दौसा में बुखार से पीड़ित बच्ची का ब्लड सैंपल नहीं लेने की शिकायत पर विधायक स्कूटी से बांदीकुई उपजिला हॉस्पिटल पहुंच गए। विधायक भागचंद टांकड़ा ने लापरवाही पर अस्पताल प्रशासन को फटकार लगाई और एसडीएम को मौके पर बुलाकर कार्रवाई के निर्देश दिए। वहीं PMO न

विधायक भागचंद टांकड़ा ने लापरवाही पर अस्पताल प्रशासन को फटकार लगाई और एसडीएम को मौके पर बुलाकर कार्रवाई के निर्देश दिए।
विधायक ने मौके पर SDM को बुलाया, कार्रवाई के निर्देश
विधायक ने बताया कि 12 जुलाई को उपजिला हॉस्पिटल में बडियाल कला (बांदीकुई) निवासी काजल सैनी (9) को भर्ती कराया गया था। बुधवार सुबह ब्लड सैंपल लेने को लेकर लैब व नर्सिंग कर्मी मरीज के परिजनों को इधर-उधर भेजकर परेशान करते रहे।
नर्सिंग स्टाफ ने कहा कि सैंपल लैब कर्मी लेंगे, जबकि लैब में बताया गया कि यह कार्य नर्सिंग स्टाफ करेगा। इससे मरीज के परिजनों ने परेशान होकर मुझसे शिकायत की। मेरी मौजूदगी में ही ब्लड सैंपल और जांच की कार्रवाई की गई। राज्य सरकार के नियमों के अनुसार सैंपल नर्सिंगकर्मी लेते हैं, लेकिन हॉस्पिटल प्रशासन (पीएमओ के आदेश से) ने कार्य व्यवस्था के लिए लैब कर्मियों को जिम्मेदारी दी हुई थी।

एक दिन पहले हॉस्पिटल में किया गया था भर्ती
जानकारी के अनुसार, काजल सैनी को मंगलवार दोपहर करीब 2 बजे अस्पताल में दिखाया गया था। बुखार होने पर डॉ. एस.के. सोनी (शिशु एवं बाल रोग विशेषज्ञ) ने जांच के बाद बच्ची को भर्ती कर लिया। शाम होने के कारण अगले दिन ब्लड की जांच (CBC) करवाने के लिए कहा गया था।
बुधवार सुबह अस्पताल खुलने के बाद भी ब्लड सैंपल नहीं लिया गया। बच्ची के साथ अस्पताल आए मामा राकेश सैनी करीब डेढ़ घंटे तक लैब और नर्सिंगकर्मियों के बीच चक्कर लगाते रहे। शिकायत पर सुबह 9:30 बजे विधायक भागचंद टांकड़ा स्कूटी से मौके पर पहुंचे और कार्यवाहक पीएमओ डॉ. पवन जारवाल व डॉ. रामनिवास मीणा से पूरे मामले की जानकारी ली। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने मौके पर एसडीएम को बुलाया और कहा कि मरीजों के साथ इस तरह की लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं होगी।

लैब और नर्सिंग कर्मचारी टालमटोल करते रहे
राकेश सैनी ने बताया कि डॉक्टर ने मंगलवार (12 अगस्त) को बुधवार सुबह खून की जांच करवाने के लिए कहा था। सुबह 8 बजे नर्सिंग स्टाफ को ब्लड सैंपल लेने के लिए कहा तो उन्होंने लैब में जाने की बात कही। लैब कर्मचारियों ने वापस नर्सिंग स्टाफ के पास भेज दिया। करीब एक घंटे तक दोनों पक्ष एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते रहे। इसके बाद परेशान होकर विधायक को मामले से अवगत कराया।
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