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सरदारपुरा सी रोड स्थित इसी दुकान को ढहाने के संबंध में दर्ज हुई थी एफआईआर। (फाइल फोटो)

जोधपुर के सरदारपुरा सी रोड पर ड्राई क्लीनर की दुकान को रातोरात जेसीबी से ढहाने के मामले में पुलिस जिस आरोपी सुमित अग्रवाल को 12 दिन तक ढूंढ नहीं सकी, अब उसे राजस्थान हाईकोर्ट से राहत मिली है। अग्रवाल की ओर से पेश याचिका पर सुनवाई करते हुए राजस्थान हा

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दरअसल, गीताभवन रोड निवासी कारोबारी सुमित अग्रवाल ने सरदारपुरा थाने के पास मैन सी रोड पर एक भूखंड खरीदा था। इस पर कुड़ी भगतासनी हाउसिंग बोर्ड निवासी राकेश कन्नौजिया की किराए पर ड्राई क्लीनिंग की दुकान थी। इस दुकान का विवाद किराया प्राधिकरण में लंबित है और लंबे समय से यह दुकान खाली नहीं हो रही थी।

FIR- दुकान खाली कराने मिल रही थी धमकियां

गत 1 सितंबर की देर रात कुछ लोगों ने जेसीबी से यह दुकान पूरी तरह ढहा दी और दुकान का सामान ट्रैक्टर ट्रॉली में भरकर ले गए थे। इससे आहत राकेश कन्नौजिया ने सरदारपुरा थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। इसमें बताया- यह दुकान 50 साल पहले कन्नौजिया के पिता ने केदार नारायण माथुर से किराए पर ली थी। उनके निधन के बाद आशा माथुर व उनके बेटे सर्वेश माथुर को हर महीने किराया दे रहे थे।

इसी साल जनवरी में माथुर ने पूरा भूखंड सुमित अग्रवाल को बेच दिया। तब से दुकान का विवाद कोर्ट में है। कन्नौजिया के अनुसार कुछ दिनों से दो युवक उसे दुकान खाली करने के लिए धमका रहे थे। बाद में आरोपियों ने दुकान तोड़ दी। इस पर कन्नौजिया ने सुमित अग्रवाल, सर्वेश माथुर, जय कुमार व श्याम दासवानी सहित अन्य पर आरोप लगाए। पुलिस ने केस दर्ज कर जेसीबी चालक चौहाबो सेक्टर-21 निवासी आकिब पुत्र जुबेर और मसूरिया बलदेव नगर निवासी इमरान पुत्र मोहम्मद जफर को पकड़ा था।

पुलिस के लिए फरार, कोर्ट से राहत

सरदारपुरा पुलिस और डीएसटी पश्चिम की टीम एफआईआर दर्ज होने के बाद से ही मुख्य आरोपी सुमित अग्रवाल को पकड़ने की कोशिश करती रही, लेकिन उसे पकड़ नहीं पाई। इस बीच, सुमित अग्रवाल की ओर से वकील तरुण दूडिया ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई। इसमें सुमित की ओर से दलील दी गई कि वह विवादित संपत्ति का बाद का खरीदार है और शिकायतकर्ता एवं संपत्ति के पहले मालिक के बीच पूर्व मुकदमेबाजी लंबित थी। उसका आरोपित घटना में कोई सक्रिय भूमिका नहीं है।

नामी प्रोपर्टी कारोबारी व अन्य आरोपी छूटे

इस मामले में पुलिस ने पेट्रोल पंप व्यवसायी इकबाल उर्फ ईक्कू, इकरामुद्दीन खान और लक्ष्मण प्रजापत को गिरफ्तार कर तीन-तीन दिन के पुलिस रिमांड पर लिया था। इन तीनों आरोपियों ने एडवोकेट भारत भूषण शर्मा के माध्यम से एससी-एसटी कोर्ट में याचिका पेश की। उनका कहना था कि FIR में दर्ज असली आरोपियों को पुलिस आज तक गिरफ्तार नहीं कर सकी है और जिन्हें गिरफ्तार किया गया है, वे सभी मजदूर हैं और उनका इस मुकदमे से कोई सरोकार नहीं है। कोर्ट ने इन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।

अग्रवाल को जांच अधिकारी के सामने पेश होना होगा

जस्टिस मुकेश राजपुरोहित ने सुमित अग्रवाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए निर्देश दिया कि-

  1. याचिकाकर्ता अग्रवाल को 25 सितंबर की सुबह 11:30 बजे सरदारपुरा थाने में दर्ज केस के जांच अधिकारी के समक्ष उपस्थित होना होगा। उसे जांच में शामिल होने और अपना पक्ष रखकर जो भी दस्तावेज हो, पुलिस को देने होंगे।
  2. पब्लिक प्रॉसिक्यूटर को निर्देश दिया है कि वे अगली सुनवाई तक जांच में याचिकाकर्ता के सहयोग को दर्शाते हुए ताजा स्थिति रिपोर्ट, तथ्यात्मक रिपोर्ट व केस डायरी प्राप्त करें। अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ता को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा।
  3. इसी मामले से जुड़े एक अन्य साबिर पुत्र अनवर हुसैन, जिसके खिलाफ भी राकेश कन्नौजिया ने शिकायत की थी, उसकी याचिका को भी शामिल कर कोर्ट ने दोनों मामलों को साथ-साथ सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है।



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