Nationwide Household Well being Survey report | नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट: प्रदेश में 56 प्रतिशत पुरुषों के पास मकान का मालिकाना हक, 43% जमीन के मालिक – Jaipur Information
राज्य सरकार द्वारा महिलाओं के नाम मकान-जमीन खरीदने पर स्टांप ड्यूटी में छूट और हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम के तहत बेटियों को पैतृक संपत्ति में बेटों के बराबर अधिकार दिए जाने के बावजूद राजस्थान में महिलाओं का संपत्ति मालिकाना हक काफी कम है। नेश
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राष्ट्रीय औसत के मुकाबले भी राजस्थान की महिलाएं पीछे हैं, जहां महिलाओं का मकान का स्वामित्व 43.3% और जमीन का 31.7% है। उधर, मातृवंशीय सामाजिक संरचना के लिए पहचाने जाने वाले मेघालय में 64.1% महिलाओं के पास मकान का स्वामित्व है, जो पुरुषों के 48% के आंकड़े से ज्यादा है।
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हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम, 2005 के तहत बेटियों को पैतृक संपत्ति में बराबर का अधिकार है, लेकिन जमीन पर इसका अमल कमजोर है।
कई परिवार आज भी बेटों को संपत्ति हस्तांतरित करते हैं। महिलाओं की श्रम बाजार में सीमित भागीदारी और पुरुषों से कम आय उन्हें संपत्ति खरीदने में कमजोर बनाती है।
बैंक व वित्तीय संस्थानों से ऋण तक महिलाओं की पहुंच सीमित है। सामाजिक और पारिवारिक दबावों के कारण महिलाएं स्वेच्छा से अपना हक छोड़ देती हैं।
अध्ययन बताते हैं कि जिन महिलाओं के पास संपत्ति होती है, उनके खिलाफ घरेलू हिंसा का खतरा कम होता है और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है। तलाक, अलगाव या पति की मृत्यु जैसी विपरीत परिस्थितियों में यह महिलाओं के लिए सुरक्षा कवच का काम करती है।
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