☜ Click Here to Star Rating


मुनि श्री चिन्मय सागर जी का आज शाम को समाधिमरण हो गया।

आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के निर्यापकत्व में मुनि 108 श्री चिन्मय सागर जी का यम संलेखना में 3 उपवास के बाद समाधिमरण हो गया। इसके बाद उनके दर्शन करने के लिए लोग उमड़ पड़े। मुनि श्री का समाधिमरण आचार्य श्री के श्री मुख से अरिहंत सिद्ध सुनते हु

.

सूचना मिलने के बाद जैन समाज के लोग बड़ी संख्या में उनके दर्शन करने जैन नसियां पहुंचे। इस मौके पर मुनि चिन्मय सागर के लौकिक जीवन के कई परिजन भी जैन नसियां में कुछ दिन से उनके स्वास्थ्य में गिरावट को देखते हुए ये ही थे। वहीं। अन्य परिजन भी इनके समाधिमरण का समाचार सुनकर गांव से यहां आने के लिए रवाना हो गए है।

राजेश पंचोलिया इंदौर ने बताया कि इनकी चाकडोल यात्रा बुधवार सुबह 7 बजे जैन नसियां से रवाना होकर इसूजी जी गारमेंट्स के सामने से समाधिस्थल जाएगी। जहां विधि पूर्वक अभिषेक पूजन कर अग्नि संस्कार होगे।

मुनि चिन्मय सागर जी के समाधिमरण के बाद उनकी पार्थिव देह के साथ खड़े उनके लौकिक जीवन के परिजन।

मुनि चिन्मय सागर जी के समाधिमरण के बाद उनकी पार्थिव देह के साथ खड़े उनके लौकिक जीवन के परिजन।

उदयपुर में हुआ था जन्म

राजेश पंचोलिया के अनुसार 88 वर्षीय मुनि श्री चिन्मयसागर जी जन्म का नाम देवीलाल भौरावत नरसिंहपुरा जैन था। इनका जन्म 13 फरवरी 1937 में डबोक हवाई अड्डा (उदयपुर) में हुआ। इनके पिता का नाम श्री किशोरचंद भोरावत और माता का नाम श्रीमती बख्तावरदेवी है। परिवार के बीच रहकर शिक्षा पांचवी तक प्राप्त की हुई है। गृहस्थ अवस्था की पत्नी का नाम श्रीमती बबला देवी था। वैराग्य की प्रेरणास्रोत आर्यिका श्री विशुद्धमति माताजी (सतना) रही। ब्रह्मचर्य व्रत सन 1989 में लिया।

धार्मिक शिक्षा एवं मुनि दीक्षा आचार्य श्री अजीत सागर जी द्वारा 10 फरवरी 1989 उदयपुर में हुई। इनकी सीधी मुनि दीक्षा हुई। श्री चिन्मय सागर जी 36 वर्ष से संयम साधना में है। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी अन्य नगर में होने से गुरु की आज्ञा से गृहस्थ अवस्था की बहन श्रीमती मोहन देवी को धरियावद में एक मात्र आर्यिका दीक्षा देकर आर्यिका श्री धन्य मति नाम किया।

कुछ समय बाद धरियावद में उनकी समाधि भी हो गई। कुछ वर्ष पूर्व आचार्य श्री के सानिध्य में साबला में मुनि श्री चिन्मय सागर जी प्रेरणा से पूर्व परिजनों ने आचार्य श्री अजीत सागर जी की प्रतिमा लगवाने और अन्य विकास निर्माण प्रभावना कार्य में उल्लेखनीय योगदान दिया।

13 को यम संलेखना ग्रहण करवाई थी

समाज प्रवक्ता पवन कंटान एवं विकास जागीदार ने बताया कि 13 सितंबर सुबह 9 बजे आचार्य श्री के ससंघ आशीर्वाद एवं मंगल सानिध्य में मुनि श्री हितेंद्र सागर जी महाराज ने जल का आहार कराकर मुनि श्री चिन्मय सागर जी को यम संलेखना ग्रहण करवाई थी। मुनि श्री की मंगल समाधि के लिए समस्त संघ की ओर से अत्यंत भावपूर्ण प्रार्थना की थी



Discover more from Kuchaman City Directory

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Comments

Leave a Reply

error: Content is protected !!

Sign In

Register

Reset Password

Please enter your username or email address, you will receive a link to create a new password via email.

Discover more from Kuchaman City Directory

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading