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जयपुर के सवाई मानसिंह हॉस्पिटल (SMS) में एक अप्लास्टिक एनिमिया से पीड़ित महिला का सफल बोनमेरो ट्रांसप्लांट किया गया। हेमेटोलॉजी क्लिनिकल डिपार्टमेंट की नई यूनिट में यह ट्रांसप्लांट किया गया।

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इस बीमारी से लड़ते हुए महिला ने पिछले 6 सालों में 200 यूनिट से ज्यादा ब्लड अपने शरीर में चढ़वाया। चित्तौड़गढ़ की रहने वाली 33 वर्षीय यह महिला 2018 से अप्लास्टिक एनिमिया से पीड़ित थी, जिसके कारण उसे बार-बार खून और प्लेटलेट चढ़वाने की आवश्यकता होती थी।

हेमेटोलॉजी क्लिनिकल डिपार्टमेंट के एचओडी डॉक्टर विष्णु कुमार शर्मा ने बताया-

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बीमारी में मानव के शरीर के बोनमेरो में ब्लड सैल (ब्लड में मौजूद आरबीसी, डब्ल्यूबीसी, प्लेटलेट) का बनना बंद हो जाता है, जिससे मरीज के खून और प्लेटलेट्स की कमी हो जाती है।

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6 साल में 200 यूनिट से ज्यादा ब्लड, 50 यूनिट से ज्यादा प्लेटलेट चढ़वाईं डॉ. विष्णु शर्मा के मुताबिक, पिछले 6 सालों में अप्लास्टिक एनीमिया से लड़ते हुए, महिला ने 200 यूनिट से ज्यादा खून और 50 यूनिट से ज्यादा प्लेटलेट्स चढ़वाईं। इसके बावजूद महिला का हीमोग्लोबिन बहुत कम रहता और प्लेटलेट्स का लेवल 15 हजार से ऊपर नहीं गया। प्लेटलेट्स कम होने के कारण महिला को कई बार ब्लीडिंग की समस्या के चलते हॉस्पिटल में भर्ती होना पड़ा।

भाई से स्टेम सेल लेकर बहन को चढ़ाए डॉ. विष्णु शर्मा ने बताया- महिला के एसएमएस के हेमेटोलॉजी क्लिनिकल डिपार्टमेंट की यूनिट में भर्ती होने के बाद उसका पहले दवाईयों से ट्रीटमेंट करके उसे थोड़ा नॉर्मल किया गया। उसके बाद उसके भाई के बोनमेरो से स्टेम सेल महिला के चढ़ाए गए। इसके बाद महिला के शहरी में इम्यूनिटी लेवल को कम करने की दवाइयां दी। इस प्रक्रिया के बाद अब महिला के बोनमेरो में रेड ब्लड सैल बनने शुरू हो गए। इस प्र​क्रिया को एलोजैनिक ट्रांसप्लांट कहते है।

प्राइवेट में 20 लाख रुपए तक खर्च, लेकिन एसएमएस में फ्री डॉक्टरों के मुताबिक, इस प्रक्रिया को अगर किसी बड़े प्राइवेट हॉस्पिटल में करवाते है तो मरीज का करीब 15 से 20 लाख रुपए तक का खर्चा आता है। लेकिन यहां इस महिला का पूरा इलाज मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना (मां योजना) के तहत फ्री किया गया।

ऑटोलॉगस ट्रांसप्लांट से ब्लड कैंसर ठीक किया इसी डिपार्टमेंट के शुरू होने के बाद भर्ती एक भरतपुर के युव​क जो मायलोमा ब्लड कैंसर से पीड़ित था उसका भी सफल इलाज किया गया। इसके तहत युवक का ऑटोलॉगस ट्रांसप्लांट किया गया। इसमें युवक के ही ब्लड से स्टेम सेल निकालकर उसे अलग किया और उसके बाद हाइडोज कीमोथैरेपी देकर कैंसर सैल और बोनमेरो में ब्लड सैल बनाने की प्रक्रिया को खत्म किया।

कीमोथैरेपी पूरी होने के बाद मरीज को वापस उसी के निकाले स्टेम सेल को बोनमेरो में ट्रांसप्लांट किया गया। करीब एक माह के बाद मरीज के रिजल्ट पॉजिटिव आने लगे और मरीज के शरीर में नया ब्लड बनने लगा।



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