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मैं मराठी हूं। मेरा राजस्थानी कल्चर से कोई जुड़ाव नहीं रहा। दाल-बाटी-चूरमा खा पाऊंगी, ऐसा भी नहीं सोचा था। ये वाकई लाजवाब है।…जयपुर से होने के बाद भी सीरियल में राजस्थानी नहीं बोल पाया।

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‘प्रथाओं की ओढ़े चुनरी: बींदणी’ टीवी सीरियल की स्टार कास्ट ने अपने ये अनुभव दैनिक भास्कर के साथ शेयर किए। 12 अगस्त से ऑन एयर होने वाले इस शो में राजस्थानी परंपरा, रिश्तों और संघर्ष की कहानी देखने को मिलेगी।

सीरियल के मेन लीड गौरी शेलगांवकर, आकाश जग्गा और मोनिका खन्ना प्रमोशन के लिए जयपुर पहुंचे थे। इस दौरान राजस्थानी खाने का लुत्फ उठाते हुए भास्कर से अपने-अपने किरदारों के बारे में बात की।

जयपुर के एक होटल में

जयपुर के एक होटल में

जयपुर के रहने वाले है आकाश जग्गा

किस तरह का शो है, अपने किरदार के बारे में बताएं?

आकाश: हमारे शो का नाम ‘बींदणी’ है। मेरे किरदार का नाम कुंदन है। कुंदन एक ऐसा इंसान है, जो ज्यादा नहीं बोलता है। गलत के खिलाफ आवाज उठाता है। उसके जीवन में कुछ ऐसे हादसे हुए है, जिसकी वजह से खुद को औरों से अलग रखता है।

आप राजस्थान से है और आप राजस्थानी किरदार निभा रहे है। दोनों एक्ट्रेस जो बाहरी राज्य से आती है, उनके गाइड और हेल्पर बने यहां?

आकाश: बहुत सरप्राइज वाली बात है। कुंदन जो मेरा किरदार है, वह राजस्थानी नहीं बोलेगा। स्क्रिप्ट रीडिंग के दौरान मैं रमकुडी को जीजा बोल रहा था। तो सभी चौंके, जीजा तो अलग रिश्ता होता है। तब मैंने बताया- मेरे बहुत दोस्त राजपूत है और वे अपनी बड़ी बहन को जीजा बोलते हैं।

मैंने कुछ चीजें ऐसे जरूर निकाली है। इनके लिए आज गाइड जरूर बनने वाला हूं। कल मोनिका का बर्थडे है, हमें कहीं सेलिब्रेट करने जरूर जाएंगे।

आप महाराष्ट्र से आती है और राजस्थानी किरदार निभा रही हैं, यहां किन प्रथाओं को जानने का मौका मिला?

गौरी: मैं मराठी हूं। मेरा राजस्थानी कल्चर से किसी भी प्रकार से जुड़ाव नहीं रहा। इस शो में काम करने के बाद राजस्थान को जानने का मौका मिला। यहां के कल्चर, फूड और ट्रेडिशन की नॉलेज मिली।

छोटी सी बात को पूरी तरह से जानने में मेरी जिज्ञासा बनी रहती है। हम राजस्थानी थाली खा रहे है। मुझे लगा नहीं था कि मैं खा पाऊंगी। इसे पूरी तरह से खा पाई और यह बिलकुल लाइट तरीके से बनाया गया है।

आपके किरदार के साथ छोटा बच्चा भी जुड़ा हुआ है, उसके साथ काम करना कितना मुश्किल था?

गौरी: मेरे साथ एक छोटे बच्चे का भी किरदार है, जिसे मैं हमेशा अपने हाथ में रखती हूं। मैं उसकी मां नहीं हूं, लेकिन जिम्मेदारी जो है, वह पूरी तरह मां वाली है। चैलेंज तो जरूर रहा लेकिन मैंने इसे दूसरे अंदाज में एक्सेप्ट किया। यह मेरे किरदार की ब्यूटी थी कि छोटी उम्र में मां की जिम्मेदारियों को निभाना और समझदारी रखने की चीज मुझे परिपक्व बना रही थी।

इससे पहले भी मैंने मराठी सीरियल किया था। उसमें भी छोटे बच्चे के साथ रोल था। उसमें मैं सेरोगेसी से मां बनी थी। उस वक्त जरूर डरा करती थी कि बच्चे के साथ कैसे किरदार प्ले करूंगी। मैं रोती थी कि मैं यह नहीं कर पाऊंगी। पूरे सीरियल की कहानी मेरे और उस बच्चे पर ही आधारित थी। ऐसे में हमेशा डर रहता था कि सीन कैसे कर पाउंगी।

धीर-धीरे उस बच्चे के साथ स्पेशल बॉन्ड बन गया और हर सीन करने में मजा आने लगा। बच्चा हाथ में है और वह कुछ भी मोमेंट कर रहा है लेकिन आप बतौर एक्टर अपने सीन, डायलॉग पर ध्यान देते हो। इसका प्रभाव अभी वाले किरदार में दिखता है और इसे करने में आसानी हो गई।

पंजाब से हूं, राजस्थानी कल्चर को जाना

आप राजस्थानी खाना यहां खा रही है, राजस्थानी संस्कृति से खुद का किस तरह का जुड़ाव देखती हैं?

मोनिका: मैं पंजाब से हूं, लेकिन राजस्थानी कल्चर को जानने-पहचाने का मौका मिल रहा है। दाल-बाटी-चूरमा जो देशी घी में बना हुआ है, इसका स्वाद हम चख रहे हैं। हमारे भारत की यही खूबसूरती है कि हर जगह पर डिफरेंट कल्चर मिलता है।

दाल-बाटी-चूरमा खाते हुए मोनिका ने कहा- ये बहुत ही कमाल का खाना है। मैं पहली बार खा रही हूं। दाल-बाटी-चूरमा की इस थाली में बता सकती हूं कि कुंदन कौनसा है और घेवर कौनसा है। बातचीत करते हुए उन्होंने बताया भी कि ये चूरमा और ये घेवर है। जो नमक वाली चीजें है, जिनमें स्वाद आ रहा है।

वह कुंदन है। एक छोटी सी कटोरी में रखी मिर्ची दिखाते हुए बोली, यह ‘रमकुडी’ यानी मेरा किरदार है। जो सारे स्वाद को तीखा कर देती है। इस शो का हिस्सा बनकर मैं खुश हूं।

आपने बताया कि आपका तीखी मिर्ची वाला किरदार है, आपके लिए बतौर एक्टर यह किरदार कितना ग्रोइंग है?

मोनिका: पर्सनल लाइफ में रमकुडी से बिल्कुल अलग हूं। वह (रमकुडी) बहुत मीन है, बहुत ही रूड है और अन प्रिडिक्टेबल है। वह किस मोमेंट पर बदल जाएगी। यह कोई आभास भी नहीं लगा पाएगा। मिस्ट्री से भरी हुई है। मोनिका बिल्कुल खुली किताब की तरह है। जैसी है, वैसी ही नजर आती है।

रमकुडी से इंस्पायर तो नहीं हूं, लेकिन इतना कहूंगी कि अच्छाई की वेल्यू तब ही होती है, जब बुराई को ज्यादा से ज्यादा दिखाओगे।

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