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नदबई जिला चिकित्सालय में गुरुवार को सुबह करीब नौ बजे बुखार से पीडित चार वर्षीय बालक की मौत हो गई। जिससे गुस्साए परिजनों ने चिकित्साकर्मियों पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए हंगामा कर दिया। परिजनों ने बताया कि डॉक्टर ने बच्चे को गलत इंजेक्शन लगा दि
चिकित्साकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई सहित छह सूत्रीय मांग करते हुए ग्रामीण व परिजनों ने पानी टंकी समीप जाम लगाने का प्रयास किया। मौके पर पहुंचे सीओ अमरसिंह राठौड़, थाना प्रभारी बृजेन्द्र सिंह, तहसीलदार विनोद मीणा ने समझाइश करने का प्रयास तो किया। लेकिन, ग्रामीण व परिजन सड़क के समीप ही धरने पर बैठ गए। बाद में एसडीएम गंगाधर मीणा व परिजनों के बीच आपसी सहमति होने पर करीब आठ घण्टे बाद मेडिकल बोर्ड से बालक के शव का पोस्टमार्टम हुआ।
जानकारी के अनुसार सुबह झारकई निवासी कप्तान सिंह पुत्र रामसिंह कैरों ने अपने चार वर्षीय बालक तेजस कैरों को बुखार होने के चलते जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया। चिकित्साकर्मियों ने प्राथमिक उपचार करते हुए बालक को जिला मुख्यालय रैफर कर दिया। लेकिन, जिला मुख्यालय ले जाने से पहले ही बालक की मौत हो गई।
पहाड़ से दर्द पर संवेदनहीन हंसी… टेबल पर शव फिर भी हंसता रहा डॉक्टर
डॉक्टर काे भगवान का रूप माना गया है, लेकिन गुरुवार काे नदबई में हुए हादसे के दैारान यह विश्वास चीर-चीर होते दिखा। चार साल का तेजस डॉक्टर के सामने दम तोड़ चुका था। परिजन रो-रोकर बेहाल थे। बालक का शव टेबल पर था और डॉ. भागचंद मीणा बगल में कुर्सी पर बैठे थे। इस दैारान हंसते दिखाई दिए। बच्चे की मौत का शायद उसे कोई अफसोस नहीं था। जब परिजनों ने आपत्ति जताई ताे डॉक्टर ने कहा फालतू बात नहीं, दिमाग हमारे भी अंदर है। लेकिन शायद संवेदना नहीं।
छह सूत्रीय मांग पर अड़े रहे ग्रामीण…
परिजनों ने चिकित्सक व चिकित्साकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज कराने, एपीओ करने, मृतक के परिजनों को राज्य सरकार की ओर से मुआवजा मिलने, अनुकंपा नियुक्ति मिलने, मेडिकल बोर्ड से शव का पोस्टमार्टम कराने व मामले की जांच पुलिस के उच्च अधिकारी से कराने की मांग की गई। बाद में एसडीएम गंगाधर मीणा की ओर से हरसंभव सहायता मिलने के आश्वासन पर मामला शांत हुआ।
“अतिरिक्त ब्लॉंक की तीन सदस्यीय चिकित्सा टीम गठित कर बालक के शव का पोस्टमार्टम कराया गया। परिजनों ने जो मांग पत्र दिया है, अग्रिम कार्रवाई को लेकर मांगपत्र को उच्चाधिकारियों को भेज दिया गया। पीडित परिवार की सहायता का हरसंभव प्रयास किया जाएगा।” -गंगाधर मीणा, एसडीएम नदबई
“वार्ड में भर्ती बालक का चिकित्सक टीम ने प्राथमिक उपचार करते हुए गंभीर स्थिति में रैफर कर दिया। लेकिन, परिजन करीब सवा घण्टे तक 108 एंबुलेंस का इंतजार करते रहे। जिसके चलते बालक की मौत हो गई। फिर भी मामले में तीन सदस्यीय टीम से पोस्टमार्टम कराते हुए मामले में निष्पक्ष जांच को लेकर टीम गठित की जाएगी।” -डॉं रामनिवास मीणा, डिप्टी कंट्रोलर जिला चिकित्सालय नदबई।
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