![]()
खून से जुड़ी बीमारी (थैलेसीमिया और एनीमिया) से पीड़ित मरीजों के लिए ये जरूरी खबर है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की बजट घोषणा को लागू करते हुए एसएमएस हॉस्पिटल में इन मरीजों के लिए डेडिकेटेड ओपीडी (क्लिनिक) शुरू की गई है। ये क्लिनिक धंवन्तरी ओपीडी में 4
एसएमएस मेडिकल कॉलेज से जारी आदेशों में ये क्लिनिक इम्यूनो हेमेटोलॉजी एवं ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन (IHTM) डिपार्टमेंट के सहयोग से शुरू किया है। डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ. विष्णु शर्मा ने बताया- अभी तक इस बीमारी के मरीजों को जनरल मेडिसिन डिपार्टमेंट में डॉक्टर देखते थे। इस क्लिनिक को शुरू करने का सबसे बड़ा फायदा उन मरीजों को होगा, जिनमें थैलेसीमिया मेजर या माइनस या एनिमिया से पीड़ित है। यहां ऐसे मरीजों की स्क्रीनिंग और जांच के बाद उनकी आवश्यक काउंसलिंग की जा सकेगी।
उन्होंने बताया वर्तमान में खून की कमी (एनीमिया) और थैलेसीमिया से प्रभावित हर रोज करीब 8 से 10 मरीज एसएमएस हॉस्पिटल में खून चढ़वाने रोजाना आते है। वहीं जे.के. लोन हॉस्पिटल में भी हर रोज औसतन 15 मरीज आते है।
शुरूआती स्तर पर हो सकेगी बीमारी डिटेक्ट
इस क्लिनिक के शुरू होने से उन मरीजों (जिनके माइनर थैलेसीमिया) को सबसे ज्यादा जिनके बच्चे होने वाले है। ऐसे पति-पत्नी जो इस बीमारी से प्रभावित है, उनके होने वाले बच्चों में भी इस बीमारी के होने की संभावना बहुत ज्यादा रहती है। ऐसी स्थिति में शुरूआती जांच करके 12 सप्ताह की गर्भवती महिला को ये बताया जा सकता है कि उसके गर्भ में पल रहे बच्चे में ये बीमारी है या नहीं?
4 फीसदी लोगों में ये बीमारी
डॉक्टरों के मुताबिक माइनर थैलेसीमिया से करीब 4 फीसदी लोग प्रभावित है। इस बीमारी में मरीज को ब्लड ट्रांसफ्यूजन (बार-बार खून चढ़ाने) करने की जरूरत नहीं पड़ती। इन मरीजों को समय पर डिटेक्ट करने पर दवाईयां के जरिए ही स्वस्थ्य रखा जा सकता है।
Discover more from Kuchaman City Directory
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
Comments