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हाईकोर्ट ने पंचायतीराज विभाग की एलडीसी भर्ती-2013 में सरकार द्वारा बताए गए 392 पदों पर ही नियुक्ति देने के आदेश दिए हैं। जस्टिस समीर जैन की अदालत ने यह निर्देश रमेश चंद्र सैनी व अन्य की याचिकाओं को खारिज करते हुए दिए।
याचिकाओं में भर्ती में विज्ञाप्ति सभी पदों पर नियुक्ति देने की मांग की थी। लेकिन एकलपीठ ने इस मांग को खारिज कर दिया। इससे पहले हाईकोर्ट की मुख्यपीठ जोधपुर में भी खंडपीठ इस तरह की मांग को खारिज कर चुकी हैं।
करीब 12 साल से चल रहा है विवाद अधिवक्ता आरके गौत्तम और रामप्रताप सैनी ने बताया कि पंचायतीराज विभाग में साल 2013 में एलडीसी के 19 हजार 275 पदों पर भर्ती निकाली थी। इसमें विभाग ने करीब 7 हजार से अधिक पदों पर नियुक्तियां दे दी। लेकिन बाद में बोनस अंक विवाद को लेकर भर्ती पर रोक लग गई।
मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और 2016 में यह विवाद तय हुआ। उसके बाद साल 2017 में सरकार ने हाईकोर्ट में इस बात को स्वीकार किया कि वह शेष 10 हजार 29 पदों पर नियुक्तियां देगी। लेकिन इस आदेश की पालना नहीं की।
सरकार ने कहा केवल 392 पद खाली इस पर हाईकोर्ट में फिर से याचिकाएं दायर हुई। मुख्यपीठ जोधपुर में सरकार ने कहा कि हमने करीब 4 हजार पद प्रमोशन और डायरेक्ट भर्ती से भर दिए हैं। वहीं हम नई भर्ती निकाल चुके हैं। इसके साथ ही हमने कैडर पुर्नगठन कर दिया हैं।
ऐसे में हम हमारे पास 6,029 पद शेष नहीं बचे हैं। हम केवल 392 पदों पर ही भर्ती कर सकते हैं। इसके विरोध में याचिकाकर्ताओं ने कहा कि सरकार ने हाईकोर्ट की खंडपीठ के समक्ष गलत तथ्य पेश किए हैं। लेकिन एकलपीठ ने खंडपीठ का आदेश हवाला देकर सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया।
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