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जयपुर के हेरिटेज नगर निगम और ग्रेटर नगर निगम को मिलाकर एक नगर निगम बनाने के सरकार के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई हैं। कांग्रेस नेता व हवामहल से प्रत्याशी रहे आरआर तिवाड़ी ने जनहित याचिका दायर करके स्वायत्त शासन विभाग की 27 मार्च 2025 की अधिसूच

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पीआईएल में कहा गया है कि सरकार ने यह फैसला पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित और चुनावी लाभ को ध्यान में रखते हुए लिया हैं। जबकि पिछली सरकार ने बढ़ती जनसंख्या के मद्देनजर शहर के समुचित विकास को ध्यान में रखकर दो निगम बनाने का फैसला किया था।

नागरिक सुविधाओं में कमी आएगी याचिकाकर्ता के वकील प्रेमचंद देवंदा और सुनील शर्मा ने बताया- वर्तमान में जयपुर की शहरी आबादी लगभग 45 लाख है। बढ़ते हुए शहरीकरण और क्षेत्रफल के हिसाब से 250 वार्डों को कम करके केवल 150 वार्ड कर देना शहरी विकास के लिहाज़ से उचित नहीं है।

इससे शहर का विकास अवरुद्ध होगा और प्रशासनिक ढांचा प्रभावित होगा। शहर के समुचित विकास, साफ़ सफाई ,सीवरेज, सड़क निर्माण आदि नागरिक समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए पिछली सरकार ने शहर में दो नगर-निगम बनाए थे, जिसे साल 2019 में हाईकोर्ट ने भी उचित ठहराया था।

हेरिटेज सिटी के विशेष प्रावधान समाप्त हो जाएंगे उन्होंने कहा कि यूनेस्को ने वॉलसिटी को वर्ल्ड हेरिटेज सिटी का दर्जा दिया हुआ हैं। हेरिटेज निगम होने पर इसके लिए विशेष प्रावधान किए गए थे लेकिन अब हेरिटेज कमेटी, तकनीकी हेरिटेज समिति और हेरिटेज सेल का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा।

याचिका में कहा गया कि सरकार का यह निर्णय बिना किसी सार्वजनिक परामर्श, व्यावहारिक अध्ययन और कानूनी प्रावधानों की पालना के बिना लिया गया हैं, जो संविधान और राजस्थान नगरपालिका अधिनियम-2009 का सीधा उल्लंघन हैं।



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