबर-दिसंबर 2026 में पूरा होगा। ऐसे में फिलहाल पंचायत समिति और जिला परिषदों के चुनाव की घोषणा होने के आसार कम हैं।

सवाल: ‘वन स्टेट-वन इलेक्शन’ को क्यों अव्यावहारिक बताया गया? जवाब: राज्य निर्वाचन आयुक्त ने ‘वन स्टेट-वन इलेक्शन’ को दो वजहों से अव्यावहारिक बताया। पहला संवैधानिक प्रावधान और दूसरा संसाधनों की कमी

संवैधानिक प्रावधान: ‘वन स्टेट-वन इलेक्शन’ के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा पंचायतीराज संस्थाओं और शहरी निकायों के कार्यकाल पूरा होने का अलग-अलग समय है। जिन संस्थाओं और निकायों का कार्यकाल पूरा हो गया, वहां सरकार ने प्रशासक लगा दिए। लेकिन बहुत से शहरी निकायों और पंचायतीराज संस्थाओं का कार्यकाल 2026 और 2027 तक पूरा होगा। इनमें समय से पहले निर्वाचित बोर्ड को भंग करके चुनाव करवाना संभव नहीं है। जिनका कार्यकाल पूरा हो गया, वहां तो फिर भी प्रशासक लगाकर छह महीने तक तो समय खींचा जा सकता है, लेकिन कार्यकाल पूरा हुए बिना चुनाव नहीं करवा सकते। अब हाईकोर्ट के आदेशों के बाद तो देरी की कोई गुंजाइश नहीं बची है।

संसाधनों की कमी: एक साथ चुनाव करवाने के लिए जितनी ईवीएम, पुलिस बल और कर्मचारी चाहिए, उनका इंतजाम करना भारी चुनौती है। सरकार को सैकड़ों करोड़ का अतिरिक्त बजट देना होगा। राज्य निर्वाचन आयोग के पास अभी एक साथ चुनाव करवाने जितनी ईवीएम भी नहीं है।

सवाल: ‘वन स्टेट-वन इलेक्शन’ लागू करने के लिए किन संवैधानिक और तकनीकी बदलावों की जरूरत है? जवाब: 73वें और 74वें संविधान संशोधन के मुताबिक पंचायती राज संस्थाओं और शहरी निकायों के चुनाव 5 साल में करवाना अनिवार्य है। असामान्य परिस्थितियों को छोड़कर 6 महीने से ज्यादा चुनाव टाला नहीं जा सकता। जिन पंचायतीराज संस्थाओं, शहरी निकायों का पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं हुआ, उनमें पहले बोर्ड को बिना कारण भंग नहीं कर सकते। ‘वन स्टेट-वन इलेक्शन’ के रास्ते में यही सबसे बड़ी बाधा है। कोरोना जैसे असामान्य कारण का हवाला देकर चुनाव टालने के लिए सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से अनुमति ली थी। जब तक संविधान में संशोधन नहीं हो जाता, तब तक यह संभव नहीं है। ‘वन स्टेट-वन इलेक्शन’ के लिए जरूरी है कि कुछ संस्थाओं के चुनाव समय से पहले और कुछ के चुनाव टालने की अनुमति मिले।

सवाल: हरियाणा, पंजाब और गुजरात में पंचायत, निकाय चुनाव में देरी पर अदालत ने क्या कदम उठाए थे? जवाब: पिछले साल ही पंजाब और हरियाणा में पंचायत चुनावों की देरी पर हाईकोर्ट ने सवाल उठाते हुए समय पर चुनाव करवाने के आदेश दिए थे। अदालत ने कानूनी प्रावधानों के तहत समय सीमा में चुनाव करवाने को कहा था। सुप्रीम कोर्ट ने ​पिछले साल पंजाब सरकार को पंचायती राज संस्थाओं और स्थानीय निकायों के चुनाव करवाने के आदेश दिए।

सुप्रीम कोर्ट ने लंबे समय तक चुनाव को टालने पर नाराजगी भी जताई थी। सरकार को बिना किसी बहानेबाजी के तत्काल चुनाव करवाने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का राज्य निर्वाचन आयुक्त ने भी हवाला दिया था। स्थानीय निकायों के चुनाव टालने के मामले में गुजरात हाईकोर्ट भी आदेश दे चुका है। गुजरात हाईकोर्ट ने भी निकाय चुनाव को आगे खिसकाने को गलत बताते हुए सरकार को चुनाव करवाने के आदेश दिए थे

सवाल: यदि निर्वाचन आयोग जल्द ही चुनाव कार्यक्रम घोषित करता है तो किस तरह के राजनीतिक हालात बनेंगे? जवाब: राज्य निर्वाचन आयोग ने हाईकोर्ट के आदेशों क हवाला देकर जल्द चुनाव करवाने की घोषणा की है। आयोग अगले सप्ताह तक चुनाव की घोषणा कर देगा। राज्य निर्वाचन आयोग के जल्द चुनाव कार्यक्रम घोषित करने से राज्य सरकार की ‘वन स्टेट-वन इलेक्शन’ की घोषणा फेल हो गई है। राज्य निर्वाचन आयुक्त ने ही ‘वन स्टेट-वन इलेक्शन’ को अव्यावहारिक ठहराते हुए इस आइडिया को खारिज कर दिया। पंचायतों के चुनाव किसी भी राजनीतिक पार्टी के सिंबल पर नहीं होते, इसलिए सरकार के लिए यह राहत हो सकती है, क्योंकि सरपंच किसी पार्टी के चुनाव चिह्न पर नहीं जीतते। ऐसे में 11 हजार से ज्यादा पंचायतों में सरपंच कोई भी बने, सियासी नरेटिव नहीं बदलेगा।

नगर निगम, नगर परिषदों और नगरपालिकाओं के चुनावों में कितने पार्षद, मेयर, सभापति और अध्यक्ष किस पार्टी के बनते हैं, इससे सियासी नरेटिव बनेगा। चुनाव के रिजल्ट से ज्यादा राज्य निर्वाचन आयोग की चुनाव करवाने की घोषणा ने सियासी नरेटिव को प्रभावित किया है। क्योंकि सरकार की ‘वन स्टेट-वन इलेक्शन’ की घोषणा ​पूरी नहीं हो पाई है, इसे विपक्षी दल मुद्दा बनाएंगे।

सवाल: परिसीमन में नए वार्डाें और नई पंचायत का फैसला चुनावों पर कैसे पड़ेगा? क्या परिसीमन का नोटिफिकेशन चुनाव कार्यक्रम की घोषणा से पहले हो जाएगा? जवाब: राज्य निर्वाचन आयोग अगले सप्ताह तक चुनाव कार्यक्रम घोषित करने की तैयारी में है। पंचायती राज और शहरी निकायों के वार्डों के पुनर्गठन, नई पंचायतें, पंचायत समितियां बनाने और सीमाओं में बदलाव पर सरकार की कैबिनेट सब कमेटी की रिपोर्ट आना बाकी है। राज्य निर्वाचन आयोग के रुख के बाद अब सरकार भी परिसीमन पर जल्द फैसला करने की तैयारी कर रही है। कैबिनेट सब कमेटी की रिपोर्ट लेकर सरकार ​वार्डों के परिसीमन और पंचायती राज संस्थाओं के परिसीमन पर अधिसूचना जारी कर सकती है।

चुनाव कार्यक्रम की घोषणा तक अगर परिसीमन का नोटिफिकेशन जारी हो जाएगा तो चुनाव उसके हिसाब से होंगे। अगर परिसीमन का नोटिफिकेशन नहीं हुआ तो आयोग पुराने हिसाब से चुनाव करवाएगा। राज्य निर्वाचन आयुक्त ने साफ कहा है कि चुनाव कार्यक्रम की घोषणा तक परिसीमन पर जो स्थिति होगी, उसी हिसाब से चुनाव होंगे।

सवाल: अगर परिसीमन का नोटिफिकेशन समय पर जारी नहीं हुआ तो चुनाव किस आधार पर होंगे? जवाब: परिसीमन का नोटिफिकेशन समय पर जारी नहीं हुआ तो राज्य निर्वाचन आयोग मौजूदा हालात के हिसाब से ही चुनाव करवाएगा। सरकार ने पंचायती राज संस्थाओं और निकायों की बाउंड्री में जो बदलाव किया है। यदि नोटिफिकेशन नहीं किया तो चुनाव पुरानी बाउंड्रीज के हिसाब से होंगे।

सवाल: आने वाले चुनावों में सबसे बड़ी चुनौतियां निर्वाचन आयोग के सामने क्या होंगी? जवाब: राज्य निर्वाचन आयोग और सरकार के बीच कुछ तल्खी बढ़ेगी। अपडेट वोटर लिस्ट तैयार करना सबसे बड़ी चुनौती होगी। नए परिसीमन पर ऐनवक्त पर फैसला होने से कई तरह के असमंजस के हालात रहेंगे। चुनाव कार्यक्रम की घोषणा से ठीक पहले परिसीमन होने पर आयोग का काम बढ़ेगा। सरकार और आयोग के बीच समन्वय भी इस बार चुनौती रहेगी, लेकिन ये सब चुनौतियां बातचीत से सुलझाई जा सकती हैं।

स्थानीय निकाय चुनाव के लिए वोटर लिस्ट अपडेट करने में कम से कम दो महीने का वक्त लगेगा। समय पर निकाय चुनाव करवाने में यह सबसे बड़ी चुनौती है।



Discover more from Kuchaman City Directory

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Comments

Leave a Reply

error: Content is protected !!

Sign In

Register

Reset Password

Please enter your username or email address, you will receive a link to create a new password via email.

Discover more from Kuchaman City Directory

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading