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सोमवार की सुबह अगर आप जिला मुख्यालय की कृषि उपज मंडी पहुंचें, तो यहां आपको इंसान और पक्षियों की एक अनोखी दोस्ती का नजारा देखने को मिलेगा। मंडी की पहचान बन चुकी यह परंपरा हर किसी को सकारात्मक ऊर्जा से भर देती है। मंडी व्यापार संघ अध्यक्ष शुभम करणपुरिया बताते हैं कि पिछले कई वर्षों से कबूतर के झुंड मंडी में आकर बैठते है। करीब दस साल से यहां व्यापारी और स्थानीय लोग रोज सुबह यहां मिलकर कबूतरों को मक्का खिलाते हैं। रोजाना करीब तीन क्विंटल से अधिक मक्का चबूतरे पर डाला जाता है। शादी की सालगिरह हो, जन्मदिन या धार्मिक अवसर व्यापारी सुबह-सुबह कबूतरों के लिए दाना लेकर पहुंचते हैं।
व्यापारी छुट्टियों में भी इस परंपरा को निभाना नहीं भूलते। दूर-दराज क्षेत्र से बड़ी संख्या में कबूतर यहां दाना चुगने आते हैं। खास बात यह है कि ये कबूतर भी अपनी “मित्रता” निभाते हुए मंडी में रखे किसानों के माल को दूसरे कीटों और पक्षियों से सुरक्षित रखते हैं। अब इस अनोखी परंपरा से प्रभावित होकर मंडी के बाहर के लोग भी यहां कबूतरों को दाना डालने आते हैं। सुबह-सुबह जब हजारों कबूतर उड़ान भरते हैं, तो मंडी का नजारा किसी फिल्मी दृश्य से कम नहीं लगता।
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