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डिजिटल पेमेंट किट खरीद मामले में कथित घोटाले से जुड़ी जनहित याचिका में पिछले 6 साल से जवाब पेश नहीं होने पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई है। जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने एसीबी को निर्देश दिए हैं कि वह 15 दिन में जवाब पेश
वहीं अगर जवाब पेश नहीं होता है तो संबंधित अधिकारी कोर्ट में पेश हो जाए। बैंच ने यह आदेश पब्लिक अगेंस्ट करप्शन संस्था की पीआईएल पर सुनवाई करते हुए दिए। इसके साथ ही अदालत ने राजकॉम्प इन्फो सर्विस लिमिटेड और संबंधित अधिकारियों को भी नोटिस जारी किए हैं।
पीआईएल में करोड़ों के घोटाले का आरोप अधिवक्ता पूनम चंद भंडारी ने बताया कि राजस्थान में ई-मित्र संचालकों को डिजिटल किट बांटने के नाम पर भारी घोटाला किया गया है। उन्होंने बताया कि सितंबर 2017 में डिजिटल पेमेंट किट खरीदने के लिए 19 करोड़ का टेंडर निकाला गया, जिसे बाद में 33 करोड़ कर दिया गया।
इस टेंडर के अंतर्गत 8,592 पेमेंट किट खरीदी जानी थी। प्रत्येक किट में एक टैबलेट, एक पोस मशीन, एक फिंगरप्रिंट स्केनर आदि थी। इसके अतिरिक्त प्रत्येक मशीन का एक मासिक सब्सक्रिप्शन भी खरीदा जाना था।
किट्स का पता तक नहीं चला
याचिकाकर्ता के द्वारा आरटीआई से प्राप्त जानकारी के अनुसार मार्च 2019 तक केवल 4,964 किट ही एक्टिव हो पाई थी, बाकी किट्स का पता नहीं है। जबकि सभी किट का भुगतान कर दिया गया था। वहीं फर्म को रखरखाव के नाम पर 8 करोड़ का भुगतान अलग से किया गया।
इसकी शिकायत हमने एसीबी में की, लेकिन एसीबी ने इस मामले में कोई जांच नहीं की। इसके बाद हमने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की।
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