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आरएसी की दिल्ली स्थित 12वीं बटालियन में तैनात जवान अजय कटारिया एक घर के बाहर वीआईपी सुरक्षा में तैनात था। वीआईपी की सुरक्षा के लिए अजय को कंपनी की तरफ से एक एसएलआर राइफल और 50 कारतूस अलॉट थे। अजय रोजाना की तरह सोमवार को भी ड्यूटी पर निकला था। रात को

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इसके बाद साथी जवान ने बार-बार कॉल करने का प्रयास किया। देर रात तक संपर्क नहीं हुआ, तो उसने कंपनी कार्यालय में कॉल कर गैरहाजिर होने की सूचना दी। अजय अपने साथ हथियार भी लेकर गया था, इसलिए कंपनी कमांडर ने तलाश शुरू करवाई। एडिशनल डीसीपी आलोक सिंघल के मुताबिक, बदले की आग में अजय दिल्ली से जयपुर पहुंचा और वारदात को अंजाम दिया।

कमांडेंट आदर्श सिद्दू का कहना है कि जवान अजय कटारिया की वीआईपी सुरक्षा में ड्यूटी लगी थी। रात को वह पॉइंट से हथियार लेकर गैर हाजिर हो गया था। ऐसे में मंगलवार को उसे सस्पेंड कर दिया और विभागीय कार्रवाई की जा रही है। शंकर के भाई बाबूलाल ने अजय सहित 4 लोगों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज करवाया है।

बदले की आग में अजय दिल्ली से जयपुर कत्ल करने पहुंचा

4 अगस्त की रात; अजय दिल्ली से वीआईपी ड्यूटी से बहाना बनाकर निकला। ड्यूटी से लाई राइफल को फोल्ड कर बैग में डाला। कपड़े बदले और मोबाइल स्विच ऑफ कर बस में बैठ गया, ताकि लोकेशन ट्रेस ना हो पाए। 5 अगस्त को अलसुबह जयपुर पहुंचा। दो घंटे तक होटल में ठहरा और तड़के साढ़े 5:30 बजे बगरू के लिए कैब बुक की। कैब से लेबर इंस्पेक्टर शंकर के घर पहुंचा।

5 अगस्त सुबह 6:30 बजे; शंकर के घर की रैकी की और साढ़े 6 बजे वारदात को अंजाम दे दिया। फिर कैब ड्राइवर को धमकाया और उसी कैब को लेकर फुलेरा पहुंच गया। रास्ते में नाकाबंदी देख फुलेरा थाने पहुंचा और सरेंडर कर दिया। थाने पहुंचकर बोला कि मैंने लेबर इंस्पेक्टर को मार डाला। कार्रवाई की मांग को लेकर परिजनों ने शव लेने से इनकार कर दिया। समझाइश के बाद देर रात माने।



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