उत्तराखंड में शहीद हुए करौली के अग्निवीर अजीत सिंह (20) का रविवार को सैन्य सम्मान से अंतिम संस्कार किया गया। बड़े भाई अंकुर सिंह उन्हें मुखाग्नि दी। सेना के जवानों ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया।
अजीत सिंह 14 राजपूताना राइफल्स में तैनात थे। वे उत्तराखंड में उत्तरकाशी के धराली गांव में 5 अगस्त को बादल फटने के बाद लापता हो गए थे। 14 दिन बाद 19 अगस्त को घटनास्थल के पास ही उनकी बॉडी मिली। डीएनए टेस्ट से उनकी पहचान हुई।

अग्निवीर अजीत सिंह को सेना के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया।
जिला सैनिक कल्याण कार्यालय पहुंचा पार्थिव शरीर रविवार दोपहर करीब 12 बजे अजीत सिंह का पार्थिव शरीर सेना के ट्रक से उत्तराखंड से करौली के जिला सैनिक कल्याण कार्यालय पहुंचा। जहां सैनिक कल्याण बोर्ड अध्यक्ष सूबेदार मेजर हरीश गुर्जर, कैप्टन राजकुमार सिंह जादौन समेत अन्य सैन्य अधिकारियों ने पुष्प अर्पित किए।
दोपहर करीब 1 बजे अजीत सिंह का पार्थिव शरीर करौली के सपोटरा उपखंड में उनके गांव बुद्धपुरा भरतून लाया गया। परिजनों ने पार्थिव देह के अंतिम दर्शन किए। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था।
विधायक हंसराज मीणा ने भी पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद घर से श्मशान घाट तक अंतिम यात्रा निकाली गई। इस दौरान अजीत सिंह अमर रहे के नारे गूंज उठे।

पैतृक गांव पहुंचा तिरंगे में लिपटा अग्निवीर अजीत सिंह का पार्थिव शरीर।

अग्निवीर की अंतिम यात्रा में लोगों ने अजीत सिंह अमर रहे के नारे लगाए।
DNA टेस्ट से हुई पहचान जिला सैनिक कल्याण कार्यालय में वेलफेयर ऑर्गनाइजर कैप्टन राजकुमार सिंह जादौन ने बताया- अग्निवीर अजीत सिंह पुत्र मलखान सिंह धराली में 5 अगस्त को प्राकृतिक आपदा के बाद से लापता थे।
19 अगस्त को उनका शव सैनिकों और यात्रियों की खोज के लिए चलाए जा रहे विशेष रेस्क्यू अभियान के दौरान मिला। बॉडी को वहां के अस्पताल में रखवाया गया, लेकिन चेहरे से पहचान नहीं हो सकी।
इसलिए परिवार के लोगों का डीएनए लेकर मिलान किया। इसके बाद शव पैतृक गांव पहुंचा, जहां सैन्य सम्मान से अंतिम संस्कार किया गया।

सैन्य सम्मान के साथ हुआ अजीत सिंह का अंतिम संस्कार। बड़े भाई अंकुर सिंह ने उन्हें मुखाग्नि दी।
20 जून को आर्मी बैस कैंप हर्षिल में जॉइन की थी ड्यूटी अजीत सिंह के बड़े भाई अंकुर सिंह और मौसेरे भाई सुरेंद्र सिंह जादौन ने बताया- अजीत 4 जून को आर्मी ट्रेनिंग के बाद 15 दिन की छुट्टी लेकर गांव आया था। इसके बाद 20 जून को 14 राजपूताना राइफल्स आर्मी बैस कैंप हर्षिल (उत्तराखंड) में ड्यूटी जॉइन कर ली।
5 अगस्त को धराली में बादल फटने से हर्षिल में सेना के कैंप में मलबा और पानी घुसने से कई जवान लापता हो गए। उनमें अजीत भी शामिल था। 4 अगस्त की शाम अंतिम बार अजीत ने बड़ी बहन प्रियंका से मोबाइल फोन पर बात की थी। उसके दूसरे दिन यह हादसा हो गया।
अजीत सिंह के पिता किसान हैं। उनके 2 भाई और 2 बहन हैं।
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