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जयपुर नगर निगम ग्रेटर और हेरिटेज को एक करने के सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सोमवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। एक्टिंग सीजे संजीव प्रकाश शर्मा की खंडपीठ में जवाब पेश करते हुए महाधिवक्ता राजेन्द्र प्रसाद ने कहा कि इस याचिका में य
उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता आर.आर. तिवाड़ी कांग्रेस पार्टी के जिलाध्यक्ष हैं और सक्रिय राजनीति में हैं। वह पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार रहे है। सरकार के फैसले से याचिकाकर्ता के ना तो संवैधानिक और ना ही कानूनी अधिकार का हनन नहीं हो रहा हैं।
स्थानीय निकायों का एरिया घटाना, बढ़ाना और मिलाना सरकार का प्रशासनिक काम नहीं है, बल्कि यह विधायी कार्य है। इसलिए कोर्ट के पास न्यायिक समीक्षा का सीमित दायरा है।
दो निगम बनाने का कोई फायदा नहीं हुआ सरकार ने जवाब में बताया कि पिछली कांग्रेस सरकार ने कई कारणों से जयपुर में दो नगर निगम बनाने का फैसला किया था। लेकिन यह फैसला गहन अध्ययन के आधार पर नहीं लिया था। दोनों नगर निगम के लिए ना तो समुचित आधारभूत ढांचागत व्यवस्था की थी और ना ही संसाधन ही दिए।
इस कारण दोनों ही नगर निगम अपना काम सही प्रकार से नहीं कर पा रहे हैं। दो निगम बनने से कर्मचारियों और संसाधनों के बंटवारे में अराजकता की स्थिति हो गई। इससे काम करने की क्षमता प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हुई और दोनों निगमों के बीच जवाबदेही, सांमजस्य बनाने की परेशानी के साथ ही अनावश्यक रूप से वित्तीय भार भी बढ़ गया।
दो निगम से व्यवस्था नहीं संभल रही, एक करके क्या होगा? वहीं, याचिकाकर्ता के अधिवक्ता प्रेमचंद देवंदा ने कहा कि पूर्व में दो नगर निगम बनाने को भी चुनौती दी गई थी। लेकिन हाईकोर्ट ने सरकार के दो निगम बनाने के आदेश को सही ठहराया था। उन्होने कहा कि जयपुर की आबादी 45 लाख से ज्यादा हैं।
दो निगम होने के बावजूद अभी भी ना तो अतिक्रमण रुक रहे हैं, ना सफाई हो रही है, ना अवैध निर्माण पर काबू है, ना ही सीवरेज लाइनों की ढंग से मेंटिनेंस हो पा रही हैं। ऐसे में दो निगमों को एक करके क्या होगा। जयपुर शहर का लगातार विस्तार हो रहा हैं।
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