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इस समय मैं करौली के उसी फूटाकोट चौराहे पर खड़ा हूं, जहां 2 अप्रैल 2022 को सांप्रदायिक दंगे में इस नन्ही बेटी की जान संकट में पड़ गई थी। बहुत हिंसक और डरावने हालात थे। मकान-दुकानों में आग लगा दी गई थी। यह बच्ची दम घुटने से बेसुध हो गई थी। आग की लपटों के
अब यही बेटी सेंट जेवियर स्कूल में पहली कक्षा में पढ़ रही है। पीहू नाम है। नेत्रेश हमारे साथ पीहू से मिलने उसी जगह आए हैं जहां वो करिश्मा हुआ था। पीहू के साथ मां विनीता और पिता ओम थे। जैसे ही उन्होंने पीहू से कहा, ये वही अंकल हैं… पीहू नेत्रेश की गोद में चढ़ गई। नेत्रेश गदगद, विनीता इतनी भावुक की आंखें नम हो गईं…और ओम हाथ जोड़कर नेत्रेश का आभार जताने लगे। ओम बोले- बिना स्वार्थ के हर कोई एक-दूजे के लिए ऐसा कर गुजरे। नेत्रेश से हम भले ही अरसे बाद आज मिले हैं, लेकिन वे हमारी जिंदगी के अटूट हिस्सा हैं। इधर, नेत्रेश पीहू को दुलार रहे हैं।
चॉकलेट पहले ही लेकर रखी थी उन्होंने। अपने हाथों से खिलाई। बातें चलीं तो दरवाजे की ओर इशारा करते हुए बोले- भारी तनाव का माहौल था। मां-बेटी सामने वाले मकान में फंसी थीं। आग बढ़ती जा रही थी। मकानों की पटि्टयां टूटकर गिर रही थीं। मां बच्ची को दुपट्टे में लपेट रही थी, तभी बच्ची बेसुध हो गई थी। मैंने देखा तो उनकी तरफ भागा। पीहू को उठाया और दौड़कर लपटों से बाहर लाया। वो सब याद करता हूं तो आनंद मिलता है। विनीता बोलीं- वो आपका उपकार और ईश्वर का चमत्कार हम जिंदगीभर नहीं भूल सकते।
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