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इंश्योरेंस कंपनियों के लीगल प्राधिकृत अधिकारी एवं पैनल अधिवक्ताओं से लोक अदालत में रेफर प्रकरणों के निस्तारण को लेकर चर्चा करते विधिक सेवा समिति के सचिव कमल छंगाणी।
राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर में 13 सितंबर को इस वर्ष की तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है। इसके सफल संचालन के लिए राजस्थान उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति के सचिव कमल छंगाणी की अध्यक्षता में बुधवार को विशेष बैठक का आयोजन किया गया। इ
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के निर्देश पर आयोजित होने वाली लोक अदालत की अध्यक्षता राजस्थान उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति के अध्यक्ष जस्टिस डॉ. पुष्पेन्द्र सिंह भाटी करेंगे।
13 इंश्योरेंस कंपनियों ने दिया सहयोग का आश्वासन
हाईकोर्ट के मध्यस्थता केंद्र परिसर के सभागार में आयोजित बैठक में न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, यूनाईटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, दी ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, श्रीराम जनरल इंश्योरेंस कंपनी, एचडीएफसी एर्गो जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, इफको टॉक्यो जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, बजाज एलियांज इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, चोलामंडलम एमएस जनरल इंश्योरेंस कंपनी, आईसीआईसीआई लॉम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड और एसबीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के लीगल प्राधिकृत अधिकारी एवं पैनल अधिवक्ताओं ने भाग लिया।
ज्यादा से ज्यादा मामलों के निपटारे का आह्वान
सचिव कमल छंगाणी ने बैठक में उपस्थित सभी इंश्योरेंस कंपनियों के कानूनी प्रतिनिधियों से तृतीय राष्ट्रीय लोक अदालत में रेफर होने वाले प्रकरणों में ज्यादा से ज्यादा पक्षकारों को बुलाकर उन्हें सुलह के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया। छंगाणी ने कहा कि प्रत्येक कंपनी को अपने ज्यादा से ज्यादा मामलों का निपटारा कराने के लिए सक्रिय सहयोग देना चाहिए।
इस पर सभी इंश्योरेंस कंपनियों के प्रतिनिधियों ने तृतीय राष्ट्रीय लोक अदालत के सफल आयोजन एवं अधिकाधिक प्रकरणों के निस्तारण में पूरी तरह से सहयोग का आश्वासन दिया। इस लोक अदालत से बीमा संबंधी विवादों का त्वरित और प्रभावी समाधान अपेक्षित है।
राष्ट्रीय लोक अदालत का महत्व
राष्ट्रीय लोक अदालत न्यायिक प्रक्रिया को सरल और तीव्र बनाने का एक प्रभावी माध्यम है। इसके तहत पारस्परिक सहमति से मामलों का निपटारा किया जाता है, जिससे न्यायालयों पर लंबित मामलों का बोझ कम होता है और पक्षकारों को त्वरित न्याय मिलता है। विशेषकर बीमा क्षेत्र के मामलों में यह व्यवस्था काफी कारगर सिद्ध हो रही है।
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